जो धर्म बाहर से भारत में आये वे हिन्दू धर्म को मिटा देना चाहतें है – कृष्णगोपाल जी

सांस्कृतिक प्रवाह शोध पत्रिका विशेषांक “भारत में धार्मिक जनसांख्यिकी असंतुलन” का हुआ विमोचन

विसंके जयपुर 10 मई 2017। जो भारतीय मत-संप्रदाय चाहे व कबीरपंथी-दादुपंथी-रामानंदी आदि काई भी है, उनमें कोई टकराव नही है और उनसे कोई खतरा भी नहीं। लेकिन जो धर्म बाहर से भारत में आये (इस्लाम-ईसाई) वे दूसरे धर्म संप्रदायों को हेय व त्याज्य मानते है व उन्हें मिटा देना चाहतें है जो कि खतरनाक है यह कहना था राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह मा. कृष्ण गोपाल जी का वह आज मानसरोवर स्थित ज्ञानाश्रम स्कूल स्भागार में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय संस्कृति समन्वय संस्थान जयपुर द्वारा सांस्कृतिक प्रवाह शोध पत्रिका विशेषांक ‘‘भारत में धार्मिक जनसांख्यिकी असंतुलन‘‘ के विमोचन सामारोह में मुख्य वक्ता के रूप में प्रबुद्ध जनों को सम्बोधित कर रह थे।
कृष्ण गोपाल जी ने कहा की दो ऐसे धर्म जिनकी जंनसख्या बढनें पर चिंता होती है, आजादी के पश्चात इंदिरा गांधी नें भी धर्मान्तरण पर गंभीर चिंता करी थी। अन्य मत सभी मतों का सम्मान करतें है। प्रत्येक मत समुदाय में सांमजस्य के स्थापना की कोशिश करता है जो ऐसा नहीं करता वो अभारतीय है।
उन्होनें कहा कि आज हिन्दुस्तान में अधिकतम मुस्लिम-ईसाई के वंशज हिन्दु थे, यदि इन लोगों को अपने पूर्वजों की जानकारी प्राप्त हो जाये तो वे पुनः हिन्दु धर्म के प्रति जागृत हो जायेगें। समाज में जागरूकता की कमी के कारण भारत का निरन्तर आकार कम होता जा रहा है जैसे बांग्लादेश, नेपाल, बर्मा, अफगानिस्तान, पाकिस्तान एंव काश्मीर और चीन का अवैध रूप से कब्जा करने पर गहन चिंता जाहिर की क्योंकि इन्हीं सभी कारणों से पूरे भारत में आंतकवाद और अलगाववाद जहर ंबनकर उभर रहा है। भारतीय मूल के धर्मावलम्बियों की आबादी में वृद्धि दर पर प्रकाश डालतें हुये बताया कि क्या किसी समुदाय की आबादी में असामान्य वृद्धि से कोई फर्क नहीं पडता। मुस्लिम-ईसाई जनसंख्या वृद्धि दर का यह अंतर भारत के भविष्य को प्रभावित करेगा।
शोध पत्रिका के संरक्षक रामप्रसाद ने धर्म जागरण समन्वय के कार्यकलापों पर विस्तृत जानकारी देते हुये धर्मान्तरण मतान्तरण के मुद्ये पर चर्चा करते हुये अलगाववाद के प्रति चिंता जाहिर की एंव साथ ही घुसपैठियों की समस्या के समाधान की कार्य योजना पर बल दिया एंव सभी देश के नागरिकों से आहवान किया कि वे आगे आये और भारत को एक मजबूत राष्ट्र बनानें में सहयोग करें।
मुख्य अतिथि किरण माहेश्वरी ने देश विरोधी नारें पर चिंता जाहिर करतें हुये सभी से भावनात्मक प्रेम का अनुरोध करतें हुये इस ज्वलंत मुद्दे के समाधान पर जोर दिया साथ ही देश के सभी नागरिकों से अपील कर देश के विकास, अखण्डता एंव भारत की संस्कृति को बढावा देने पर बल दिया।

 

सांस्कृतिक प्रवाह शोध पत्रिका विशेषांक ‘‘भारत में धार्मिक जनसांख्यिकी असंतुलन‘‘ का विमोचन

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