गीता संप्रदाय विशेष का नहीं, अपितु सभी धर्मों का मानव कल्याणकारी ग्रंथ – इंद्रेश कुमार जी

कुरुक्षेत्र (विसंकें).राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अखिल भारगीता-जयंतीतीय कार्यकारिणी के सदस्य इंद्रेश जी ने कहा कि पवित्र ग्रंथ गीता किसी विशेष जाति, विशेष भूगोल या किसी विशेष सम्प्रदाय का ग्रंथ नहीं है, अपितु गीता सभी धर्मों का मानव कल्याणकारी ग्रंथ है. उनका प्रयास रहेगा कि गीता को विश्व का मानवीय ग्रंथ स्थापित करने के लिए यूएनओ के समक्ष प्रस्ताव रखेंगे. अगर विश्व को अहिंसा, अपराध और सामाजिक बुराईयों को समाप्त करना है तो गीता को जीवनमय धारण करना होगा. कुरुक्षेत्र की इसी पावन धरा पर भगवान श्रीकृष्ण ने विराट रूप दर्शन देकर पूरी दुनिया को एक संदेश देने का काम किया. इसी भूमि पर महात्मा बुद्ध जैसे महान व्यक्ति ने चरण रखे और सरस्वती जैसी पवित्र नदी का प्रवाह हुआ. इन तीनों सर्किट को जोडक़र कुरुक्षेत्र को विश्व का सर्वश्रेष्ठ पर्यटन स्थल बनाया जा सकता है. केडीबी और सरकार को मिलकर आस-पास के 10-12 तीर्थों को लेकर एक पर्यटन हब के रूप में विकसित करना चाहिए. इस पर्यटन हब के लिए दिल्ली और आस-पास के राज्यों से विशेष बस सेवा शुरू करनी चाहिए ताकि 5152 गीता जयंती वर्ष पूरे होने पर कुरुक्षेत्र को वर्ष 2016 में अंर्तराष्ट्रीय पर्यटन स्थल बनाया जा सके. इंद्रेश जी रविवार को थीम पार्क में वैदिक यज्ञ अनुंसधान संस्थान की तरफ से 5151 कुंडीय गीता जन चेतना महायज्ञ में आहुति डालने के उपरांत श्रद्धालुओं को सम्बोधित कर रहे थे.

जीवन में यज्ञ को धारण करना होगा

हरियाणा व पंजाब के राज्यपाल प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी ने कहा कि विश्व में आत्मशोधन के लिए यज्ञ सबसे सवोत्तम प्रक्रिया है. देश व प्रदेश का वातावरण शुद्ध करने, मानव कल्याण और नैतिकता तथा संस्कारों के लिए सभी को अपने जीवन में यज्ञ को धारण करना होगा. राज्यपाल प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी रविवार को थीम पार्क में वैदिक यज्ञ अनुंसधान संस्थान की तरफ से 5151 कुंडीय गीता जन चेतना महायज्ञ में आहुति डालने के उपरांत श्रद्धालुओं को सम्बोधित कर रहे थे. इससे पहले राज्यपाल प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी, केंद्रीय रक्षा राज्यमंत्री राव इंद्रजीत सिंह, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य इंद्रेश कुमार जी सहित गणमान्यजनों, श्रद्धालुओं ने 5151 कुंडीय गीता जन चेतना महायज्ञ में आहुति डाली. कुरुक्षेत्र संस्कृत वेद पाठशाला के आचार्य नरेश कौशिक, अन्य पंडितों ने मंत्रोच्चारण के साथ यज्ञ में आहुति डलवाई. इस दौरान राज्यपाल ने संस्थान अध्यक्ष गोपाल शर्मा, पूर्व आईएएस अधिकारी आरबी लांग्यान द्वारा लिखित दो पुस्तकों का विमोचन किया.

 

 

 

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