अ.भा. प्रतिनिधि सभा 2018 – कार्यविभाग वृत्त एवं राष्ट्रीय परिदृश्य

अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में सरकार्यवाह द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदन – 2018

जयपुर 9 मार्च, विसंके। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में संघ का कार्यविभाग वृत्त 

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा 2018

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा 2018

शारीरिक विभाग:- 

अखिल भारतीय प्रहार महायज्ञ’ उपक्रम गत तीन वर्षों से चल रहा है।  प्रहार यज्ञ में शाखाओं की, स्वयंसेवकों की सहभागिता में निरंतर वृद्धि हो रही है।  इस वर्ष 32434 शाखाओं और 2306 साप्ताहिक मिलनों से 4,43,811 स्वयंसेवकों ने भाग लिया।  उनमें 1000 से अधिक प्रहार लगाने वाले 95815 और 40 वर्ष से कम आयु के 3,34,142 स्वयंसेवक हैं।

बौद्धिक विभाग:- 

गीत, प्रार्थना, वैचारिक प्रस्तुति, कथाकथन और समाचार समीक्षा आदि विषयों को लेकर अखिल भारतीय स्तर पर 5 दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। सभी प्रांतों का प्रतिनिधित्व रहा।  कुल 246 कार्यकर्ता उपस्थित रहे।  सभी विषयों को गहराई से समझने का अवसर प्राप्त हुआ।   श्री सुरेश जी सोनी और श्री भागय्या जी द्वारा मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।

इस वर्ष दक्षिण मध्य, पश्चिम, उत्तर पश्चिम तथा उत्तर क्षेत्र में चयनित कार्यकर्ता वर्ग संपन्न हुए।  33 प्रांतों में भी कार्यकर्ताओं के इसी प्रकार के वर्ग आयोजित किये गये।

प्रचार विभाग:-

सोशल मीडिया की अखिल भारतीय कार्यशाला भोपाल में संपन्न हुई।  38 प्रांतों से 148 कार्यकर्ता उपस्थित रहे। इसमें जनसंगठनों के कार्यकर्ता भी सहभागी हुए।

पू. सरसंघचालक जी के ‘‘विजयादशमी’’ भाषण का अधिकृत ‘‘फेसबुक पृष्ठ’’ पर सीधा वीडियो प्रसारण किया गया, जिसे 19 लाख लोगों ने देखा और सुना।

प्रतिवर्ष के अनुसार इस वर्ष भी ‘‘नारद जयंती’’ के कार्यक्रम संपन्न हुए. विभिन्न स्थानों पर 40,000 नागरिक सहभागी हुए, जिसमें 10,000 पत्रकार बंधु थे।  1300 पत्रकारों को सम्मानित किया गया।

देशभर में सुदूर ग्रामों तक जागरण पत्रिका जाती है।  12 भाषाओं की 30 पत्रिकाएँ देशभर के 2 लाख से अधिक ग्रामों तक पहुँचती हैं।  हरियाणा प्रांत में विशेष प्रयोग किया गया।  पत्रिका पहुँचाने में डाक कर्मियों का अच्छा सहयोग रहता है, ऐसे 572 डाककर्मियों का अभिनंदन करने का कार्यक्रम संपन्न हुआ।

भिन्न-भिन्न स्थानों पर पत्रकारों हेतु ‘‘संघ परिचय वर्ग’’ का आयोजन किया गया, जिसमें 7 प्रांतों में 541 पत्रकार सम्मिलित हुए।

संपर्क विभाग:- 

गत कुछ वर्षों से देश के प्रमुख स्थानों पर सरसंघचालक जी के ‘विजयादशमी’ भाषण पर प्रबुद्ध बंधुओं से संवाद के कार्यक्रम हो रहे हैं।  इस वर्ष 18 स्थानों पर 1007 की उपस्थिति रही।  दिल्ली के कार्यक्रम में स्वयं सरसंघचालक जी तथा अन्य स्थानों पर अखिल भारतीय अधिकारियों की उपस्थिति में कार्यक्रम हुए।  एक सघन, सार्थक चर्चा रही।

विशेष उल्लेखनीय यानि संघकार्य की विकासगाथा एवं प्रमुख घटनाओं की जानकारी से समृद्ध ‘‘Coffee Table Book’’ का निर्माण किया गया।  सुप्रसिद्ध उद्योजक श्रीमान अभयकुमार फिरोदिया जी के करकमलों से नागपुर में इसका विमोचन किया गया।  देशभर के मूर्धन्य महानुभावों को प्रत्यक्ष मिलकर इसकी प्रति देने का कार्यक्रम चल रहा है।

नवंबर मास में नागपुर में संगीत के विभिन्न रागों पर आधारित ‘स्वरसम्मोहिनी’ यह घोष वादन का कार्यक्रम संपन्न हुआ। श्री श्री रविशंकर जी के साथ ही संगीत क्षेत्र की जानी-मानी हस्तियाँ इस समारोह में उपस्थित थीं।  कार्यक्रम के पश्चात् प.पू. सरसंघचालक जी का सभी आगंतुक महानुभावों के साथ वार्तालाप भी हुआ।

संगठनात्मक दृष्टि से बैठकें, प्रशिक्षण वर्ग संपन्न हो रहे हैं।  परिणामतः समाज का संभ्रांत वर्ग संघ के निकट आ रहा है।

गतिविधि के कार्य

1) गौ-सेवा: 2017-18 में विविध कार्यक्रम, उपक्रम संपन्न हुए हैं. गौ-कथा का आयोजन 323 स्थानों पर हुआ, जिसमें 30,800 से अधिक बहनों-भाईयों की उपस्थिति रही।  232 स्थानों पर प्रशिक्षण वर्ग हुए, जिसमें 5849 कार्यकर्ताओं ने प्रशिक्षण प्राप्त किया।  देशभर में 1500 गौशालाएँ संपर्क में हैं।  पंचगव्य चिकित्सा विषय को लेकर 22 प्रांतों में गोष्ठियाँ हुईं, जिसमें 612 चिकित्सक उपस्थित रहे।  18,590 कृषकों को जैविक कृषि का प्रशिक्षण दिया गया।

2) समरसता:– 2, 3 दिसंबर 2017 को पूना में एक अखिल भारतीय बैठक संपन्न हुई। बैठक में 33 प्रांतों के 70 महिला एवं पुरुष कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।  बैठक में कार्यकर्ताओं ने अपने प्रांत में चल रहे प्रयोगों की जानकारी एवं उसके परिणामों के बारे में बताया।  अनेक प्रांतों में प्रांत अभ्यास वर्ग भी संपन्न हुए हैं।  कार्य को गति देने हेतु एक केन्द्रीय टोली का भी गठन किया गया।

तेलंगाणा प्रांत में स्वयंसेवकों ने कुछ चयनित गावों में पू. साधु-संत एवं समाज के सहयोग से कुछ विशेष प्रयास किये, जिसके फलस्वरुप प्रांत के 200 गावों में एक श्मशान, मंदिर में सबको प्रवेश एवं हॉटेल में सभी के लिये समान ग्लास रखना यह संभव हो पाया है।

राष्ट्रीय परिदृश्य 

देशभर में अपने कार्य के प्रति विश्वास के साथ अपेक्षाएँ भी बढ़ी हैं, यह हम सब अनुभव करते हैं।  विभिन्न प्रांतों में संपन्न कार्यक्रमों में हिन्दू समाज की सहभागिता से यही अनुभव आ रहा है।  पूर्वोत्तर के राज्यों में आयोजित हिन्दू सम्मेलन विशेषतः त्रिपुरा राज्य का सम्मेलन कई बातों में प्रेरक अनुभव देने वाला रहा है।  सामाजिक, धार्मिक, औद्योगिक क्षेत्रों के महानुभावों का प्रकट होने वाला प्रतिभाव अपने कार्य की स्वीकार्यता प्रदर्शित करता है।

इसके साथ ही समाज में आपसी संघर्ष की घटनाएँ सबके लिए चिंता का विषय हैं।  ऐसी घटनाओं में घटित हिंसा, सार्वजनिक संपत्ति का होने वाला नुकसान – यह पूर्णतः निंदनीय है।  भूतकाल से पाठ लेकर वर्तमान में निर्माण होने वाली समस्याएँ सुलझाकर सौहार्दपूर्ण एवं स्वस्थ वातावरण बनाना सबकी प्राथमिकता बननी चाहिए।  ऐसे अवसरों पर विभाजनकारी तत्वों से सावधान रहने की आवश्यकता रहती है।

वैसे ही समाजमन को आहत करने वाली घटनाएँ भी घटती रहती हैं और सामूहिक रूप से आक्रोश प्रकट होता है।  संबंधित सभी पक्षों को यह ध्यान में रखने की आवश्यकता रहती है कि किसी भी कारण से, व्यवहार से, जनभावनाओं और समाज के सम्मान को ठेस न पहुँचे। हम सबका मिलकर एक बृहद् परिवार है, अतः परस्पर संबंध और विश्वास सशक्त रूप से बना रहना चाहिए। ऐसे अवसरों पर धार्मिक, सामाजिक, राजनैतिक नेतृत्व की सकारात्मक पहल महत्वपूर्ण बन जाती है।

न्याय व्यवस्था, सुरक्षा व्यवस्था आदि के प्रति सम्मान एवं विश्वास को धक्का न लगे, इसकी चिंता होनी चाहिए।  संविधान, कानून व्यवस्था में अपनी बात रखने का अधिकार हमें प्राप्त है। उन मर्यादाओं का पालन भी आवश्यक है। समाज में विभेद, भ्रांत धारणा फैलाने वाली शक्तियाँ सक्रिय होती हुई दिखाई देती हैं।  इन सारी परिस्थितियों में अत्यंत संयम और कुशलता के साथ कार्य करते हुए अपने कार्य की सफलता में ही कई प्रश्नों का समाधान है, यह विश्वास रखते हुए हमें परिश्रमपूर्वक आगे बढ़ना है।  संघकार्य ही हम सबका जीवन ध्येय बने।

सफल-विफल और आशा-निराशा,

इसकी और कहाँ जिज्ञासा

बीहड़ता में राह बनाता,

राही मचल-मचल चलता है

      जीवनभर अविचल चलता है ..

 

 

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