आरएसएस का द्वितीय वर्ष विशेष का 20 दिवसीय प्रशिक्षण वर्ग प्रारंभ

‘हिन्दु होने का अर्थ है, दुर्गणों को दूर कर श्रेष्ठ विचार का प्रसार करना’’
12 प्रान्तों के 668 स्वयंसेवक पहुंचे प्रशिक्षण प्राप्त करने
आरएसएस का द्वितीय वर्ष विशेष का 20 दिवसीय प्रशिक्षण वर्ग प्रारंभ
जयपुर (विसंकें)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के द्वितीय वर्ष का 20 दिवसीय प्रशिक्षण वर्ग सोमवार को स्वामी विवेकानन्द विद्यालय महावीर नगर तृतीय पर प्रारंभ हुआ। वर्ग के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि मौजी बाबा धाम की महामण्डलेश्वर साध्वी हेमानन्द सरस्वती महाराज थीं। वहीं, खण्डवा में सेवानिवृत्त काॅलेज प्राचार्य डाॅ. गिरिजाशंकर वर्ग के सर्वाधिकारी के रूप में उपस्थित रहे।
उद्घाटन सत्र में संबोधित करते हुए साध्वी हेमानन्द सरस्वती महाराज ने कहा कि समाज की दिशा और दशा सुधारने के लिए प्रशिक्षण वर्ग का महत्व है। हमारे कार्य और सुझावों से समाज के जातिगत भेदभाव और विषमता के विष को दूर कर हिन्दुत्व की रक्षा का संकल्प करना चाहिए। उन्होंने हिन्दुत्व की परिभाषा देते हुए कहा कि हिन्दु का शाब्दिक अर्थ अपने दुर्गुणों को दूर कर श्रेष्ठ विचारों का प्रसार करना है, इसके द्वारा ही समाज का सुधार हो सकेगा। उन्होंने कहा कि साधु और स्वयंसेवक एक जैसे होते हैं, जो मानव मूल्यों के संरक्षण के लिए कार्य करते हैं।
सर्वाधिकारी डाॅ. गिरिजाशंकर ने कहा कि संघ अपनी स्थापना काल से ही राष्ट्र निर्माण के लिए योग्य कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण में लगा है, क्योंकि संघ भाग्यवादी नहीं, कर्मवादी संगठन है। यहां नर्मदा के प्रवाह में संयोग से शिवलिंग नहीं बनते हैं, बल्कि शिल्पी की तरह योग्य कार्यकर्ताओं को गढा जाता है। इस प्रशिक्षण वर्ग में हमें समाज परिवर्तन के लिए चलने वाली गतिविधियों के योग्य बनने का अभ्यास करना है। स्वयंसेवक से कार्यकर्ता बनकर समाज निर्माण के कार्य को आगे बढाना है।
12प्रान्तों में भाग ले रहे स्वयसेवको की संख्या, कोंकण – ४० , प. महाराष्ट्र-३० ,देवगिरि -१२,गुजरात -९४ , विदभ्र -२५, मालवा -८८, म.भारत -९१ , महाकौशल -५४, छत्तीसगढ़- ७२, चित्तोड़ -५७, जयपुर -६८ , जोधपुर -३७ वर्ग में पालक रूप में मौजूद आणंद गुजरात से आए संघ के अखिल भारतीय सह बौद्विक शिक्षण प्रमुख सुनील भाई मेहता ने बताया कि वर्ग में संघ दृष्टि से 12 प्रान्तों केलगभग 668 स्वयंसेवक प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। जिसमें राजकीय दृष्टि से गोवा, महाराष्ट्र, गुजरात, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ तथा राजस्थान के 40 से 65 वर्ष आयुवर्ग के स्वयंसेवक हिस्सा ले रहे हैं। इन स्वयंसेवकों को शारीरिक और बौद्विक कार्यक्रमों के द्वारा विभिन्न प्रशिक्षण दिया जाएगा।
समाज और संघ से जुड़े विषयों पर होगी चर्चा
वर्ग के दौरान प्रातः 4.45 से लेकर रात्रि तक विभिन्न सत्रों में बौद्विक प्रशिक्षण के सत्र चलेंगे। जिनमें राष्ट्र की अवधारणा, लोकसंग्रही डाॅक्टर जी, अप्रतिम राष्ट्रीय नेतृत्व श्रीगुरूजी, प्रतिज्ञा व प्रार्थना का महत्व, राष्ट्र विकास की अवधारणा, संघ का इतिहास, देश के समक्ष चुनौतियां, संघ कार्य ईश्वरीय कार्य है, एकात्म मानव दर्शन, स्वतंत्रता संग्राम में स्वयंसेवक की भूमिका, राष्ट्रीय चारित्र्य, कार्यकर्ता का व्यवहार, आश्रम व्यवस्था, सामाजिक समरसता, परम वैभव की संकल्पना, कार्य का आधार, महिला शक्ति के विषय में हिन्दू दृष्टिकोण, संघ के बारे में भ्रांतियां, सामाजिक परिवर्तन में स्वयंसेवक की भूमिका, कुटुम्ब प्रबोधन, धर्मजागरण का महत्व, ग्राम विकास, सेवा कार्य, गौ संवर्द्धन एवं गौ विज्ञान में हमारी भूमिका, पर्यावरण संरक्षण में हमारा कर्तव्य, हिन्दु समाज में कुरीतियों और विषमताओं का निवारण, संगठन कुशलता जैसे विषयों पर चर्चा की जाएगी।

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