साकार होनी शुरू हो गई ‘गांधी के भारत’ की कल्पना – डॉ. मोहन भागवत

जयपुर (विसंके), 17 फरवरी। गांधी स्मृति स्थित कीर्ति मंडल में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहनराव भागवत ने प्रो. जगमोहन सिंह राजपूत की नई पुस्तक ‘गांधी को समझने का यही समय’ का लोकार्पण किया। इस मौके पर डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि गांधी जी को समझने का यह सही समय है। हिन्द स्वराज पढ़ने के बाद ये पता चलता है कि अंग्रेजों को भगाने के बाद कैसा भारत होगा, इसकी कल्पना गांधी जी के मन में थी। इसीलिए गांधी को आज भी आदर और सम्मान से याद करते हैं। सरसंघचालक जी ने कहा कि ये सही समय इसलिए है कि आजादी के बाद वो सभी समस्याएं बनी हुई हैं। ये बात सही है कि “गांधी जी की कल्पना का भारत आज नहीं है” लेकिन आज पूरे देश में घूमने के बाद मैं ये कह सकता हूं कि गांधी जी की कल्पना का भारत अब साकार होने शुरू हो गया है। डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि  महात्मा गांधी ने कभी भी लोकप्रियता और सफलता और असफलता की परवाह नहीं की। अन्तिम व्यक्ति का हित विकास की कसौटी है। ये उनका प्रयोग था, और जब कभी गड़बड़ी हुई प्रयोग में तो उन्होंने माना कि ये तरीका गलत था। गांधी जी की प्रमाणिकता के पाठ को हमें आज से शुरू करना चाहिए।  डॉ. हेडगेवार जी ने कहा था गांधीजी के जीवन का अनुसरण करना चाहिये, सिर्फ स्मरण नहीं। उन्होंने आगे कहा कि क्या ये नहीं बताया जाना चाहिये कि ये हमारे पक्ष का है और ये विपक्ष का। शिक्षा में सत्यपरकता होनी चाहिये।

सरसंघचालक जी ने कहा कि पर्याप्त प्रमाणिक होने के लिए बूंद-बूंद का प्रयास करना होगा खासकर नई पीढ़ी को। परिस्थितियां बदलेंगी, मुझे उम्मीद है की सारा रंग एक होगा। उन्होंने कहा कि गांधीजी के आन्दोलन में गड़बड़ी होती थी तो वह प्रायश्चित करते थे। आज के आन्दोलन में कोई प्रायश्चित लेने वाला नहीं है।

डॉ. मोहन भागवत ने कहा गांधी जी को मिली परिस्थिति और जो समाज मिला तब उसके अनुसार उन्होंने सोचा, आज जो परिस्थिति है वैसा सोचना होगा। उन्होंने कहा गांधी जी की सत्यनिष्ठा निर्विवाद है। जो उनका बड़ा विरोध करने वाला है वह भी उन पर सवाल नहीं उठा सकता। गांधी जी की विचार की दृष्टि का मूल शुद्ध भारतीयता था, इसलिए उन्हें अपने हिंदू होने पर कभी लज्जा महसूस नहीं हुई। उन्होंने स्वयं को शुद्ध सनातनी हिंदू बताया। उनका विचार था अपनी श्रद्धा पर अडिग रहो और सभी धर्मो का सम्मान करो।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए जाने माने संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्यप ने कहा कि राजपूत जी ने गांधी के जीवन का सार इस पुस्तक में रख दिया है। किताब के शीर्षक से ही पता चलता है कि लेखक मानते हैं कि गांधी जी अब भी प्रासंगिक और सामयिक हैं। पूरी पुस्तक सकारात्मक है। पुस्तक पढ़कर लगता है कि गांधी की महानता से कोई भी इनकार नहीं कर सकता। गांधी जी का पूरा जीवन महाभारत जैसा महाकाव्य था। जिसमें सबकुछ अच्छा बुरा पाया जा सकता है। गांधी जी वास्तव में महापुरुष थे। इस समय सबसे बड़ा संकट चारित्रिक ह्यास का है। सत्ता के लिए, सम्पदा के लिए औऱ सफलता के लिए हम कुछ भी करने के लिए तैयार हैं। अगर आज गांधी जी होते स्वच्छता से काफी प्रसन्न होते लेकिन अब वे प्रश्न करते कि ये स्वच्छता अभियान राजनीति में कब चलेगा ? गांधी जी कहते थे कि शिक्षा ऐसी हो जो मनुष्य का निर्माण करे।

इस मौके पर पुस्तक के लेखक प्रख्यात शिक्षाविद् प्रो. जगमोहन सिंह राजपूत ने कहा कि महात्मा गांधी पर बहुत लिखा गया है और आने वाले समय में बहुत लिखा जाएगा। गांधी का चिंतन बहुत बड़ा है। गांधी जी ने भारत की प्राचीन परंपरा में भाई चारा बंधुत्व के तत्व का अध्ययन किया। सत्य औऱ अहिंसा के मार्ग पर चलने का प्रण किया। गांधी जी महामानव थे। रंगभेद के बड़े संघर्ष में गांधी जी सफल हुए। आए अतिथियों का आभार किताब घर प्रकाशन के प्रबंधक सत्यव्रत शर्मा ने किया।

.. समाप्त।।

You may also like...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

five + one =