मनुष्य जीव और प्रकृति के मध्य संतुलन बनाने की आवश्यकताः डॉ. भगवती प्रकाश

DIY_2304 DIY_2312 DIY_2220जयपुर, 05 जून। राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के क्षेत्र संघ चालक डॉ. भगवती प्रकाश ने कहा कि आज मनुष्य जीव और प्रकृति के मध्य सामंजसय बनाने की आवश्यकता है। हम जाने-अनजाने में पार्यवरण को बहुत नुकसान पहुचांते है, इसकी भरपाई के लिए हमें प्रयास करने होंगे।
वे मंगलवार को विश्व संवाद केन्द्र की ओर से पर्यावरण और भारतीय चिंतन विषय पर आयोजित स्मारिका विमोचन कार्यक्रम में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि प्राचीन भारत में खेती का आधार जैविक था, इसलिए सर्वाधिक खेती से कभी पर्यवारण को नुकसान नहीं हुआ। लेकिन वर्तमान में रासायनिक खेती से पर्यावरण को बहुत नुकसान पहुंचा है। उन्होंने कहा कि हमें जैव विविधता को ध्यान में रखते हुए अधिक से अधिक पौधा रोपण करना चाहिए। ताकि पर्यावरण असंतुलन रोका जा सके। उन्होंने कहा कि वातारण बढ़ रहे कार्बन और अन्य गैसों के उत्सर्जन से तापमान बढ़ रहा है। इसके चलते ग्लेश्यिर पिघल रहे हैं और समुद्र का जल स्तर बढ़ रहा है। नदियों की धाराएं टूटने लगी है।
कार्यक्रम की शुरूआत में पर्यावरण डॉ. दीक्षिता पापड़ीवाल ने भारतीय चिंतन और ऋषि मुनियों ने पर्यावरण को बचाने के लिए किए गए कार्यों पर प्रकाश डाला। तथा वर्तमान समय में प्लास्टिक के उपयोग को रोकने का अनुरोध किया।
इस अवसर पर शिक्षाविद डॉ. अरविंद अग्रवाल ने गीता के उपदेश के माध्यम से पर्यावरण के बारे विचार व्यक्ति किए।
इस अवसर पर दरबार अमरापुर स्थान जयपुर के संत नंदलाल ने अपने विचार व्यक्त करते हुआ कहा की हमारे वेद हमें सिखाते है कि हमें प्रकृति के हर घटक के बारे में ध्यान रखना चाहिए। हमारे प्रत्येक माहपुरुष ने पर्यावरण के लिए कुछ ना कुछ प्रयास किये है। जीवन से हमें पर्यावरण को संवारने का कार्य करना चाहिए। अमरापुर धाम भी हमेशा सामाजिक कार्यो में हमें आगे रहता है।
इस अवसर पर विश्व संवाद केन्द्र की ओर से पर्यावरण पर आधारित स्मारिका का विमोचन भी किया गया इसी के साथ जयपुर में आयोजित होने वाली दूसरी सोशल मीडिया कॉन्क्लेव के पोस्टर का विमोचन भी किया गया।

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