विश्व संवाद केन्द्र तथा प्रेस क्लब कोटा की ओर से देवर्षि नारद जयंती एवं पत्रकार सम्मान

image1 (1)देवर्षि नारद पत्रकारिता के पितृ पुरुष हैं – महेन्द्र सिंघल
पत्रकारिता, पाखंड की पीठ पर चुनौती का चाबुक है
नारद के गुणों को आत्मसात करने से ही समाज का कल्याण संभव
देवर्षि नारद जयंती एवं पत्रकार सम्मान समारोह आयोजित

जयपुर (विसंकें)। विश्व संवाद केन्द्र तथा प्रेस क्लब कोटा की ओर से देवर्षि नारद जयंती एवं पत्रकार सम्मान समारोह प्रेस क्लब भवन केनाल रोड कोटा पर आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ राजस्थान क्षैत्र के प्रचार प्रमुख महेन्द्र सिंघल थे। वहीं अध्यक्षता प्रेस क्लब कोटा के अध्यक्ष गजेन्द्र व्यास ने की। विश्व संवाद केन्द्र कोटा बूंदी विभाग के प्रमुख डाॅ. विमल जैन विशिष्ठ अतिथि रहे। समारोह के दौरान वरिष्ठ साहित्यकार दुर्गादान सिंह गौड तथा पत्रकारिता के क्षैत्र में सुनील पांचाल को सम्मान प्रतीक देकर तथा माला पहनाकर व श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया गया।

इस दौरान संबोधित करते हुए महेन्द्र सिंघल ने कहा कि देवर्षि नारद नाम सुनते ही इधर-उधर विचरण करने वाले व्यक्तित्व की अनुभूति होती है। आम धारणा यही है कि देवर्षि नारद ऐसी ‘विभूति’ हैं जो ‘इधर की उधर’ करते रहते हैं। वास्तव में ऐसा नहीं है, देवर्षि नारद इधर-उधर घूमते हुए संवाद-संकलन का कार्य करते हैं। इस प्रकार एक घुमक्कड़, किंतु सही और सक्रिय-सार्थक संवाददाता की भूमिका निभाते हैं। देवर्षि नारद दुनिया के प्रथम पत्रकार या पहले संवाददाता हैं, क्योंकि उन्होंने इस लोक से उस लोक में परिक्रमा करते हुए संवादों के आदान-प्रदान द्वारा पत्रकारिता का प्रारंभ किया। इस प्रकार देवर्षि नारद पत्रकारिता के प्रथम पुरोधा और पितृ पुरुष हैं।

उन्होंने कहा कि पत्रकारिता, पाखंड की पीठ पर चुनौती का चाबुक है और देवर्षि नारद इधर-उधर घूमते हुए जो पाखंड देखते हैं उसे खंड-खंड करने के लिए ही तो लोकमंगल की दृष्टि से संवाद करते हैं। रामावतार से लेकर कृष्णावतार तक नारद की पत्रकारिता लोकमंगल की ही पत्रकारिता और लोकहित का ही संवाद-संकलन है। उनके ‘इधर-उधर’ संवाद करने से जब राम का रावण से या कृष्ण का कंस से दंगल होता है, तभी तो लोक का मंगल होता है। अतः मेरे मत में देवर्षि नारद दिव्य पत्रकार के रूप में लोकमंडल के संवाददाता हैं। पत्रकारिता में समस्याओं के साथ समाधान भी देना जरूरी है। आज की पत्रकारिता में स्वयं ही न्यायाधीश बनने का भाव प्रबल होता जा रहा है, जहां ‘न्यूज’ से अधिक ‘व्यूज’ का प्रस्तुतिकरण हो रहा है।

प्रेस क्लब के अध्यक्ष गजेन्द्र व्यास ने कहा कि आज की पत्रकारिता व्यक्ति परक हो गई है। उन्होंने कहा कि समाज में सकारात्मक समाचार ही प्रस्तुत किए जाने चाहिए, जिससे सामाजिक संस्थाओं में काम करने वाले लोगों की रुचि बढ़े और समाज को इसका लाभ मिले। समाचारों में यदि दबाव का प्रदर्शन हो तो वह समाचार नहीं रह जाता है। विशिष्ठ अतिथि डाॅ. विमल जैन ने आज के समय में पत्रकारिता की चुनौतियों और बदलाव की ओर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि टीआरपी के चक्कर में पत्रकार अपना दायित्व भूल रहे हैं। इससे पत्रकारों की छवि प्रभावित हो रही है। यह चिंता का विषय है। कवि एवं साहित्यकार दुर्गादान सिंह गौड ने कहा कि मीडिया समाज का दर्पण है। हर पत्रकार का उद्देश्य जन कल्याण होना चाहिए। राष्ट्रहित सर्वोपरि होना चाहिए। नारद के गुणों को आत्मसात करने से ही समाज का कल्याण संभव है। उन्होंने व्यस्त जीवन के बावजूद 13 ग्रंथ रचे।

सुनील पांचाल ने कहा कि पत्रकारों को कई बार चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। खासकर इमरजेंसी के दौरान पत्रकारों को सबसे ज्यादा परेशान किया गया। उसके बावजूद पत्रकारों ने सफलतापूर्वक अपना दायित्व संभाला। सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही अफवाहों को उन्होंने समाज के लिए बड़ी चुनौती बताया। उन्होंने इस ओर भी इशारा किया कि भारतीय जीवन मूल्यों, संस्कृति, परंपरा, मर्यादाओं को मिटाने के लिए बडे़ स्तर पर प्रयास हो रहा है।  इस दौरान प्रेस क्लब के वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रताप सिंह तोमर, प्रेस क्लब के महासचिव जितेन्द्र शर्मा, कोषाध्यक्ष मालसिंह शेखावत, कार्यकारिणी के सदस्यों समेत कईं पत्रकार मौजूद रहे।

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