हिन्दुस्तान को बर्बाद करने के प्रयास सालों से- मोनिका अरोडा

-जयपुर में ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता’ विषय पर व्याख्यान 

जयपुर, 21 मार्च। शैक्षिक मंथन संस्थान, जयपुर का सोमवार को c7d09558-b119-4b4f-bd52-2522e291a3a6जयपुर में ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता’ विषयक व्याख्यान कार्यक्रम आयोजित हुआ। जेएलएन मार्ग स्थित इंदिरा गांधी पंचायतीराज संस्थान में हुए इस व्याख्यान कार्यक्रम के मुख्य वक्ता सर्वोच्च न्यायालय की अधिवक्ता एवं दिल्ली विश्वविद्यालय की पूर्व अध्यक्ष मोनिका अरो  डा जी थी। अध्यक्षता शैक्षिक मंथन संस्थान के अध्यक्ष डाॅ.विमलप्रसाद अग्रवाल जी ने की। इस अवसर पर मंच पर राजस्थान विश्वविद्यालय के कुलपति श्री जे.पी. सिंघल भी उपस्थित थे। DSC00011

कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए मोनिका अरोडा जी कहा कि हिन्दुस्तान को बर्बाद और बदनाम करने के प्रयास आज से नहीं बल्कि आजादी के साथ से ही चल रहे हैं। सालों से देश के बाहर से पैसा आता रहा है जिसका उपयोग हिन्दुस्तान के खिलाफ बोलने और इसे बर्बाद करने में किया जाता रहा है। जब से केन्द्र में भाजपा सरकार आई है तब से उसने इस पर अंकुश लगाया है। एनजीओ को बाहर से मिलनेवाली फंडिंग पर अंकुश लगाया गया। ऐसे करते ही करोडों का अनुदान पानेवाले एनजीओ विचलित हो गये हैं। ‘असहिष्णुता’, ‘अभिव्यक्ति की आजादी’ आदि बेतुकी मुद्दों पर हो-हल्ला इसी का परिणाम है।
उन्होंने कहा कि हिन्दुस्तान को बर्बाद करनेवालों के खिलाफ केन्द्र सरकार तो अपना काम कर ही रही है हम भी अपना गिलहरी प्रयास जारी रखे। सोशल मीडिया आदि के माध्यम से आस-पास समाज को जागरूक करने का प्रयास करते रहें। अगर हम ऐसा कर सके तो देश के विरुद्ध काम करनेवालों के खिलाफ हम क्रांति ला सकने में सफल होंगे।

सुर बदले
जेएनयू में लगे देश विरोधी नारों के मामले में बोलते हुये मोनिका अरोडा ने कहा कि कन्हैया भगतसिंह की तरह जेल से बाहर नहीं आया है न्यायालय की भयंकर डाट खाकर बाहर आया है। जेल से बाहर आते ही उसके सुर बदले है। अब तक भारत से आजादी की बात करनेवाले अब भारत में आजादी की बात करने लगे हैं। उन्होंने देश विरोधी बात की बजाय संघ विरोधी बात करना शुरू कर दिया है। ये लोग अब राष्ट्र विरोध से हिन्दू विरोध पर तो आ गये है लेकिन इन्हें मालूम नहीं कि हिन्दू विरोध भी तो एक अपराध बनता है। कन्हैया को चेतावनी देकर छोडना केवल न्यायालय का एन्टिवाइटिक प्रयास था। आवश्यकता पडने पर न्यायालय ‘सर्जरी’ भी करेगा और ‘हाथ-पांव’ भी काटने पडे. तो वह भी करेगा।

मिलकर प्रयास करने की आवश्यकता
श्री जे.पी. सिंघल ने कहा कि निश्चित सीमाओं में रहकर व्यक्ति अपनी बात को कहने का हक रखता है। सविधान में तय बातों का ध्यान रखते हुये व्यक्ति अपनी स्वतंत्रता की बात कह सकता है लेकिन पिछले दिनों देश में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर जो हुआ वह निश्चित ही निंदनीय है। देश में रहकर भारत माता के खिलाफ बात करने की बात भारत की एकता अखण्डता के लिए खतरा है। भारत को तोडने के प्रयास में लगे लोगों के खिलाफ हम सबको मिलकर प्रयास करने की आवश्यकता है। इस देशहित के कार्य में हम सब लगे।

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