Category: आलेख

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हिन्दुत्व ही भारत की पहचान

धर्म सबको जोड़ता है। भारत की इस जीवनदृष्टि को दुनिया में ‘हिंदू जीवनदृष्टि’ के नाम से जाना जाता रहा है। यह भारत के सभी लोगों की पहचान बन गई है। किसी की भाषा, जाति...

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मानवता के कल्याण के लिए निरंतर अग्रसर रहना परोपकार का मूल मंत्र है

परोपकार वह महान गुण है जो मानव को इस सृष्टि के अन्य जीवों से उसे अलग करता है और सभी में श्रेष्ठता प्रदान करता है। इस गुण के अभाव में तो मनुष्य भी पशु की...

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अब और तब: तब हिंदी UN को सुनती थी, अब UN हिंदी को

वैश्वीकरण के  गलियारे से गुजरने वाले 21वीं सदी की इस दुनिया में पूरा विश्व एक गाँव बन चुका है जिसे आज की डिक्शनरी में हम ‘ग्लोबल विलेज’ कहते हैं. वैश्वीकरण आज बाजार व व्यापार...

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10 मई, 1857 विशेष: प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े अनकहे तथ्य और भ्रांतियों की पड़ताल

1857 का वो प्रथम स्वतंत्रता संग्राम साल 1850 के आते आते ईस्ट इंडिया कंपनी का देश के बड़े हिस्से पर कब्जा हो चुका था। जैसे-जैसे ब्रिटिश शासन का भारत पर प्रभाव बढ़ता गया, वैसे-वैसे...

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1857 के बाद मुस्लिम तुष्टिकरण, साम्प्रदायिकता और विभाजन

स्वतंत्रता संग्राम की व्यापकता, तीव्रता और प्रभाव डलहौजी ने भारत से जाने के बाद, अगले दिन (29 फरवरी, 1956) ही विक्टोरिया को एक पत्र लिखा. उसने अपनी महारानी को बताया कि भारत में शांति कब...

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करुणा, सत्य, प्रेम और मनुष्यता से आचरण को गंगा की तरह पवित्र बनाया जा सकता है

भक्त और कवि गोस्वामी तुलसीदास के पास मानव चिंता से बढ़कर कोई अन्य चिंता नहीं रही। वाल्मीकि, वेद व्यास के बाद उनकी सामाजिक चिंता की दृष्टि सर्वोपरि है। मानव के भीतरी पक्षों पर उनसे...

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लेकिन, कांग्रेस ने पाकिस्तान और शेख अब्दुल्ला की धमकियों के कारण विधेयक पास नहीं होने दिया

भाग – 2 1964 में तमाम दल आर्टिकल 370 को हटाने के लिए एकजुट थे भारतीय जनसंघ के सांसद यू.एम. त्रिवेदी 13 मई, 1964 को किसी प्रस्ताव पर लोकसभा में बोल रहे थे. हालाँकि...

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साल 1964 में अनुच्छेद 370 हटाने को देश के दर्जनों सांसदों ने लोकसभा में एकमत से उठायी थी आवाज़

भाग – 1 जयपुर (विसंकें)। भारतीय राजनीति में साल 1964 को दो महत्वपूर्ण घटनाओं के लिए याद किया जा सकता है. पहला, इसी एक साल में देश ने तीन प्रधानमंत्री देखे. जवाहरलाल नेहरू के...

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जिन्ना ने कभी नहीं की दंगे रुकवाने की कोशिश: चाहते तो नहीं बहता सिखों और हिदुंओं का खून

कांग्रेस में हाल ही में शामिल हुए शत्रुघ्न सिन्हा ने जिस जिन्ना की तारीफ में कसीदे पढ़े। जिस मोहम्मद अली जिन्ना का भी देश की तरक्की और आजादी में योगदान बताया। वह जिन्ना लाखों...

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मानव मन की श्रेष्ठता अभिमान से नहीं स्वाभिमान से आंकी जाती है

महत्व मिलने पर दूसरों को लघु समझना अभिमानी होने का प्रमाण है जबकि लघुत्व से महत्व की और बढ़ना स्वाभिमान होने की निशानी है। अभिमान में व्यक्ति अपना प्रदर्शन कर दूसरों को नीचा दिखाने की...