अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर 21 जून को प्रातः 6 से 7 बजे तक ने योगाभ्यास किया.

WhatsApp Image 2018-06-21 at 8.52.59 PM अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर 21 जून को प्रातः 6 से 7 बजे तक केशवपुरा आदर्श ग्राम में सार्वजनिक योग अभ्यास कार्यक्रम हुआ। कार्यक्रम में ग्राम के बच्चों से लेकर बुजुर्गो तक ने योगाभ्यास किया.
मुख्य वक्ता पत्रकार एवं अपना संस्थान जयपुर प्रांत के प्रचार प्रमुख श्री विवेकानंद जी ने ग्राम विकास विषय पर अपना मंतव्य प्रस्तुत किया। विवेकानंद जी ने कहा कि गांव हमेशा देने वाले रहे हैं। गांव में शहरों की तुलना में अधिक वृक्ष होते हैं इसलिए गांव पर्यावरण संरक्षण में अधिक योगदान देते हैं। गांव के लोग कृषि कार्य अधिकता से करते हैं इसलिए कहा जा सकता है कि गांव में रहने वाला किसान अन्नदाता है। वह अधिकांश लोगों का पेट भरने के लिए अन्न का उत्पादन करता है। इसलिए स्पष्ट ही है कि गांव के व्यक्ति का हाथ दाता के रूप में रहता है । किंतु वर्तमान समय में कृषि कार्यों में आ रही कमी के चलते कहिए या फिर नौकरी धंधा अन्य प्रकार के व्यापार-व्यवसाय के कारण कृषि कार्य कम हो गया है। किंतु फिर भी हम स्वावलंबी गांव की बात करें हर एक व्यक्ति अपने घर आंगन और आस पड़ोस में यदि 50 फलदार पेड़ लगाता है तो उन 50 पेड़ों से इतने फल उत्पादित किए जा सकते हैं कि वह स्वयं के परिवार रिश्तेदार आस पड़ोस के उपयोग के अतिरिक्त भी उन फलों का उपयोग बाजार में बेच कर धन कमाने के लिए भी कर सकता है। यदि प्रत्येक व्यक्ति फल उत्पादन पर काम करना शुरू करें तो गांव को स्वावलंबी होने से कोई रोक नहीं सकता। जल संरक्षण के लिए छोटे छोटे प्रयोग करके भूमि के जल स्तर को बढ़ाया जा सकता है।घर का पानी घर में , खेत का पानी खेत में और गांव का पानी गांव में यदि इस सिद्धांत पर काम किया जाए तो पेयजल की समस्या से तो छुटकारा पाया जा सकता है। साथ ही दो-तीन वर्षों में इस प्रकार के प्रयोग करके भूमि का जल स्तर भी बढ़ाया जा सकता है। गांव में बुजुर्गों के अनुभव काWhatsApp Image 2018-06-21 at 8.53.11 PM लाभ लेते हुए युवा पीढ़ी यदि सृजनात्मक कार्य करती है स्वच्छता के लिए, पौधारोपण के लिए , जल संरक्षण के लिए तो वास्तव में एक आदर्श ग्राम की परिकल्पना को साकार किया जा सकता है। भूमि ,गगन, अग्नि वायु तथा नीर इन पांच तत्वों से मिलकर यह प्रकृति बनी है और इस प्रकृति को ही हम लोग भगवान के स्वरुप में पूजते हैं। हम लोग पेड़ , पानी और पत्थर को पूजने वाले लोग हैं। वास्तव में सनातन संस्कृति इन प्रतीकों के माध्यम से सदियों से प्रकृति को पूजती आई है इसलिए पर्यावरण संरक्षण का संदेश इस भारत की भूमि से ही विश्व में जाने वाला है । भारत विश्व गुरु है इसलिए पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी हमें पूरे विश्व का नेतृत्व करना है और वह नेतृत्व आरंभ होगा गांव से। इसलिए हमें अपने गांव से इस अभियान को प्रारंभ करके पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कार्य करने होंगे।
कार्यक्रम के अंत मे ग्रामवासियों ने जुलाई माह में फलदार वृक्ष लगाने का संकल्प लिया।

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