Category: इतिहास-स्मृति

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स्वामी विवेकानंद द्वारा विश्व धर्म सम्मेलन शिकागो में 11 सितम्बर 1893 को दिया गया ओजस्वी भाषण

अमेरिकावासी बहनों तथा भाईयों, आपने जिस सौहार्द्र और स्नेह के साथ हम लोगों का स्वागत किया है, उसके प्रति आभार प्रकट करने के निमित्त खड़े होते समय मेरा हृदय अवर्णनीय हर्ष से पूर्ण हो...

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वीर गोगादेव चौहान जी की छड़ी का पूजन

डॉ. हेडगेवार स्मारक समिति एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, सामाजिक समरसता मंच के तत्वाधान में 17 अगस्त शाम को “अर्चना” रामबाग पर पूज्य वीर गोगादेव चौहान के  निशान (छड़ी) के पूजन का आयोजन किया गया....

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08 अगस्त / राज्याभिषेक दिवस – राजा कृष्णदेव राय

एक के बाद एक लगातार हमले कर विदेशी मुस्लिम आक्रांताओं ने भारत के उत्तर में अपनी जड़ें जमा ली थीं. अलाउद्दीन खिलजी ने मलिक काफूर को एक बड़ी सेना देकर दक्षिण भारत जीतने के...

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19 जुलाई / इतिहास स्मृति – जलियांवाला के प्रतिशोधी ऊधमसिंह, 27 साल बाद भारत आए भस्मावशेष

जयपुर (विसंकें). ऊधमसिंह का जन्म ग्राम सुनाम ( जिला संगरूर, पंजाब) में 26 दिसम्बर, 1899 को सरदार टहलसिंह जी के घर में हुआ था. मात्र दो वर्ष की अवस्था में ही इनकी माँ का...

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15 जुलाई / इतिहास स्मृति – शहीद जवान का 48 वर्ष बाद अन्तिम संस्कार

जो भी व्यक्ति इस संसार में आया है, उसकी मृत्यु होती ही है. मृत्यु के बाद अपने-अपने धर्म एवं परम्परा के अनुसार उसकी अंतिम क्रिया भी होती ही है. पर, मृत्यु के 48 साल बाद अपनी जन्मभूमि में...

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30 जून / इतिहास स्मृति – संथाल परगना में 20 हजार वीरों ने दी प्राणाहुति

स्वाधीनता संग्राम में वर्ष 1857 एक मील का पत्थर है, लेकिन वास्तव में अंग्रेजों के भारत आने के कुछ समय बाद से ही विद्रोह का क्रम शुरू हो गया था. कुछ हिस्सों में रवैये से परेशान...

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25 जून / इतिहास स्मृति – …..और अंग्रेज सेना को करना पड़ा समर्पण

जिन अंग्रेजों के अत्याचार की पूरी दुनिया में चर्चा होती है,  भारतीय वीरों ने कई बार उनके छक्के छुड़ाए थे. ऐसे कई प्रसंग इतिहास के पृष्ठों पर सुरक्षित हैं. ऐसा ही एक स्वर्णिम पृष्ठ...

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10 जून / विजय दिवस – पराक्रमी राजा सुहेलदेव

मुस्लिम आक्रमणकारी सालार मसूद को बहराइच (उत्तर प्रदेश) में उसकी एक लाख बीस हजार सेना सहित जहन्नुम पहुंचाने वाले राजा सुहेलदेव का जन्म श्रावस्ती के राजा त्रिलोकचंद के वंशज पासी मंगलध्वज (मोरध्वज) के घर...

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27 अप्रैल / इतिहास स्मृति – कांगला दुर्ग का पतन

वर्ष 1857 के स्वाधीनता संग्राम में सफलता के बाद अंग्रेजों ने ऐसे क्षेत्रों को भी अपने अधीन करने का प्रयास किया, जो उनके कब्जे में नहीं थे. पूर्वोत्तर भारत में मणिपुर एक ऐसा ही...

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23 अप्रैल / इतिहास स्मृति – पेशावर कांड के नायक चन्द्रसिंह गढ़वाली

जयपुर (विसंकें). चन्द्रसिंह का जन्म ग्राम रौणसेरा, (जिला पौड़ी गढ़वाल, उत्तराखंड) में 25 दिसम्बर, 1891 को हुआ था. वह बचपन से ही बहुत हृष्ट-पुष्ट था. ऐसे लोगों को वहां ‘भड़’ कहा जाता है. केवल...