समाज के सर्वांगीण विकास के लिए व्यवहार में लाये समरसता—श्री ओतीया

6ebf01b5-34d1-4361-9430-4666b654171c 4a6220f6-56f7-41cd-989c-cba19ceb93f0 1d9d95c5-133b-4a6e-b487-db3e63c84770—भरतपुर में सामाजिक समरसता पर संगोष्ठी
भरतपुर 14 अप्रेल। समाज के सर्वांगीण विकास के लिए अस्पर्शयता जैसे सामाजिक कुरीति को समूल समाप्त कर सामाजिक समरसता को व्यवहार में लाना होगा। यह कहना है सेवा भारती के अखिल भारतीय अधिकारी श्री प्रवीण भाई ओतीया का। वे गुरूवार को भरतपुर स्थित समिधा भवन में डॉ.भीमराव अम्बेडकर की 125वीं जयंती पर आयो​जित सामाजिक समरसता संगोष्ठी में मुख्यवक्ता के रूप में लोगों को संबोधित कर रहे थे।
सामाजिक समरसता मंच, भरतपुर की ओर से आयोजित इस संगोष्ठी को संबोधित करते हुये श्री ओतीया ने कहा कि डाॅ.अम्बेडकर न केवल अस्पृश्य वर्ग के लिए अपितु सम्पूर्ण समाज के चिन्तक थे। उनका व्यक्तित्व और जीवन दर्शन सबको साथ लेकर चलने का था। उनकी जयंती पर हमको सामाजिक समरसता व्यवहार में लाने का संकल्प लेना होगा। अगर हम ऐसा कर पाये तो समाज का सर्वांगीण विकास कोई रोक नहीं सकता।
उन्होंने कहा कि राष्ट्र से जुडे अनेक विषयों पर उनके विचार राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के विचारों से मिलते थे। डाॅ.अम्बेडकर ने न केवल संस्कृत को राष्ट्र भाषा घोषित करने का समर्थन किया था बल्कि कश्मीर में धारा 370 का विरोध भी किया।
अपनो को मुख्यधारा से न जोड. पाना दुर्भाग्यपूर्ण
श्री ओतीया ने कहा कि हमारे देश पर अनेक विदेशियों ने आक्रमण किये जिनमें शक, हूण आदि का तो आज नामोंनिशान तक नहीं बचा। हिन्दू संस्कृति इतनी विशाल व आत्मसात करने वाली है कि इन आततायिओं का अस्तित्व तक न बचा, लेकिन देश का दुर्भाग्य है कि हम अपने ही बन्धुओं को आज भी मुख्य धारा में नहीं जोड. पाये। इस दिशा में हम सबको मिलकर प्रयास तेज करने होंगे।
तब तक परमवैभव संभव नहीं
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए श्री प्रेम सिंह आर्य ने कहा कि विषमता से व्याप्त समाज में सामाजिक समरसता की महती आवश्यकता है। बाबा साहब को दलितों का मसीहा कहना उनके व्यक्तित्व, उनके प्रभाव को कम करके आंकना होगा। वास्तव में तो वे पूरे विश्व के शोषित, वंचित व पीडित वर्ग के मसीहा थे। उन्होंने कहा कि जब तक हमारे देश में असमानता रहेगी तब तक हमारा देश प्रगति नहीं कर सकेगा। जिस प्रकार उॅची नीची जमीन से अच्छी पैदावर नही ली जा सकती उसी प्रकार से उॅच नीच की भावना जब तक रहेगी तब तक भारत परमवैभव को प्राप्त नहीं कर सकेगा। ।

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