जयपुर में ‘प्रकृति एवं भारतीय कालगणना’ विषय पर व्याख्यान

 

जयपुर में ‘प्रकृति एवं भारतीय कालगणना’ विषय पर व्याख्यान

जयपुर में ‘प्रकृति एवं भारतीय कालगणना’ विषय पर व्याख्यान

विसंके जयपुर।

विसंके जयपुर। शैक्षिक मंथन संस्थान, जयपुर द्वारा बुधवार को ज्ञानाश्रम विद्यालय, मानसरोवर, जयपुर में ‘प्रकृति एवं भारतीय कालगणना’विषय पर व्याख्यान आयोजित किया गया। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्रीय कार्यवाह मा. हनुमान सिंह ने नवसवत्सर के शुभ अवसर पर भारतीय कालगणना की वैज्ञानिकता प्रामाणिकता पर बोलते हुए कहा कि अपने देश में अंग्रेजों के समय से एक कालगणना प्रचलन में आ गई जिसको भारत के लोगों ने धीरे-धीरे स्वीकार किया। हम सब लोग इस कालगणना के वैज्ञानिक स्वरूप की ओर ध्यान देंगे उस से ज्ञात होता है कि ग्रीगेरियन कलेण्डर की कोई वैज्ञानिक प्रामाणिकता नहीं है जब कि भारतीय कालगणना की वैज्ञानिकता की पुष्टि स्वीकार्य है। कालगणना इतिहास का बोध कराती है। अंग्रेजी कलेण्डर में जुलीयस सीजर के नाम पर जुलाई महीने का नाम पड़ा। अगस्त महीने का नाम ऑगस्टस के नाम पर पड़ा। वहीं भारतीय महीनों का नाम खगोलिय आधार की पुष्टि करता है। भारतीय पष्चिम का अंधानुकरण को छोड़ भारतीय पद्धति को अपनाए तो निश्चित रूप से भारतीय संस्कृति का फैलाव होगा।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री राजस्थान सरकार मा. अरूण चतुर्वेदी ने कहा कि पीढ़ी दर पीढ़ी भारतीय लोगों द्वारा अंग्रेजी कलेण्डर को स्वीकार कर लिया गया, लेकिन भारतीय लोगों के मन में भारतीय पंचाग की महŸा आज भी है। वर्तमान में भी परम्परानुसार भारतीय कालगणना को स्वीकार करते हुए इसे अपनाते रहे है और आगे भी अपनाएंगे।
अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के अध्यक्ष डॉ. विमल प्रसाद अग्रवाल ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि भारतीय कालगणना की जानकारी के अभाव में हम उस की वैज्ञानिकता के उपर प्रश्नचिन्ह खडे़ करते है जब कि उसकी वैज्ञानिकता को समझने के पश्चात उस के महत्व का पता चलता है। भारतीयों द्वारा खगोलिय मास को प्रामाणिकता के आधार पर पंचाग का निर्माण किया जिस से विश्वभर के वैज्ञानिक इस कालगणना का लोहा मानते है। ऋतुचक्र के आधार पर फसल का निर्धारण किया जाता है। भारतीय त्योंहार भारतीय कालगणना के आधार पर ही मनाए जाते है। वर्ष प्रतिपदा की महŸा बताते हुए कहा कि भगवान राम का राज्याभिषेक, युदिधिष्ठर का राज्याभिषेक, सिख धर्म के अंगददेव का जन्मदिवस, सिंधी समाज के धर्मगुरू झुलेलाल का जन्म साथ ही डॉ. भीम राव अम्बेडकर का जन्म भी आज ही के दिन हुआ एवं शको ंको हराने के कारण राजा विक्रमादित्य द्वारा विक्रम संवत् का आरंभ किया गया। आज ही के दिन राजस्थान राज्य का निर्माण हुआ। हमारी भारतीय कालगणना भारतीय संस्कृति की जडों व मूल ग्रन्थों से जुड़ी हुई है।
इस अवसर पर इस अवसर पर अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के राष्ट्रीय संगठन मंत्री महेन्द्र कपूर महामंत्री जे.पी. सिंघल, पूर्वकुलपति प्रो. पी.एल. चतुर्वेदी, उपस्थित रहे।

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