सोशल मीडिया की ख्याती प्राप्त हस्तियां जयपुर में

विश्व संवाद केन्द्र द्वारा सोशल मीडिया कॉन्क्लेव का आयोजन

विश्व संवाद केन्द्र द्वारा सोशल मीडिया कॉन्क्लेव का आयोजन

विश्व संवाद केन्द्र द्वारा सोशल मीडिया कॉन्क्लेव का आयोजन

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विसंके जयपुर, 25 जून। विश्व संवाद केन्द्र जयपुर की ओर से रविवार को सोशल मीडिया पर कांन्क्लेव का आयोजन किया गया। कांन्क्लेव में सोशल मीडिया के ख्यातनाम लोगों ने सोशल मीडिया से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। जयपुर में यह पहला आयोजन था। इसमें ं प्रसिद्ध पत्रकार एवं लेखक हिंडौल सेन गुप्ता और प्रसिद्ध लेखिका शैफाली वैद्य ने सोशल मीडिया की बारीकियों से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर कुछ भी भेजने से पहले रीड बिफोर यू ट्वीट, उसे पूरा ध्यानपूर्व क पढ़ें, उसकी सच्चाई को समझें उसके बाद ही तत्थ्यात्मक रूप से उसकी प्रतिक्रिया दें। कान्क्लेव में राजस्थान से सोशल मीडिया पर एक्टिव रहने वाले चुनिंदा 170 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।

हिंडौल सेन गुप्ता ने कहा कि प्रश्न उत्तर के माध्यम से संतुष्टि की परम्परा भारत में प्रारंभ से ही है। आज कतिपय पत्रकार जानबूझकर गलत व भ्रामक समाचार दिखाते है। एक प्रसिद्ध पत्रकार सीरिया के नाम पर कश्मीर के फोटो दिखाते है अथवा दूसरा पत्रकार स्वामी विवेकानंद को सबसे खराब व्यक्ति के रूप में प्रस्तुत करता है। ऐसे समाचारों के प्रति हमें तथ्यात्मक प्रतिक्रिया करके सच्चाई बतानी चाहिए।

उन्होंने नकारात्मक, उग्र, गाली गलोच या अभद्र टिप्पणी करने के बजाय सकारात्मक प्रतिक्रिया पर जोर दिया। यदि कोई व्यक्ति स्वामी विवेकानंद को सबसे बुरा व्यक्ति बताते हुए पुस्तक लिखता है तो हमें उनकी सच्चाई बताते हुए 10 पुस्तकें लिखनी चाहिए। यदि कोई अकबर जोधा फिल्म बनाकार भारतीय इतिहास का गलत चित्रण करता है तो हमें सच्चाई बताते हुए 5 फिल्में इनकी सच्चाई बतानी चाहिए। हम जन, धन, बल किसी भी रूप में कम नहीं है आवश्यकता है संगठित होकर प्रतिक्रिया देनी चाहिए।

पूणे महाराष्ट की प्रसिद्ध लेखिका शैफाली वैद्य ने कहा कि किसी भी संदेश की प्रतिक्रिया तुरंत न देकर थोड़ी देर प्रतिक्षा करनी चाहिए। संदेश को ध्यान पढ़कर यदि कोई गलत या भ्रामक है तो उसकी वास्तविकता का पता लगावें, फिर शांत भाव से अपनी बात सच्चाई बताते हुए लिखें। उन्होंने पुरजोर रूप से भाषा पर नियंत्रण करने, अभद्र गाली गलौच की भाषा नहीं अपनाने की सलाह दी।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में सोशल मीडिया को आवश्यक बताते हुए कहा कि हमें इसकी सभी विधाओं की जानकारी होनी चाहिए। उन्होंने रिएक्ट करने के बजाय रिस्पोंड करने की सलाह दी। लेकिन आवश्यकता होने पर आक्रामक प्रतिक्रिया हो सकती है, किंतु वह सभ्य भाषा में हो।

सुश्री अद्वैता काला ने तीसरे सत्र में केरल में संघ विचार के कार्यकर्ताओं की जघन्य हत्याओं पर चिन्ता व्यक्त की। उन्होने कहा कि अब मीडिया ने भी वहां वाम पंथियों द्वारा की जा रही हिंसा को दिखाना शुरू कर दिया है। हमेंं भी सोशल मीडिया के माध्यम से इस सच को देश भर के समाज के समक्ष लाना चाहिये।

अंतिम सत्र में अंजिक्या कुलकर्णी ने सोशल मीडिया के तकनीकी भाग पर प्रकाश डालते हुये बताया कि उपयोगकर्ताओं द्वारा किस प्रकार इस माध्यम का अधिकतम उपयोग किया जा सकता है। वक्ताओं ने अपने सत्र के अंत में प्रतिभागियों के सवालों का जवाब देते हुये विभिन्न मुद्दों पर चर्चा भी की। कार्यशाला के अंत में विश्व संवाद केन्द्र के सचिव श्री राकेश वर्मा ने वक्ताओं, पत्रकारों, प्रबन्धकों, ओ.टी.एस. प्रशासन आदि का धन्यवाद ज्ञापित किया ।

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