मानहानि मामले में राहुल के खिलाफ न्यायालय में आरोप तय

rahul-1528719717जयपुर, (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता द्वारा भिवंडी कोर्ट में दायर मानहानि मामले में कोर्ट ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के खिलाफ आरोप तय कर दिये हैं. राहुल गांधी के खिलाफ आईपीसी की धारा 499 और 500 के तहत आरोप तय किए गए हैं. मामले में अगली सुनवाई 10 अगस्त को होगी. न्यायालय के निर्देश के बाद राहुल गांधी आज (12 जून, 2018) भिवंडी कोर्ट में पेश हुए थे. न्यायालय में आरोप तय होने के पश्चात राहुल गांधी की मुश्किलें बढ़ना स्वाभाविक है. दूसरी ओर कांग्रेस अध्यक्ष की आदत सी हो गई है कि कोई भी मामला हो, संघ पर दोषारोपण करने से पीछे नहीं रहते. न्यायालय में राजेश कुंटे की ओर से अधिवक्ता गणेश धारगळकर, अधिवक्ता नंदू फडके तथा राहुल गांधी की ओर से अधिवक्ता नारायण अय्यर उपस्थित रहे.

राहुल गांधी ने मार्च 2014 में भिवंडी में एक चुनावी सभा के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर महात्मा गांधी की हत्या का आरोप लगाया था. जिस पर भिवंडी के कार्यकर्ता राजेश कुंटे ने उनके खिलाफ न्यायालय में मानहानि का केस दायर किया था. न्यायालय से पेशी का सम्मन जारी होने के बावजूद राहुल गांधी पेश नहीं हुए थे और मुंबई उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाते हुए याचिका दायर कर अपने खिलाफ जारी हुए सम्मन तथा केस को खारिज करने की प्रार्थना की थी. जिस पर सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति एमएल टहलीयानी ने कांग्रेस उपाध्यक्ष को किसी भी प्रकार की अंतरिम राहत देने से मना कर दिया था. कनिष्ठ न्यायालय के सामने चल रही सुनवाई जारी रखने और उनके सामने अपनी बात विस्तार से रखने के आदेश भी दिए थे. इसके पश्चात उच्च न्यायालय से राहत न मिलने पर राहुल गांधी ने सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी और केस रद करने की मांग की थी. सर्वोच्च न्यायालय में राहुल गांधी की याचिका पर सुनवाई के पश्चात जून 2016 में राहुल को मामला समाप्त करने के लिये सर्वोच्च न्यायालय ने माफी मांगने या फिर मानहानि केस में ट्रायल का सामना करने के निर्देश दिये थे.

12 जून को न्यायाधीश द्वारा पूछे जाने पर राहुल गांधी ने आरोपों को स्वीकारने से इंकार किया. वहीं, न्यायालय में पूछे जाने पर मुंबई उच्च न्यायालय में अपनी याचिका के साथ दायर भाषण के अनुवाद को ही स्वीकार करने से इंकार कर दिया, उन्होंने कहा कि ये उनका भाषण नहीं है. अगली तिथि (10 अगस्त) पर इस बात पर निर्णय होगा कि इस भाषण के अनुवाद को उनके खिलाफ सबूत के रूप में स्वीकार किया जाए या नहीं. वहीं अब, मानहानि मामले में समन्स ट्रायल के रूप में सुनवाई आगे बढ़ेगी.

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