Category: column ( स्तंभ )

शाश्वत मूल्यों के प्रकाश में चलने वाली परम्परा के लिए ग्लास्नोस्त शब्द अप्रासंगिक है 0

शाश्वत मूल्यों के प्रकाश में चलने वाली परम्परा के लिए ग्लास्नोस्त शब्द अप्रासंगिक है

सरसंघचालक डॉ. मोहन जी भागवत की तीन दिवसीय व्याख्यानमाला के पश्चात अपेक्षित बहस जनमाध्यमों में चल पड़ी है. अनेक लोगों ने इसका स्वागत किया है. कुछ लोगों ने जो कहा गया उसकी प्रामाणिकता पर...

विरोध, दुष्प्रचार, कुठाराघात के बावजूद संघ कार्य व विचार सर्वव्यापी, सर्वस्पर्शी बन रहा 0

विरोध, दुष्प्रचार, कुठाराघात के बावजूद संघ कार्य व विचार सर्वव्यापी, सर्वस्पर्शी बन रहा

दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी की तीन दिवसीय व्याख्यानमाला, भविष्य का भारत : संघ का दृष्टिकोण, पूर्णतया सफल रही. इस व्याख्यानमाला में प्रतिपादित विषयों की कुछ चर्चा अभी...

पश्चिम बंगाल में बिलख रहे हैं हिन्दू 0

पश्चिम बंगाल में बिलख रहे हैं हिन्दू

इसमें दो राय नहीं है कि ममता बनर्जी के राज में पश्चिम बंगाल में सिर्फ और सिर्फ मुसलमानों के लिए नीतियां बनती हैं और उनके कार्यान्वयन के लिए किसी पर गोली भी चलाई जा...

अमेरिका भी मानता है कि भारत वामपंथी हिंसा से पीड़ित है 0

अमेरिका भी मानता है कि भारत वामपंथी हिंसा से पीड़ित है

अमेरिका के विदेश विभाग की एक संस्था ने रिसर्च करने के बाद एक रिपोर्ट बनाई है। इस रिपोर्ट के तहत दुनिया के पांच सबसे खूंखार आतंकी संगठनों की सूची जारी की गई है। आपको...

केरल में बड़े पैमाने पर रोहिंग्याओं की भरमार, वोट बैंक के लालच में दी जा रही शह 0

केरल में बड़े पैमाने पर रोहिंग्याओं की भरमार, वोट बैंक के लालच में दी जा रही शह

आखिरकार 4 अक्तूबर को वकील प्रशांत भूषण की रोहिंग्या घुसपैठियों को (देश में बनाए रखने को) लेकर दायर याचिका पर सर्वोच्च न्यायालय ने इस मुद्दे में दखल देने से इंकार कर दिया। अब केन्द्र...

संघ जीने वाला स्वयंसेवक 0

संघ जीने वाला स्वयंसेवक

भय्याजी जोशी अटल जी एक संवेदनशील व्यक्ति के रूप में सदैव हमारे स्मरण में रहेंगे. ऐसे व्यक्ति सैकड़ों वर्षों के बाद जन्म लेते हैं. इस शतक में उनके समान और कोई नहीं है. अटल...

आधुनिक भारत के कौटिल्य पं. दीनदयाल उपाध्याय 0

आधुनिक भारत के कौटिल्य पं. दीनदयाल उपाध्याय

भारत के एक प्रमुख विचारक पं. दीनदयाल उपाध्याय भारतीय संस्कृति एवं वैदिक ज्ञान से अनुप्राणित थे। उन्होंने 1965 में एकात्ममानववाद की व्याख्या के बहुत पूर्व 1958 में अपनी पुस्तक ‘भारतीय अर्थनीति-विकास की एक दिशा’...

हिन्दुत्व अर्थात् भारतीयता 0

हिन्दुत्व अर्थात् भारतीयता

राष्ट्र की सनातन पहचान से परहेज कैसा? हिन्दुस्थान में हिन्दुत्व का विरोध हो, तो हिन्दुस्थानियों के लिए इससे दुर्भाग्यपूर्ण और क्या हो सकता है? इसके लिए वर्तमान राजनीतिक वातावरण जिम्मेदार है और इस वातावरण को...

संघ को नजदीक जाकर समझने की आवश्यकता 0

संघ को नजदीक जाकर समझने की आवश्यकता

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत का यह कथन महत्वपूर्ण है कि जिस दिन हम कहेंगे कि मुसलमान नहीं चाहिए, उस दिन हिंदुत्व भी नहीं रहेगा. इस कथन की गहराई को अगर देश...

संघ ने दी वैचारिक चुनौती, भाग खड़े हुए संघ विरोधी 0

संघ ने दी वैचारिक चुनौती, भाग खड़े हुए संघ विरोधी

हाल ही में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा आयोजित त्रिदिवसीय संवाद-सम्मेलन में  आमंत्रित किए जाने के बावजूद भी संघ विरोधियों ने दूरी बनाए रखी। इतना ही नहीं, इन लोगों ने राजनीति से ऊपर उठकर राष्ट्रनीति को सुनने...