पूरे देश में शोक की लहर थी और इस यूनिवर्सिटी में मनाया जा रहा था जश्न

मौलाना आजाद राष्ट्रीय उर्दू विश्वविद्यालय ‘मानू’ में 16 फरवरी को छात्रावास के विद्यार्थियों के लिए एक भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया। विवि के चांसलर (कुलाधिपति) फिरोज बख्त अहमद ने इस कार्यक्रम का बहिष्कार किया था पर वाइस चासंलर( कुलपति) डॉ. असलम परवेज कार्यक्रम में शामिल हुए। 

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एक तरफ पुलवामा में सीआरपीएफ जवानों की शहादत पर पूरा देश शोकसंतप्त है, दूसरी तरफ फिदायीन हमले के दो दिन बाद यानी 16 फरवरी को ‘मानू’ में भव्य जलसा हुआ। इस कार्यक्रम में 2,000 विद्यार्थियों के अलावा विवि. के कुलपति असलम परवेज, प्रो. एहतेशाम अहमद खान, रजिस्ट्रार एम.ए. सिकंदर, एबीपी न्यूज के पूर्व पत्रकार शाजी जमान, राष्ट्रीय टेबल टेनिस खिलाड़ी नैना जायसवाल, लड़कियों के छात्रावास की प्रोवोस्ट समीरा ताबिश और हैदराबाद के कुछ नामी-गिरामी लोग मौजूद थे। कुलाधिपति फिरोज बख्त अहमद ने इस जलसे का बहिष्कार किया था।
इस कार्यक्रम के बारे में जब रजिस्ट्रार एम.ए. सिकंदर ने पूछा तो उन्होंने उल्टा सवाल जड़ दिया कि कैसा कार्यक्रम हुआ था? यह कहने पर कि देश सैनिकों की शहादत से शोकाकुल था, उस स्थिति में छात्रावास के विद्यार्थियों के लिए संगीतमय आयोजन करना क्या उचित है? तब फिर वे भड़क गए। बोले, ‘‘क्या भारत सरकार ने इस बारे में कोई अधिसूचना जारी की थी? क्या इस तरह के आयोजन पर कोई प्रतिबंध था?’’ यह कहने पर कि देश का नागरिक होने के नाते यह भावना स्वत: ही आनी चाहिए तो वे प्रतिप्रश्न करने लगे। फिर कहा कि इस कार्यक्रम में दो मिनट का मौन रखा गया था।
महत्वपूर्ण बात यह है कि तेलंगाना के मुख्यमंत्री के.चंद्रशेखर राव का जन्मदिन 17 फरवरी को था, लेकिन उन्होंने जन्मदिन नहीं मनाया। उन्होंने पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं से कोई आयोजन नहीं करने को कहा। फिर विवि. प्रबंधन इतना संवेदनहीन कैसे हो सकता है? क्या यह राष्ट्र विरोधी गतिविधि नहीं है? बताया जाता है कि 29 सितंबर, 2018 को कुलपति परवेज असलम के पास ‘सर्जिकल स्ट्राइक दिवस’ मनाने का प्रस्ताव भेजा गया था, पर उन्होंने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया। सूत्रों का कहना है कि कुलपति ने विश्वविद्यालय परिसर को मिनी पाकिस्तान बना दिया है। उनके भीतर राष्ट्र प्रेम जैसी भावना है ही नहीं। वे पाकिस्तान परस्त हैं। इसलिए राष्ट्रीय शोक के मौके पर विद्यार्थियों के लिए भव्य आयोजन और रात्रिभोज करना राष्ट्र विरोधी गतिविधि ही मानी जाएगी। इतना ही नहीं, विवि. प्रबंधन व पत्रकारों को उपकृत किया गया। विद्यार्थियों को पैसे दिए गए ताकि विवि. में चल रहे अवैध कार्यों व घोटालों की जांच के लिए जब यूजीसी का तथ्यान्वेषण दल आए तो वे सकारात्मक रिपोर्ट दें। संयोग से विवि. में चल रही गड़बड़ियों और कुप्रबंधन की पड़ताल के लिए यूजीसी का जांच दल विवि. परिसर में मौजूद है।
सांभार

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