संतों से सरसंघचालक की भेंटवार्ता, संघ और संतों द्वारा चलाएं जा रहे सेवा कार्यों पर चर्चा

संतों से सरसंघचालक जी की भेंटवार्ता

संतों से सरसंघचालक जी की भेंटवार्ता

निम्बार्क सम्प्रदाय के श्रीजी महाराज के साथ सरसंघचालक जी रामगढ के पूज्य संत बालक नाथ जी और पूज्य सरसंघचालक जी सांगलिया के पूज्य संत ओम नाथ जी और डॉ. मोहनराव भागवत

विसंके जयपुर 16 सितम्बर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने राजस्थान प्रवास के दौरान शनिवार को यहां के संतों से भेंट कर, उनके द्वारा हिंदू समाज के लिए चलाए जा रहे सेवाकार्यों के बारे में चर्चा की।
संतों से संवाद के दौरान उन्होंने समाज के पीड़ित, वंचित और निर्धन व्यक्ति की सेवा पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि समाज में अभावग्रस्त बंधुओं के लिए सेवा कार्य अधिक कैसे बढ़े इस दिशा में हमें प्रयास करने होंगे। उन्होंने संतों द्वारा चलाए जा रहे विभिन्न सेवा कार्यों हेतु उनके प्रयास की सराहना की।
भागवत की संतो से मुलाकात-
आज सवेरे 8 बजे से ही डॉ. भागवत ने भारती भवन पर अलवर जिले के रामगढ़ में ओढ़ समाज के मध्य संस्कार व शिक्षा का प्रसार करने वाले संत बालकदास जी महाराज से भेंट की।
प्रातःकाल 9 बजे अन्नक्षेत्र व चिकित्सा सेवा के लिए प्रसिद्ध सेवाकार्य चलाने वाले, सिंधी भाषी समाज के प्रेमप्रकाश आश्रम, अमरापुर स्थान के महंत पूज्य संत भगतप्रकाश जी महाराज व संत मंडली से भेंट की। जिसमें संतों से परिचय एवं बातचीत हुई। मुलाकात से पहले उन्होंनें आश्रम में मंदिर व संत टेऊराम महाराज एवं संत सर्वानंद जी महाराज की समाधि के दर्शन भी किए।
सरसंघचालक जी के साथ क्षेत्र प्रचारक दुर्गादास प्रांत संघचालक डॉ. रमेशचन्द्र, क्षेत्र संपर्क प्रमुख व प्रांत प्रचारक भी उपस्थित थे। सरसंघचालक जी लगभग 40 मिनट तक अमरापुर आश्रम में उपस्थित रहे जहां सिंधी समाज के प्रमुख लोग उपस्थित थे। भारतीय सिंधु सभा के राजस्थान के अध्यक्ष भी उपस्थित थे। दोनों के बीच अमरापुर के मूल स्थान “सिंध“पर भी चर्चा हुई।
इसी प्रकार सद्संस्कारी जीवन का संदेश देने वाले सलेमाबाद के संत निम्बार्क संप्रदाय के अखिल भारतीय पीठाधीश्वर पूज्य श्रीजी महाराज से और सांगलिया पीठ के युवा संत पूज्य ओमदास जी, जो छात्रावास, गौशालाएं औषधालय और विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों का संचालन करते हैं, से भारती भवन में भेंट हुई।
संघ भी समाज में अनेक प्रकार के सेवा कार्य कर रहा है-
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का सेवा विभाग छोटे बाल संस्कार केंद्र से लेकर बड़े चिकित्सालय जैसे अनेक सेवा कार्यों का संचालन करता है। इस समय राजस्थान क्षे़त्र में स्वयंसेवको द्वारा 1325 सेवा कार्य चलाए जा रहे हैं। इनमें शिक्षा के 577, स्वास्थ्य के 181, स्वावलम्बन के 128 और सामाजिक उत्थान के 439 सेवा कार्य चल रहे हैं। यह कार्य स्वयंसेवकों के माध्यम से समाज के सहयोग से सेवा बस्तियों में चलाए जा रहे हैं। ऐसे ही सेवा भारती द्वारा राजस्थान में सर्वजातीय सामूहिक विवाह का भी सफल आयोजन पिछले कई वर्षों से किया जा रहा है।
सेवा कार्य में लगे संगठन-
राजस्थान में स्वयंसेवकों द्वारा शहरी पिछड़े व ग्रामीण जनजाति क्षेत्रों में सेवा भारती, विश्व हिंदु परिषद, विद्याभारती, वनवासी कल्याण परिषद, भारत विकास परिषद, राष्ट्रसेविका समिति, सीमाजन कल्याण समिति आदि के माध्यम से अनेक प्रकार के सेवा कार्य संचालित हो रहे हैं।
शिक्षा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र में स्वयंसेवकों का योगदान-
बाल संस्कार केन्द्र, विद्यालय, छात्रावास, एकल विद्यालय, कचरा बीनने वाले बच्चों का स्कूल आदि, 30 चल चिकित्सा वाहन, अस्पताल, डिस्पेंसरी, चिकित्सा शिविर के साथ-साथ सेवा भारती ने 1500 स्कूलों में “स्वास्थ्य जागरुकता अभियान“ चलाया। साथ ही जनजातियों के बीच स्वास्थ्य परीक्षण आदि अनेक प्रकार के कार्य किये जा रहे हैं।
समाज में समरसता-
आज समाज में जाति एवं ऊंच नीच का भेद मिटाते हुए स्वयंसेवक अनेक स्थानों पर सामूहिक कन्यापूजन, सामाजिक समरसता यज्ञ, सर्वजातीय सामूहिक विवाह, सहभोज, मंदिरों में आयोजन, उत्सव, महापुरुषों की जयन्तियां आदि सामूहिक रूप से आयोजित कर रहे हैं।

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