Category: column ( स्तंभ )

संघ का अंतिम लक्ष्य परम वैभवशाली भारत 0

संघ का अंतिम लक्ष्य परम वैभवशाली भारत

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की कल्पना में ‘परमवैभवशाली भारत’ ही भविष्य का भारत है। यही कल्पना स्वामी विवेकानन्द, स्वामी दयानन्द, स्वामी रामतीर्थ, महर्षि अरविंद, डॉक्टर हेडगेवार, सुभाष चन्द्र बोस, वीर सावरकर, सरदार भगत सिंह और महात्मा गांधी जैसे महान स्वतंत्रता सेनानियों ने की थी।...

टेरेसा का मिशन सिर्फ कन्वर्जन 0

टेरेसा का मिशन सिर्फ कन्वर्जन

 भारत रत्न पाने वाली टेरेसा की सेवागाथा का सेकुलर मीडिया बड़े गर्व से गुणगान करती है, लेकिन क्या वास्तव में टेरेसा का मिशन सेवा ही था ? गौर करने वाली बात है मिशनरी ऑफ चैरिटी संस्था की स्थापना करने वाली टेरेसा ने अपना पूरा...

‘सवर्ण’ और ‘दलित’ – हिन्दुओं को बांटने का षड्यंत्र है यह समाजघातक शब्दावली 0

‘सवर्ण’ और ‘दलित’ – हिन्दुओं को बांटने का षड्यंत्र है यह समाजघातक शब्दावली

मैं अपनी बात को एक प्रश्न के साथ शुरु करता हूं. जब अनेक सड़कों, शहरों, योजनाओं, संस्थाओं और अदारों के नाम बदले जा रहे हैं तो फिर समाज को तोड़ने वाली सवर्ण और दलित जैसी खतरनाक शब्दावली...

हिंदी साहित्य में टूटती वामपंथी गिरोहबंदी 0

हिंदी साहित्य में टूटती वामपंथी गिरोहबंदी

रूस की क्रांति के बाद लेनिन-स्टालिन के नेतृत्व में जिन देशों पर वामपंथियों का आधिपत्य हुआ, वहां कम्युनिस्ट पार्टी और उसके सहयोगियों का एक गिरोह बना। उन्होंने अपने विरोधी लेखकों, कलाकारों को भयंकर यातनाएं...

कृष्ण-क्रांति – जन्माष्टमी पर विशेष 0

कृष्ण-क्रांति – जन्माष्टमी पर विशेष

कृष्ण-क्रांति * जेल की कोठरी से युद्ध के मैदान तक * बांसुरी की तान से सुदर्शन चक्र तक अधर्मियों, आतंकवादियों, समाजघातकों, देशद्रोहियों और भ्रष्टाचारियों को समाप्त करने के उद्देश्य से धराधाम पर अवतरित हुए योगेश्वर श्रीकृष्ण जन्म से लेकर...

‘देवदूत थे स्वयंसेवक’ 0

‘देवदूत थे स्वयंसेवक’

  बंटवारे की त्रासदी सात दशक बाद भी भूले नहीं भूलती। जब हिन्दू मां-बहनों पर खुलेआम आततायी मुसलमानों द्वारा अत्याचार किया जा रहा था, घर-दुकान, व्यवसाय को तहस-नहस करके परिवार के परिवार मौत के...

अर्बन नक्सलियों में अटकी माओवादियों की जान 0

अर्बन नक्सलियों में अटकी माओवादियों की जान

अगस्त 2008 में बिहार में भयानक बाढ़ आई थी. बताया गया था कि नेपाल का कुसहा बांध टूटने की वजह से यह बाढ़ आई है. यही वह साल था, जब पहली बार मेरा परिचय...

‘मुसलमानों ने बर्बरता की हदें पार कीं’ 0

‘मुसलमानों ने बर्बरता की हदें पार कीं’

बात उन दिनों की है, जब मेरे बड़े भाईसाहब सेना मुख्यालय से जुड़े एक सरकारी दफ्तर में काम करते थे. कुछ दिन बाद उनका स्थानांतरण लाहौर हो गया. उस समय मैं मैट्रिक पास कर...

‘जो कुछ हूं संघ की बदौलत हूं’ 0

‘जो कुछ हूं संघ की बदौलत हूं’

बंटवारे के दौर की रातों को पाकिस्तान से आना वाला कोई भी हिन्दू नहीं भूल सकता, हिन्दुओं के घरों को आग लगा दी जाती थी, बहन-बेटियों का अपहरण कर लिया जाता था. हत्याएं होती...