कांग्रेस के पूर्व सांसद सज्जन कुमार को 1984 के सिक्ख नरसंहार में उम्रकैद

sajjan-kumar-300x169सिक्ख विरोधी दंगों के मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय ने निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए कांग्रेस नेता व पूर्व सांसद सज्जन कुमार को उम्रकैद की सजा सुनाई. न्यायालय ने तल्ख टिप्पणी करते हुए अपने फैसले में कहा कि 1947 के विभाजन में देश को दंश झेलना पड़ा था और फिर 37 साल बाद ऐसा हुआ. दिल्ली में हजारों लोग मारे गए थे और इनको (दोषियों) राजनीतिक संरक्षण था. जस्टिस एस मुरलीधर और जस्टिस विनोद गोयल 29 अक्तूबर को कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था.

इंदिरा गांधी की हत्या के बाद एक नवंबर 1984 को दिल्ली के कैंट इलाके में दो परिवारों के पांच लोगों की हत्या करने के मामले में यह फैसला आया है.

दिल्ली हाईकोर्ट ने 1984 सिक्ख दंगा मामले में कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को उम्रकैद की सजा सुनाई है. कांग्रेस पार्षद बलवान खोखर, सेवानिवृत्त जलसेना अधिकारी कैप्टन भागमल, गिरधारी लाल की उम्रकैद की सज़ा को बरकरार रखा है, शेष दो दोषियों पूर्व विधायक महेंद्र यादव, किशन खोखर को तीन साल की सज़ा को बढ़ाकर 10 साल कर दिया है.

हाईकोर्ट मामले में 11 सिंतबर से ही लगातार सुनवाई कर रहा था. पिछले 31 जुलाई को सुनवाई के दौरान 84 के सिक्ख दंगा पीड़ितों की ओर से पेश वरिष्ठ वकील एचएस फुल्का ने कहा था कि सिक्ख दंगों के 34 सालों के बाद भी उन्हें न्याय नहीं मिला है. इसलिये कोर्ट इस मामले की रोजाना सुनवाई करे ताकि पीड़ितों को जल्द से जल्द न्याय मिल सके.

दिल्ली कैंट इलाके के राजपुर में 1 नवंबर 1984 को हजारों लोगों की भीड़ ने दिल्ली कैंट इलाके में सिक्ख समुदाय के लोगों पर हमला कर दिया था. इस हमले में एक परिवार के तीन भाइयों नरेंद्र पाल सिंह, कुलदीप और राघवेंद्र सिंह की हत्या कर दी गई. एक दूसरे परिवार के गुरप्रीत और उनके बेटे कहर सिंह की मौत हो गई थी. दिल्ली पुलिस ने 1994 में ये केस बंद कर दिया था, लेकिन नानावटी कमीशन की रिपोर्ट के आधार पर 2005 में इस मामले में केस दर्ज किया गया. इस मामले में पांच लोगों की हत्या के आरोप में भागमल के अलावा, कांग्रेस के पूर्व पार्षद बलवान खोखर, गिरधारी लाल सहित दो अन्य को निचली अदालत ने दोषी करार दिया था. निचली अदालत ने कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को बरी कर दिया था. इन दोषियों ने निचली अदालत के फैसले के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी.

सीबीआई ने भी निचली अदालत द्वारा बरी किये जाने के फैसले को दिल्ली हाइकोर्ट में चुनौती दी थी. कहा था कि इन दोषियों ने दंगों को योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिया है. लिहाजा कोर्ट दोषियों की याचिका खारिज करे और सज्जन कुमार को भी इस मामले में सजा सुनाए.

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