मदर टेरेसा की संस्था से गायब हुए 280 बच्चे।

image1मदर टेरेसा सन्त या शैतान…!

ये वही मदर टेरेसा हैं जिन्हें 1980 में कांग्रेस की तत्कालीन इंदिरा गांधी की सरकार ने भारत के सर्वोच्च पद “भारत रत्न” से नवाजा था।

टेरेसा को सारी दुनिया में सेवा व त्याग का पर्याय माना जाता था, व प्रचारित किया जाता था कि उन्होंने अपना पूरा जीवन अशक्तों की मदद करने और उनकी सेवा में बिता दिया। मानवता की सेवा के नाम पर मदर टेरेसा ने देश के कई शहरों में संस्थाएं भी खोल रखी हैं, परन्तु इन संस्थाओं को लेकर हाल ही में एक मामला सामने आया, जिसे सुनकर हर कोई चौंक गया।
उनकी कुछ संस्थाएं बच्चों की खरीद फरोख्त एवं धर्मातरण जैसे कार्यो में संलिप्त पाई गई।
उस समय धर्मांतरण एवं मानव तस्करी के आरोप मदर टेरेसा पर भी लगे थे लेकिन इंदिरा से लेकर राजीव व नरसिम्हाराव की सरकारे अनजान बनी रही और मिशनरी संस्थाओं को की सहायता करती रही।
चैरिटी ऑफ मिशनरी को सबसे ज्यादा आर्थिक सहायता इटली के क्रिश्चन परिवार में जन्मी गांधी परिवार की बहू व तत्कालीन कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी उर्फ “अंटोनिया एडवीज अल्बिनो मैनो” के इशारे पर मनमोहनसिंह सरकार के समय हुई व भारत मे रिकार्ड हिन्दू वनवासी भाइयों का धर्म परिवर्तन करवाया गया व जमकर बच्चो की तस्करी की गई।

देशव्यापी मानव तस्करी का पर्दाफाश:-
जी हां रांची में ईस्ट जेल रोड स्थित मिशनरीज ऑफ चैरिटी से संचालित ‘निर्मल हृदय’ से बच्चों की बिक्री का मामला अब देशव्यापी मानव तस्करी का पर्दाफाश कर रहा है। झारखंड ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश, केरल, पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों में बच्चों को भेजने व बेचने की बात सामने आ रही है।

बच्चों की बिक्री के मामले ने पकड़ा तूल:-
कथित करुणा, दया व सेवा की प्रतिमूर्ति सेंट मदर टेरेसा द्वारा स्थापित संस्था मिशनरीज ऑफ चैरिटी से संचालित ‘निर्मल हृदय’ आश्रम से बच्चों की बिक्री का मामला तूल पकड़ रहा है। पुलिस पूरे गिरोह को पकड़ने की तैयारी में जुट गई है। संस्था की ओर से अब तक जितने भी बच्चों की बिक्री की गई, पुलिस उनके खरीदारों की जानकारी जुटा रही है।

पीड़ित महिलाओं के बच्चे रखे जाते हैं निर्मल हृदय संस्था में:
बता दें कि निर्मल हृदय संस्था में रह रही ऐसी पीड़ित बालिग व नाबालिग महिलाए व बालिकाए जो बलात्कार के बाद गर्भवती हुई उनके बच्चे रखे जाते हैं। समिति (सीडब्ल्यूसी), जिला समाज कल्याण अधिकारी (डीएसडब्ल्यूओ), पुलिस तथा अन्य अधिकारियों की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि उन महिलाओ से जन्मे व शिशु सदन में रखे करीब 280 बच्चों का कोई अता-पता नहीं हैं।

मामले की गहन जांच में लगे अधिकारी:-
अब तक की जांच के दौरान जो कागजात जब्त किए गए हैं उसके अनुसार 2015 से 2018 तक उक्त दोनों जगहों (निर्मल हृदय, शिशु भवन) में 450 गर्भवती पीड़िताओं को भर्ती कराया गया। इनसे जन्मे 170 बच्चों को सीडब्ल्यूसी के समक्ष प्रस्तुत किया गया या जानकारी दी गई। शेष 280 बच्चों का कोई अता-पता नहीं है। बच्चों के गायब होने की बात प्रकाश में आते ही हड़कंप मच गया। अब अधिकारी इस मामले की गहन जांच में लग गये हैं कि आखिर बच्चे कहां गये ?

जांच में अब परते खुल रही हैं:-
निर्मल ह्रदय की हेड सहित आठ ननों व पुरुषों को हिरासत में लिया गया व इन ननों के पास से लगभग 1.50 करोड़ से ज्यादा की नगदी बरामद की गई।

ये सब हुआ केंद्र में एक जवाबदार व देश हितेषी नरेंद्र मोदी सरकार के आने के बाद।
जांच अभी जारी हैं देशभर में फैली चैरिटी ऑफ मिशनरी संस्थाओं के दस्तावेज खंगाले जा रहे हैं।
सरकार जांच सीबीआई को सौंपने की तैयारी में है जिसमें कांग्रेस व वामपंथी दलों की कई बड़ी मछलियां भी फसेंगी।

ताज्जुब की बात तो यह हैं कि मानव तस्करी के इतने बड़े भंडा फोड़ के बाद कांग्रेस, सपा, बसपा, आप सहित इनके आंका राहुल, सोनिया, लालू, मालू, माया, कजरी, ममता सभी को साँप सूंघ गया सभी ने रहस्यमयी चुप्पी साध ली।

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