सिन्धी भाषा के विकास के लिए व्यवहार में आये भाषा – मोहनलाल छीपा

सिन्धी भाषा के विकास के लिए व्यवहार में आये भाषा – मोहनलाल छीपा

Jhulelalविसंके जयपुर, 31 दिसम्बर। सिन्धी भाषा का विकास जब अच्छे तरीके से हो पायेगा जब सिन्धी भाषा प्रत्येक सिन्धी परिवार में बोली जाये और प्रत्येक परिवार के व्यवहार में आये यह कहना था अटल बिहारी हिन्दी विश्वविद्यालय भोपाल के कुलपति डॉ. मोहनलाल छीपा का वह भारतीय सिन्धु सभा, राजस्थान द्वारा आयोजित सिन्धी संस्कृति और भाषा के लिए प्रदेश में निकाली गई सात रथ यात्राओं के समापन पर जयपुर के कृषि अनुसंधान केन्द्र में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में बोल रहे थे।

डॉ. छीपा ने कहा की समाज के बन्धु भाषा के साथ साथ अपनी संस्कृति, परम्पराएं, अपने खान-पान, पहनावे पर भी ध्यान दे तो युवा पीढी कुछ ग्रहण कर पायेगी। उन्होनें कहा की भाषा के संवर्धन के लिए हमें युवाआें को प्रेरित करना पडेगा। ऐसे सिन्धी केन्द्रों की स्थापना होनी चाहिये जिसमें सिन्धी संस्कृति की सम्पूर्ण जानकारी एक स्थान पर उपलब्ध हो सके। उन्होनें सिन्धी भाषा के शिक्षको से भी आह्वान किया की उन्हें भी सिन्धी भाषा के संवर्धन के लिए आगे आना होगा।

भारतीय सिन्धु सभा के मार्गदर्शक एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षे़त्र बौद्धिक प्रमुख कैलाशचन्द ने कहा की हमें अपने देश के गौरवशाली अतीत से जुडना है तो हमें अपने आपको सिद्ध करना होगा। समय समय पर समाज के लिए कोई भी कीमत देने के लिए तैयार रहना पडेगा और अच्छी शुरूआत के लिए अपने मन को तैयार करना होगा।

12कार्यक्रम में भीलवाडा पूज्य संत हंसराम उदासीन जी,अमरापुरा आश्रम के पूज्य संत नन्दलाल जी, राजस्थान सिन्धी अकादमी के अध्यक्ष हरीश राजानी, सिन्धु सभा के अध्यक्ष लेखराज माधू, मोहन वाधवानी सहित समाज के प्रबु़द्ध जन एवं मातृशक्ति इस अवसर पर उपस्थित थे।

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