संस्कृत में झलकती है भारत की आत्मा: रामनाथ कोविंद

जयपुर, 22 अप्रैल (विसंकें)। संस्कृत में भारत की आत्मा झलकती है। यह बहुत सारी भाषाओं की जननी है। संस्कृत केवल अध्यात्म या दर्शन शास्त्र या साहित्य के क्षेत्र में ही उपयोगी भाषा नहीं है बल्कि एल्गोरिथम (गणितीय समस्याओं के समाधान) और मशीनी ज्ञान को बढ़ाने में भी सहायक है। आर्टिफीशियल इंटेलीजेंस के क्षेत्र में संस्कृत अपना महत्व दर्शा रही है। उक्त विचार राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने नई दिल्ली के लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठ के 17वें दीक्षांत समारोह में व्यक्त किए। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि हमारी बौद्धिक क्षमता के विकास में संस्कृत भाषा‚ साहित्य और विज्ञान ने महत्वपूर्ण अध्याय जोड़े हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि जो संदेश संस्कृत भाषा के जरिए दिए गए हैं वे विश्व के कल्याण के लिए सबसे ज्यादा उपयोगी हैं। यह ज्ञान और विज्ञान की भाषा है। संस्कृत के जरिए वैज्ञानिकों और गणितज्ञों ने अपने ज्ञान और आविष्कारों को आगे बढ़ाया है। जिन विभूतियों ने ये कार्य किए उनमें आर्यभट्ट वराह मिहिर‚ भाष्कर‚ चरक और सुश्रुट प्रमुख हैं। अब योग पूरी दुनिया को अपना महत्व बता रहा है। 21जून को पूरी दुनिया योग दिवस मनाती है। यह भी संस्कृत और प्राचीन भारत की कलाओं से जुड़ा क्षेत्र है। इसी प्रकार से दुनिया में आयुर्वेद का भी महत्व बढ़ रहा है। जिसका मूल संस्कृत में विद्यमान है। तमाम विद्वानों ने माना है कि संस्कृत व्याकरण की दृष्टि से ज्यादा तार्किक और नियमबद्ध है। इसीलिए यह मशीनी ज्ञान के विकास और आर्टिफीशियल इंटेलीजेंस को बढ़ावा देने में ज्यादा सहायक है। राष्ट्रपति ने संस्कृति भाषा को जन−जन की भाषा बनाने के लिए और ज्यादा प्रयासों पर जोर दिया। 21वीं सदी में भारत इंटरनेट ही नहीं बल्कि उपनिषदों के लिए भी दुनिया में अपनी पहचान बनाएगा।

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