जयपुर डायलाॅग्स के दूसरे दिन सुरक्षा, शिक्षा एवं इतिहास विषय पर सवांद हुआ

जयपुर, दिनांक 19 नवम्बर। जयपुर डायलाॅग्स फोरम के मीडिया प्रभारी विमल कटियार ने बताया कि आज जयपुर डायलाॅग्स के दूसरे दिन सुरक्षा, शिक्षा एवं इतिहास विषय पर सवांद हुआ। वर्ल्ड ट्रेड पार्क में आयोजित तीन दिवसीय जयपुर डायलाॅग्स कार्यक्रम में आये मेहमानों व विद्वानों ने अपने विचार रखे। कार्यक्रम का शुभारम्भ 18 नवम्बर को हुआ था।
कार्यक्रम के पहले सत्र में शिक्षा एवं इतिहास और दूसरे सत्र में सुरक्षा विषय पर चर्चा की गई।
पहले सत्र में नरेन्द्र कोहली महासमर के लेखक, मोहन दास पाइ शिक्षाविद व इंफोसिस के पूर्व सीएफओ और अक्षयपात्र कोफाउंडर, प्रोफेसर माखन लाल इतिहासकार, संक्रांत सानु आई.टी. उद्यमी व भारतीय एक्टिविस्ट, प्रोफेसर मनोज दीक्षित कुलपति अवध विश्वविद्यालय, सुनील शर्मा अध्यक्ष ज्ञान विहार विश्वविद्यालय, जे साई दीपक वकील और एक्टिविस्ट, आदि हस्तियों ने शिक्षा एवं इतिहास विषय पर अपने विचार रखें।
साथ ही दूसरे सत्र में लेफ्टिनेंट जनरल अता हसनैन पूर्व जीओसी एक्सवी कॉर्प्स श्रीनगर, सुरक्षा विशेषज्ञ सुशांत सरीन, सुरक्षा विशेषज्ञ अभिजीत अय्यर मित्रा, रक्षा विशेषज्ञ यूसुफ उंझावाला, सुशील पंडित कश्मीर एक्टिविस्ट आदि जानी मानी हस्तियों ने सुरक्षा विषय पर संवाद किया।
कार्यक्रम में जयपुर डायलाॅग्स फोरम के अध्यक्ष सुनील कोठारी, सचिव पंकज जोशी, सयुक्त सचिव राजकुमार शर्मा, सीओओ प्रकाश टेकवानी और जयपुर पुलिस कमिश्नर संजय अग्रवाल मौजूद रहें।
जे साई दीपक वकील और एक्टिविस्ट ने कहा- बीजेपी सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में क्या किया? यदि हमारी शिक्षा और इतिहास विदेशी आकांशाओ शासकों द्वारा विस्तृत किया गया है। तो अब समझा गया है कि सुधार केन्द्रो द्वारा मंदिरो को शिक्षा संस्थाये चलाने व अपने पाठ्यक्रम बनाने की सुविधा है। शिक्षा का अधिकार व देशी की शिक्षा पर जोर दिया जाये। माक्सवादी प्रभाव है तो सही इतिहास को प्रदर्शित प्रभाव दे। आवश्यकता हो तो न्यायालय की शरण में जाये।
प्रोफेसर मनोज दीक्षित ने कहा- प्रशासन यथास्थिति वादी होता है। अयोध्या में सभी लोगों ने डिपोत्सव लीक से हटकर मनाया – हमारे विश्वविद्यालय का योगदान है। सरकार के बिना सहयोग के भी हम बहुत कुछ कर सकते है। कहने से ज्यादा करने से होता है। रिसर्च में टॉपिक की जगह लक्ष्य होना चाहिए। रिसर्च को प्रभावित बनाने के लिए एक लक्ष्य पर रिसर्च होना चाहिए। रिसर्च से पहले लक्ष्य तय हो -टॉपिक अपने आप स्वत सामने आएगा। सारी पढ़ाई क्लासों में नही होती क्लासों के बाहर भी पढ़ना चाहिए। प्रयोग में जो हमे डर लगता है ये हमारी बहुत बड़ी समस्या है। नये पाठ्यक्रमो में भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को बढ़ावा देना चाहिए।
प्रोफेसर माखन लाल ने कहा- व्यक्ति कहता है में ब्राह्मण हूँ, भाई वेश्य है, माँ शुद्र है, पिता क्षत्रिय है, इसी तरह हम चारो वर्ण एक जगह रहकर सुख से जीवन व्यतीत कर रहे है।
सुनील शर्मा अध्यक्ष ज्ञान विहार विश्विद्यालय ने कहा- जो राष्ट्र अपने पूर्वजो के किये पर गर्व नही करता उनका पूरे विश्व में कोई स्थान नही। विजेता ही इतिहास लिखवाते है। सभी को इतिहास की जानकारी होनी चाहिए। राष्ट्र को निर्णय नही चिन्नय बनाये। चिन्नय राष्ट्र ही एक अच्छी दिशा दे सकता है।
संक्रांत सानु आई.टी. उद्यमी व भारतीय एक्टिविस्ट ने कहा- इतिहास को अकादमिक सोच छोड़कर कहानीकार के रूप में ज्यादा महत्व है। विश्व में हमारे इतिहास का सम्मान रहा है। अंग्रेजी माध्यम से शिक्षा पाने वाले और अंग्रेजी का उपयोग करने वाले चार देश है। बाकि सब देश अपने देश की भाषा का उपयोग करते है। कोई भी देश अपनी भाषा को छोड़कर समृद्ध नही हुआ। अपनी भाषा में जो पढ़ रहे है उनकी समझ अधिक होती है। अंग्रेजी और विदेशी भाषा से बुद्धि में कमी और वेतन में वृद्धि हो रही है। देशी भाषा से बुद्धि में वृद्धि और वेतन में कमी हो रही है। अंग्रेजी माध्यम गुलामी है। अधिकतर देश अपने देश की भाषा का उपयोग करते है। हमारी शिक्षा ऐसी है बच्चों को 12 साल पढ़ते ही बीए करने को बोल दिया जाता है। शिक्षा के साथ अनुभव और ज्ञान जरुरी है।
नरेन्द्र कोहली महासमर के लेखक ने कहा- विवेकानंद जी के अनुसार हिन्दुओ ने अपना इतिहास कभी नही लिखा जो लिखा है विदेशियों ने लिखा है। हमे अपने मूल ग्रंथो के पास जाना चाहिए। हमारे इतिहास लिखने की पद्धति होनी चाहिए। राष्ट्र की रक्षा ऋषि करता है और राज्य की रक्षा राजा करता है। इतिहास को ऋषि किस रूप में लिखता है ये हमे समझना चाहिए। आज सामान्य जन को यह भी याद नही कि पाकिस्तान अफगानिस्तान अलग कब हुआ। शिक्षा राष्ट्रियता इतिहास एक ही चीज है। सभी को देश का इतिहास, भूगोल संस्कृति जानना जरुरी है।

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