प्रखर वक्ता, पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज

प्रखर वक्ता, राष्ट्रभक्ति से परिपूर्ण ओजपूर्ण वाणी की धनी भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ नेता, पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने जीव जगत को अलविदा कह दिया. बेहद विनम्रता और अकाट्य तर्कों के साथ अपने भाषणों से विरोधियों को जवाब देने वालीं सुषमा स्वराज का राजनीतिक सफर बेदाग रहा. विदेश मंत्री के कार्यकाल के दौरान उन्होंने विदेशों में बसे एक-एक भारतीय का जिस प्रकार ध्यान रखा, व चिंता की, वह कभी भुलाया नहीं जा सकता है.

14 फरवरी 1952 को हरियाणा के अंबाला शहर में जन्मीं सुषमा स्वराज नरेंद्र मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में विदेश मंत्री रहीं. सुषमा स्वराज ने अंबाला के एसडी कॉलेज और पंजाब विश्वविद्यालय के कानून विभाग से पढ़ाई की थी. राजनीतिक जीवन का प्रारंभ 1970 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से किया था और 1977 में केवल 25 वर्ष की आयु में विधायक चुनी गईं. 1977 में जब वह 25 साल की थीं, तब भारत की सबसे कम उम्र की कैबिनेट मंत्री बनी थीं. 1998 में वह दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री बनी थीं. वह 7 बार सांसद और 3 बार विधायक रहीं.

सन् 1990 में सुषमा स्वराज राज्यसभा की सदस्य बनीं और 1996 में लोकसभा चुनावों में दक्षिण दिल्ली से सांसद बनीं थीं. सुषमा स्वराज को 1996 में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में सूचना और प्रसारण मंत्रालय दिया गया था. सन् 1998 में सुषमा स्वराज 12वीं लोकसभा के लिए दोबारा दक्षिणी दिल्ली से चुनी गईं. 2014 में 16वीं लोकसभा में सुषमा स्वराज विदिशा से जीतकर आईं. यूपीए-2 सरकार के दौरान सुषमा स्वराज लोकसभा में विपक्ष की नेता भी रहीं.

सुषमा स्वराज स्कूल के दिनों में एनसीसी से भी जुड़ी रहीं. शुद्ध हिंदी में सजे और सधे हुए शब्दों से संसद से यूनाइटेड नेशन तक में उनके भाषणों ने करोड़ों लोगों के मन को छुआ.

एक सफल नेता के साथ ही वह बेहद कुशल गृहणी भी थीं. सुषमा स्वराज ने कॉलेज के दोस्त स्वराज कौशल से लव मैरिज की थी. सुषमा ने 13 जुलाई 1975 को शादी की थी. उनके पति स्वराज कौशल सुप्रीम कोर्ट के जाने-माने क्रिमिनल लॉयर हैं. वह देश के एडवोकेट जनरल और मिजोरम के गवर्नर भी रह चुके हैं. स्वराज कौशल 1998 से 2004 तक हरियाणा से सांसद भी रह चुके हैं.

एम्स ले जाने से तीन घंटे पहले ही उन्होंने एक ट्वीट किया था. यह ट्विट जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन विधेयक के लोकसभा में पारित होने को लेकर था. जैसे उन्हें पहले ही आभास हो गया था. विधेयक पारित होने पर प्रधानमंत्री का आभार जताया था.

उन्होंने लिखा था – ‘प्रधानमंत्री जी-आपका हार्दिक अभिनंदन. मैं अपने जीवन में इस दिन को देखने की प्रतीक्षा कर रही थी.’

आज 07 अगस्त को शाम तीन बजे उनका अंतिम संस्कार होगा.

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