व्यक्तिवादी व्यवस्था समाज से समाप्त होनी चाहिए – श्री हनुमान सिंह जी

 अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ द्वारा गुरू गोविंद सिंह के 350 वें प्रकाश उत्सव पर व्याख्यान एवं पुस्तक विमोचन कार्यक्रम

अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ द्वारा गुरू गोविंद सिंह के 350 वें प्रकाश उत्सव पर व्याख्यान एवं पुस्तक विमोचन कार्यक्रम
विसंके जयपुर। व्यक्तिवादी व्यवस्था समाज से समाप्त होनी चाहिए, व्यक्ति निष्ठा की जगह तत्व निष्ठा होनी चाहिए जिससे हिन्दू समाज का सुदृढ़ निर्माण हो सकें यह कहना था शैक्षिक प्रौद्योगिकी विभाग के अनुसंधान अधिकारी हनुमान सिंह राठौड़ का वह आज नारायण सिहं सर्किल स्थित इन्द्रलोक सभागार में अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ द्वारा गुरू गोविंद सिंह के 350 वें प्रकाश उत्सव पर व्याख्यान एवं पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में मुख्य वक्ता में रूप में बोल रहे थे।
उन्होनें गुरू गोविन्द सिंह जी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि समाज की विकृतियों को दूर करने के लिए भारतीय समाज को जोड़ने के लिए, एकता के सूत्र में पिरोने एवं छुआछूत जैसी विकृतियों को दूर कर धर्म की स्थापना करने की प्रेरणा दी उन्होंने बताया कि शांति की स्थापना एक सांझी वार्ता से ही संभव है, एकात्माकता से ही संभव हैं। उन्होंने कहा कि ‘‘चिड़िया ते में बाज तुडाउॅं, गिद्दों से मैं शेर बनाउ, सवा लाख से एक लडाउॅं, तभै गोविंद सिंह नाम कहाउॅं।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि राजस्थान सरकार की उच्च शिक्षा मन्त्री किरण माहेश्वरी ने कहा कि ‘‘350 वर्ष पहले गुरू गोविंद सिंह ने कहा कि दिन को पालू, दुष्ट को मारू, तभी गुरू गोविंद सिंह कहलाउ।’’ उन्होंने पंच प्यारे पर प्रकाश डाला और साहस व प्रेरणा की बात कही जिससे राष्ट्र का निर्माण हो सकें।
विशिष्ट अतिथि राजस्थान अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष जसवीर सिंह ने कहा कि कि यह प्रकाश पर्व पूरे विश्व में बड़ी सिद्दत के साथ मनाया जा रहा हैं। उन्होंने अनेक उदाहरणों से स्पष्ट किया कि गुरू गोविंद सिंह हमारे आदर्श हैं। महाराजा रणजीत सिंह ने गुरू गोविंद सिंह से प्रेरणा लेकर काबुल में ईंट से ईंट बजायी जो हमारे देश से बंट कर गया देश उसकी परिस्थितियॉं अच्छी नहीं हैं। उन्होंने आज तलवार रूपी संकल्पां की जरूरत बतायी और कहा कि हथियारों से लैस सेना को रोक पाना संभव है लेकिन विचारों को रोक पाना संभव नहीं है। देश एवं धर्म के प्रति प्रतिबद्धता बहुत जरूरी है तभी भारत विश्व गुरू बनेगा।
अध्यक्षता महासंघ के अध्यक्ष प्रो. विमल प्रसाद अग्रवाल करते हुए ने बताया कि संगठन राष्ट्रीय भाव से कार्य करता हैं और उन्होंने राष्ट्रीयता की बात कही। गुरू गोविंद सिंह के बारे में बताते हुए कहा कि तीन पीढ़ियों की कुर्बानी करने वाला एक मात्र परिवार था। गोविंद राय से गुरू गोविंद सिंह बने।
अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ देश भर में के.जी. से पी.जी. तक काम करने वाला अनूठा संगठन हैं। संगठन अपनी स्थापना से ही शैक्षिक गतिविधियां, नवाचारों के साथ-साथ सामाजिक सरोकारों पर इस तरह के कार्यक्रम आयोजित करता आया है। इसी श्रृंखला में गुरू गोविंद सिंह के 350 वें प्रकाश उत्सव पर व्याख्यान एवं पुस्तक विमोचन का आयोजन किया गया।

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