गांव-गांव और घर-घर जाएंगे संत

सामाजिक समरसता एवं सद्भावना के भाव का होगा संचार

जयपुर (विसंकें). सामाजिक समरसता एवं सद्भाव के लिये नारायण आश्रम वृन्दावन में आगरा, अलीगढ़, बुलन्दशहर, मुज्जफरनगर एवं मथुरा जनपद के संतों ने दो दिन तक चिन्तन किया. सभी संतों ने आगामी योजना बनाई, जिसके अन्तर्गत शहर व गांव की बस्तियों में सामूहिक यात्रा करेंगे. घर-घर जाकर सामाजिक समरसता एवं सद्भाव का भाव जगाएंगे. चिन्तन बैठक के मुख्य अतिथि महामंडलेश्वर संत गोपालदास जी महाराज थे.

चिंतन वर्ग का आयोजन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पश्चिमी उ.प्र. क्षेत्र के सेवा विभाग के तत्वाधान में 01, 02 मई को किया गया. क्षेत्र सेवा प्रमुख गंगाराम जी ने चिन्तन बैठक की भूमिका प्रस्तुत की. कहा कि हिन्दू समाज किसी भी भेदभाव को नहीं सहे और सभी एक रहें. संत रामदेवानन्द जी ने कहा कि सभी सन्त गांव-गांव में जाकर सद्भाव के लिये कार्य करेंगे. देश की चारों पीठ किसी भी भेदभाव को नहीं मानती. सभी का मानना है कि यहां सब प्राणियों में भगवान हैं. सभी को गले लगाना है. सामाजिक कटुता राजनीतिक लाभ के लिये की गई है, सभी जातियां देश भक्त हैं. बौद्ध, जैन सभी सनातन धर्म की पहली सीढ़ी हैं. पहले दिन पैंतीस सन्तों ने चिन्तन बैठक में भाग लिया.

संत बलराम महाराज जी ने कहा कि सनातन धर्म में भेदभाव के लिये कोई स्थान नहीं रहा, हिन्दू समाज के प्रति दुष्प्रचार हिन्दुओं की आस्था को निर्मूल करने एवं भारतीय संस्कृति पर आघात करने के लिये वोट के सौदागरों का षडयंत्र है. सन्तों ने कहा कि हम चाहते हैं, हम सब एक हों सभी समान है. स्वाभिमान एवं संकीर्णता के कारण सम्पूर्ण हिन्दू समाज की एकता खण्डित हुई है. सन्तों ने किसी को अपमानित नहीं किया, हिन्दू समाज के शास्त्रों में एकता, समानता, समरसता व सद्भावना का वर्णन है.

चण्डौला से सन्त राधारमण जी ने कहा कि भगवान राम ने जंगल में वनवासी, आदिवासियों को गले लगाया. शबरी के झूठे फल तक खाये. श्रीराम ने समाज के साथ समरस होकर समाज को एक किया और जो उपेक्षित था, उन्हें लगाया. जो पीड़ित हैं, उपेक्षित हैं, वंचित हैं – वे सब एक ही माता के पुत्र हैं. हम उनके परिवारों में उनके समीप जाएं और आत्मीयता का भाव रखें.

सामाजिक समरसता एवं सद्भावना प्रमुख अशोक अग्रवाल जी ने कहा कि सम्पूर्ण हिन्दू समाज ईश्वर की सन्तान हैं. स्वामी विवेकानन्द के संदेश को बताते हुए कहा कि कुछ वर्षों के लिये देवी देवताओं को एक किनारे कर जो उपेक्षित हैं, उनकी सेवा करें. उन्होंने कहा था नर सेवा ही नारायण सेवा है. संघ के द्वितीय सरसंघचालक जी ने कहा था कि हम हिन्दू कभी पतित हो ही नहीं सकते. जातिभेद सामाजिक कटुता समाज में विद्यमान है, इसे जड़ से मिटाने के लिये संघ का सेवा विभाग निरन्तर कार्य कर रहा है.

चिन्तन बैठक में संघ समाज के अतिरिक्त क्षेत्र के राष्ट्रीय सेवाभारती, संघ के सेवा प्रमुख एवं सेवा भारती के अनेक दायित्वान कार्यकर्ता उपस्थित थे. चिंतन बैठक के दूसरे दिन संत फूलडोल महाराज जी ने कहा कि सभी सन्त एक मत हैं, किसी में कोई भेदभाव नहीं है. सभी संत सभी जातियों को साथ लेकर राष्ट्र को पुनः विश्वगुरू बनाने हेतु अपनी भूमिका निभाएंगे.

नारायण आश्रम के महंत महेन्द्रदास जी महाराज ने अध्यक्षता करते हुए कहा कि हम सब संत अपने मठों से निकल कर गांव गांव जाकर जनसम्पर्क का कार्य करें. समापन सत्र में शुक्रताल के महाराज मंडलेश्वर गोपालदास जी महाराज फिरोजाबाद से पधारे, नित्य चैतन्यदास जी महाराज, बुलंदशहर के क्रांति बाबा, अलीगढ़ के राधारमन स्वामी जी महाराज, गाजियाबाद के मदनदास जी महाराज तथा वृन्दावन से बड़ी संख्या में संत उपस्थित रहे.

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