पत्रकार को पेशेवर दर्जा और मीडिया को जिम्मेदारी का अहसास हो – विष्णु कोकजे जी

देवर्षि नारद पत्रकार सम्मान समारोह, पुणे

विश्व हिन्दू परिषद् के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व न्यायाधीश विष्णु कोकजे जी ने कहा कि पत्रकारिता एक व्यवसाय है. लेकिन कानून में इस व्यवसाय को कहीं भी मान्यता नहीं है. इसलिए पत्रकार को पेशेवर दर्जा और साथ ही मीडिया को जिम्मेदारी का अहसास होना चाहिए. पत्रकारिता में व्याप्त दुष्प्रवृत्तियों के लिए जिम्मेदार और प्रतिष्ठित पत्रकारों को उत्तर देना पड़ता है. पत्रकारिता का सम्मान बढ़ाने हेतु पत्रकार को व्यावसायिक दर्जा देना होगा. इस व्यवसाय में स्थित लोगों के लिये कानून की मांग करते हुए स्वनियमन करने वाली व्यवस्था निर्माण करनी होगी. इससे विशिष्ट आचार संहिता का पालन किया जा सकेगा. इससे पत्रकारों की स्वतंत्रता छिनी नहीं जाएगी, बल्कि स्वनियमन से वह बढ़ेगी.

वे विश्व संवाद केंद्र और डेक्कन एजुकेशन सोसाइटी के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित आद्य पत्रकार देवर्षि नारद पत्रकार सम्मान समारोह में संबोधित कर रहे थे. डेक्कन एजुकेशन सोसाइटी के नियामक मंडल एवं परिषद के अध्यक्ष डॉ. शरद कुंटे कार्यक्रम के अध्यक्ष थे. विश्‍व संवाद केंद्र के अध्यक्ष मनोहर कुलकर्णी एवं संस्था के कार्यवाह डॉ. श्रीकृष्ण कानेटकर मंच पर उपस्थित थे.

कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार हेतु पुरस्कार के लिए लोकसत्ता के सहायक संपादक मुकुंद संगोराम, युवा नवोदित पत्रकार पुरस्कार के लिए दै. महाराष्ट्र टाइम्स नासिक के प्रवीण बिडवे, फोटोग्राफर पुरस्कार के लिए सांगली के उदय देवलेकर और सोशल मिडिया पुरस्कार के लिए कोल्हापूर के विनायक पाचलग को सम्मानित किया गया. पुरस्कार के रूप में क्रमशः नकद राशि, स्मृति चिन्ह, शाल एवं श्रीफल प्रदान किये गए.

मुख्य वक्ता विष्णु कोकजे जी ने कहा कि इलैक्ट्रॉनिक्स मीडिया के कारण प्रिंट मीडिया के समक्ष चुनौतियां बढ़ी हैं. चौबीसों घंटे खबरों के कारण प्रिंट मीडिया में न्यूज वैल्यू नहीं रही. पाठकों की अभिरुचि अलग होती है. गति और विश्वसनीयता कायम रखनी है. प्रिंट मीडिया ने अब तक ये चुनौतियां संभाली है. खबरों के विश्‍लेषण पर जोर देने से प्रिंट मीडिया प्रतिस्पर्धा में टिक सकती है. साथ ही सोशल मीडिया पर नियंत्रण आवश्यक है. मीडिया के दबाव तंत्र के न्यायिक और सामाजिक व्यवस्थाओं पर होने वाले परिणामों का अहसास पत्रकारों को होना चाहिए. इस दबाव तंत्र के चलते दोषी व्यक्ति छूट जाते हैं और निर्दोष व्यक्ति पकड़े जाते हैं. इस कारण सजा होने का अनुपात कम होता है.

मुकुंद संगोराम ने कहा कि पिछले चार दशकों में मीडिया में काफी बदलाव हुए हैं. मीडिया की व्याप्ति बढ़ी है. विकास होने पर कुछ अच्छा होना अपेक्षित था, लेकिन माहौल गंदा हुआ है. शब्दों पर भरोसा कम हुआ है. मीडिया ने स्वयं को न्यायाधीश मानना शुरू किया है. संपूर्ण समाज जानकारी को ज्ञान समझ रहा है. यह अधःपतन रूकना चाहिए.

मनोहर कुलकर्णी जी ने कह कि नारद सर्वत्र संचार करते थे तथा देव और दानवों का भी उन पर विश्वास था. नारद के भक्तिसूत्रों में आज की पत्रकारिता के लिए भी आचार संहिता मिल सकती है. नारद के इस व्यक्तित्व को व्यापक स्वरूप देने का कार्य विश्व संवाद केंद्र कर रहा है. आसावरी जोशी ने कार्यक्रम का संचालन किया तथा डॉ. श्रीकृष्ण कानेटकर ने आभार प्रकट किया.

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