जिस कार्य से संपूर्ण समाज का हित हो, वही कार्य ठीक होता है – डॉ. कृष्णगोपाल जी

dr.-krishan-gopal-ji-300x200 राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्णगोपाल जी ने देशवासियों से आह्वान किया कि वे वर्ग संघर्ष एवं राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में लिप्त तत्वों से सावधान रहें. ऐसे लोग शिक्षक, अधिवक्ता, डॉक्टर, किसान के रूप में समाज में छिपे हुए हैं. ऐसे लोग देशद्रोही कार्यों में लिप्त लोगों की मदद देते और उग्रवादियों की न्यायालय में सहायता करते हैं.

सह सरकार्यवाह जी परेड ग्राउंड में विजयादशमी एवं संघ स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम संघ समागम में स्वयंसेवकों को संबोधित कर रहे थे. सह सरकार्यवाह जी ने कहा कि जवानों की हत्या करने वाला, भारत माता के टुकड़े करने की मांग करने वाला देशद्रोही तत्व है, ऐसे ही तत्व संघ का विरोध करते हैं, क्योंकि उन्हें पता है कि संघ बढ़ेगा तो उनका अस्तित्व समाप्त हो जाएगा. संघ के बढ़ते प्रभाव से उनकी दाल गलनी बंद हो रही है. राष्ट्रीय विचार रखने वाले लोगों तथा संघ के समवेत प्रयास से पूर्वोत्तर भारत में बढ़ती उग्रवादी घटनाओं में तेजी से गिरावट आई है. पहले पूर्वोत्तर भारत में 80-90 उग्रवादी संगठन सक्रिय थे, जो अब लगभग शांत हो गए हैं तथा राष्ट्र की मुख्यधारा में शामिल हो रहे हैं. आज वहाँ 15 अगस्त व  26 जनवरी के कार्यक्रम बहुत ही हर्षोल्लास से मनाये जाते हैं. यही नहीं आज इन राज्यों में आतंकवादी द्वारा की जा रही नृशंस घटनाओं में भारी कमी आई है. यह राष्ट्रीय विचार की बढ़ती हुई शक्ति का परिचायक है.

उन्होंने कहा कि देश में नक्सली पत्रकार, वकील, शिक्षक, अध्यापक के रूप में घूम रहे हैं. वे सिविल वार तथा वर्ग संघर्ष कराकर देश को तोड़ने की फिराक में हैं. देश संक्रमण काल से गुजर रहा है. इससे सभी देशवासियों को सावधान रहने की जरूरत है.

आरक्षण के विषय कहा कि संघ आरक्षण का विरोधी नहीं है. संघ का मानना है कि जिन्हें आज आरक्षण मिल रहा है, उन्हें ही यह तय करना है कि उनको कब तक यहां आरक्षण चाहिए. जिस दिन आरक्षण का लाभ पाने वाले लोग कहेंगे कि आरक्षण समाप्त होना चाहिए, उसी दिन आरक्षण समाप्त हो जाएगा.

उन्होंने कहा कि पुस्तक पढ़कर संघ को नहीं समझा जा सकता. संघ को समझने के लिए संघ की शाखा में आना पड़ेगा. संघ समाज के पिछड़े, वंचित तबके के उत्थान के लिए प्रयत्नशील है. समरस समाज बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि आज राष्ट्रीय एकता के लिए भेदभाव मुक्त हिन्दू समाज बनाना अति आवश्यक है. स्वामी विवेकानंद के उद्धरणों का उल्लेख करते हुए कहा कि संपूर्ण हिन्दू समाज संवेदनाओं से अपने भाव को जोड़ने वाला ही हिन्दू कहलाने का अधिकारी है. समाज को गुरु गोविंद सिंह के आदर्शों पर चलने की भी बात कही, जिन्होंने समाज हित में अपने पुत्रों को बलिदान कर दिया.

उन्होंने कहा कि संघ अपनी शाखाओं पर यही संस्कार देने के लिए प्रयत्नशील है. संघ के प्रयत्नों से आज दुनिया भर में भारत की प्रतिष्ठा बढ़ी है. हिन्दू समाज की दुर्बलता को दूर करने के लिए संघ की स्थापना हुई है. जात, बिरादरी, भाषा, पंथ, क्षेत्र इत्यादि दुर्गुणों को दूर कर संपूर्ण हिन्दू समाज का संगठित होना, यही संघ का ध्येय है . . उन्होंने कहा कि शक्तिशाली हिन्दू समाज की ओर देखने की हिम्मत किसी की नहीं पड़ेगी, ऐसा शक्तिशाली समाज संपूर्ण हिन्दू समाज को मिलकर खड़ा करना है. विजयादशमी के इस पावन पर्व पर स्वयंसेवकों से आह्वान किया कि साठ हजार स्थान पर लगने वाली शाखाएं एक लाख स्थान पर प्रारंभ हो सकें, इसका संकल्प लेने की जरूरत है.

उन्होंने कहा कि संघ संस्थापक डॉ. हेडगेवार ने इन्हीं कमियों को दूर करने के लिए संघ की स्थापना की, आज हिन्दू समाज को अपनी शक्ति पहचानने की जरूरत है और हिन्दू संस्कारों के अनुरूप अपने घरों का वातावरण बनाने के लिए कहा. किसी भी परिस्थिति में हताश होने की जरूरत नहीं है.

उन्होंने कहा कि सम्मुख उपस्थित युद्ध को देख कर भगवान राम जब विषाद ग्रस्त होते हैं तो हनुमान जी उन्हें समझाते हैं कि आपका यहां युद्ध आपकी पत्नी के लिए नहीं, बल्कि संपूर्ण स्त्री जाति के सम्मान के लिए है, जिस कार्य से संपूर्ण समाज का हित हो वही कार्य ठीक होता है. इसी कसौटी पर संपूर्ण समाज को अपने काम को कसने की जरूरत है. संघ इसी दिशा में चल रहा है.

प्रयाग में 17वीं शताब्दी में मुस्लिम शासनकाल में मुगल शासकों द्वारा वसूले जाने वाले जजिया कर का उल्लेख करते हुए इसे समाप्त करने में दारा शिकोह के योगदान का उल्लेख किया.

कार्यक्रम के प्रारंभ में उन्होंने शस्त्र पूजन किया, जिसमें प्रांत संघचालक डॉ. विश्वनाथ लाल निगम और विभाग संघचालक डॉ. राणाकृष्ण पाल जी उपस्थित रहे. पाक्षिक जागरण पत्रिका ‘चेतना प्रवाह’ के जल संरक्षण विशेषांक  का भी विमोचन किया.

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