राजस्थान में शिक्षा वर्ग सम्पन्न, 2655 शिक्षार्थियों ने किया सहभाग 

गौतस्कर, पत्थरबाज, हत्यारे, नारियों का अपमान करने वाले व देश विरोधी नारे लगाने वालों के मानव अधिकार नहीं- इन्द्रेश कुमार
जयपुर प्रांत के संघ शिक्षा वर्ग प्रथम वर्ष के समापन अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य इन्द्रेश कुमार ने कहा कि सेना पर पथराव करने वाले, गौ हत्यारे, गौ-तस्कर व गौ मांस खाने वाले, विश्वविद्यालयों में देशविरोधी नारे लगाने वाले, नारियों का अपमान व उन पर अत्याचार करने वाले लोगों के कोई मानव अधिकार नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि तथाकथित प्रगतिशील राष्ट्रविरोधी लोग जो भेदभाव बढ़ाकर भड़काने व लड़वाने का कार्य कर भारत में अशान्ति व हिंसा फैलाना चाहते हैं, उनका पर्दाफाश होना चाहिये। यह वे लोग हैं जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की बात तो करते हैं लेकिन मानते हैं कि यह स्वतंत्रता एकतरफा ही होनी चाहिए। इसीलिए वे वैचारिक मतभिन्नता रखने वाले 273 कार्यकर्ताओं की केरल में हत्या करवाते हैं। यानी जो इनके विचारों से सहमत नहीं है उनके जीने का अधिकार भी समाप्त कर देते हैं। ऐसे लोग मानव व मानवता के दुष्मन हैं।
आज देश में अलग अलग प्रकार से अस्पृष्यता के मुद्दे उठाकर समाज को तोड़ने वाली शक्तियां सक्रिय हैं। दूसरी तरफ संघ सबको जोड़ने का आन्दोलन है, जो देश में एकता, अखण्डता, स्नेह व समरसता की धारा प्रवाहित करने में लगा हुआ है। संघ अस्पृश्यता को पाप, अपराध व अधर्म मानता है व इसके पूर्ण निर्मूलन में लगा हुआ है।
उन्होंने कहा कि भारत में प्यार के लिए बड़ा स्थान था। हमारे यहां प्यार को पवित्र माना गया है, जब इसे पवित्रता के रूप में लिया गया तो होली का त्यौहार बना। लेकिन देश में आधुनिकता के रूप में पश्चिम आया। हमने उसका स्वागत किया परंतु एक संकट आ गया। उन्होंने कहा प्यार पवित्र और सदा करने वाली चीज नहीं है। इसलिए प्यारा भी एक व्यापार है, एक भोग है। पश्चिम ने जैसे ही इस कल्पना को जन्म दिया इसमें से एक त्यौहार जन्मा इसे वेलेनटाइनडे कहते है।
वेलेनटाइन डे के संस्कारों ने अवैध संतान, तलाक, नारी हिंसा जैसी सामाजिक बुराईयों को जन्म दिया। आज भारत ही नहीं पूरा विश्व इससे त्रस्त हो गया। इसलिए प्यार पवित्र और जीवन मूल्य था तो उसमें से होली जन्मा, राधा कृष्ण के रूप में गाया गया घर- घर मनाया गया। प्यार एक व्यापार बना तो उसमें से वेलेनटाइन डे जन्मा। प्यार रूपी जीवन मूल्य को कैसे सेलिब्रेट करना, जीवन के अंदर कैसे जीना भारत ने पूरी दुनियां को सिखाया और दिया। उन्होंने कहा कि जीवन मूल्यों को जीने की भी हमारी आदत होनी चाहिए।
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संघ में कार्यकर्ताओं के निर्माण की प्रक्रिया निरंतर चलती है- हिरेमठ 
भरतपुर में द्वितीय वर्ष के समापन समारोह में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य सुहासराव हिरेमठ ने कहा कि संघ में कार्यकर्ताओं के निर्माण की प्रक्रिया निरंतर चलती है। संघ शिक्षा वर्ग इसी निर्माण की एक कड़ी है। चरित्रवान, राष्ट्रभक्त, अनुशासित कार्यकर्ता निर्माण हो यह संघ शिक्षा वर्ग का विशेष उद्देश्य है। संघ की अपेक्षा है कि इस प्रकार के गुण राष्ट्र के प्रत्येक नागरिक में हों। उन्होंने कहा कि आज विश्व में बड़े विरोधाभासी चित्र देखने को मिल रहे हैं, जिसमें एक तरफ भोगवाद है तो दूसरी तरफ आतंकवाद है। भारतवर्ष ही ऐसा देश है जो विश्व को भोगवाद आतंकवाद से मुक्त करने की क्षमता रखता है। किसी भी देश में जब राष्ट्रभक्ति एवं संगठन शक्ति प्रस्फुटित होती है तो वो निरंतर प्रगति के पथ पर आगे बढ़ता रहता है। उन्होंने आव्हान किया कि यदि हमें विश्व गुरु के रुप में विश्व का मार्गदर्शन करना है तो हमें चरित्रवान, अनुशासित, राष्ट्रभक्त, संगठित होना ही होगा।राजस्थान के संघ शिक्षा वर्गों में जल संरक्षण के लिए अनूठा प्रयोग

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के राजस्थान क्षेत्र में इस वर्ष नौ संघ शिक्षा वर्ग सम्पन्न हुए। संघ शिक्षा वर्ग में हमेशा नवाचार होते है। उत्तर- पश्चिम क्षेत्र तीनों प्रांतो के संघ शिक्षा वर्गों में और पर्यावरण संरक्षण का विशेष ध्यान रखा गया। पानी की बचत हो इसके लिए स्वयंसेवकों ने मिट्टी से ही बर्तन साफ किए। जल संरक्षण का बड़ा उदाहरण है। वहीं संघ शिक्षा वर्गों में प्लास्टिक से बनी वस्तुओं का भी उपयोग नहीं किया गया।
राजस्थान में शिक्षा वर्ग सम्पन्न, 2655 शिक्षार्थियों ने किया सहभाग

राजस्थान में शिक्षा वर्ग सम्पन्न, 2655 शिक्षार्थियों ने किया सहभाग

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संघ योजना से राजस्थान को उत्तर पश्चिम क्षेत्र कहा जाता है, इसमें तीन प्रांतों में जयपुर, जोधपुर और चित्तौड़ हैं। तीनों प्रांतो में 6 संघ शिक्षा वर्ग व 3 घोष वर्ग  आयोजित किए गए। इनमें प्रथम वर्ष जोधपुर प्रांत का नागौर में जहां 532 शिक्षार्थी, चित्तौड प्रांत का उदयपुर जहां349, केकड़ी में423 और जयपुर प्रांत के वर्ग में 439 शिक्षाथीयों का सहभाग रहा, राजापार्क जयपुर में आयोजित हुआ। 40 वर्ष से अधिक आयु वालों के लिए जोधपुर में विशेष शिक्षा वर्ग लगाया गया, जिसमें236 का पंजीयन हुआ पूरे राजस्थान क्षेत्र का  द्वितीय वर्ष  शिक्षा वर्ग भरतपुर में आयोजित हुआ। इस वर्ग में 18 से 21 मई तक सरसंघचालक डॉ. मोहनराव भागवत का सानिध्य315 शिक्षार्थीयों को प्राप्त हुआ। तीनों ही प्रांतों में घोष वर्ग भी समपन्न हुए। जयपुर प्रांत का बांदीकुई में81, जोधपुर का नागौर  में 113और चित्तौड प्रांत का घोषवर्ग मांडलगढ़ में 60 घोष वादको ने अभ्यास किया।तृतीय वर्ष नागपुर की कुल 914 संख्या में 68 राजस्थान के कार्यकर्ता हैं।
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*वैसे तो शिक्षा वर्ग में हमेशा नवाचार होते है,इस वर्ष जो विशेष प्रयोग हुए हैं उनमें से कुछ का उल्लेख करना उचित होगा।।
*उत्तर- पश्चिम क्षेत्र तीनों प्रांतो के संघ शिक्षा वर्गों में और पर्यावरण  का विशेष ध्यान रखा गया। समापन व श्रम साधना कालाशं में पौधारोपण पानी की बचत हो इसके लिए स्वयंसेवकों ने मिट्टी से बर्तन साफ किए। वहीं शिक्षा वर्गों में प्लास्टिक से बनी वस्तुओं का भी उपयोग नहीं अथवा कम से कम किया गया।
*साठ हजार परिवारों तकसंगठन व समरसता का संदेश-
संघ ने  राजस्थान में इसी  वर्ष  परिवारों से चपातियां व परांठे एकत्रित करने की योजना बनाई थी। प्रशिक्षार्थी और प्रबंधन में लगे करीब करीब तीन हजार स्वयंसेवकों के लिए बीस दिन तक  करीब 20 हजार चपातियां प्रतिदिन समाज के सहयोग  द्वारा परिवारों से  एकत्र कर वर्ग स्थानों पर लायी जाती थी । इस तरह संघ इन 21 दिनों में  करीब 60 हजार  परिवारों तक  पहुंचकर स्वयंसेवको ने प्रत्यक्ष  संगठन व समरसता का संदेश दिया।
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*जयपुर में पहली बार निकला निशा संचलन – 
जयपुर के शिक्षा वर्ग के दौरान महाराणा प्रताप की 477 वीं और वीर सावरकर की 134 वीं जयंती पर निशा संचलन निकाला गया। यह अपने आप में अनूठा प्रयोग था और जयपुर के इतिहास में पहली बार निशा संचलन निकला। संचलन राजापार्क के विभिन्न मार्गों पर यह पद संचलन आयोजित किया गया।
*नवीन गणवेश में पहली बार लगा  शिक्षा वर्ग
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के ड्रेस कोड में बदलाव के बाद पहली बार संघ शिक्षा वर्ग नवीन गणवेश में लगाए गए। पिछले वर्ष संघ शिक्षा वर्गों में खाकी हॉफ पेंट का उपयोग किया गया था। गणवेश में नेकर के स्थान पर पेंट इसी वर्ष दशहरे से शामिल की गई थी।
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*प्रदर्शनी रही आकर्षण का केन्द्र 
उत्रर पश्चिम क्षेत्र के सभी वर्गों में विभिन्न प्रकार की प्रदर्शनियां लगाई गई। भरतपुर और जयपुर में गुरु गोविंदसिंह के प्रकाश वर्ष को 350 वर्ष होने पर उनके जीवन पर लगाई गई चित्र प्रदर्शनी आकर्षण का केन्द्र रही। बेदी सत्संग भवन के प्रमुरव सेवादार द्घारा उद्घाटन करवाया गया।

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