हिन्दू लड़की को न्यायाधीश ने कुरान बांटने का दिया आदेश, क्या यही न्याय है सेकुलर भारत की न्यायपालिका का!

झारखंड 15 जुलाई 2019। ये भारत है। यहां आये दिन बताया जाता है कि यहाँ धर्म नहीं बल्कि कानून का राज चलेगा। भगवान् श्रीराम की जन्मभूमि अयोध्या में है। इसको साबित करने के लिए भी कानूनी दांवपेंच खेले जा रहे हैं, लेकिन उसी भारत के सेक्युलर न्यायपालिका ने अब दिया है ऐसा फैसला जो किसी के भी गले एक बार नहीं उतर रहा सिवाय उस समूह के जो सेकुलरिज्म के नाम पर हिन्दू का विरोध और हिन्दू का दमन अपना जन्मजात अधिकार समझते हैं। मामला झारखंड के रांची से है। यहाँ सोशल मीडिया पर गैर कानूनी पोस्ट करने वाली लड़की को इस शर्त पर जमानत दी गई है कि वो कुरआन बांटेगी। कथित आरोपित रिचा के खिलाफ पिठौरिया के सदर अंजुमन कमेटी के मंसूर खलीफा ने एफआईआर दर्ज कराई थी। मंसूर खलीफा ने रिचा पर आरोप लगाते हुए कहा था कि उन्होंने मुस्लिम समुदाय के लोगों को ठेस पहुंचाई है। मंसूर खलीफा के मुताबिक रिचा कई दिन से सोशल मीडिया पर धर्म के प्रति आलोचनात्मक मैसेज भेज रही थी और आपसी सौहार्द्र बिगाड़ने की कोशिश कर रही थी। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए रिचा को गिरफ्तार कर लिया था। यद्दपि अभिव्यक्ति की आजादी की बात करने वालों ने इस मामले में एक भी शब्द नहीं बोला जबकि वो भारत विरोधी बयानों और नारों को अपना हक बताया करते हैं। कोर्ट ने लड़की को जमानत इस शर्त पर दी कि वो मुस्लिमों की धार्मिक किताब कुरआन की प्रतियां लाइब्रेरी और पिठौरिया की अंजुमन कमेटी को देगीं। झारखण्ड की अदालत के इस अजीबोगरीब फैसले की हर तरफ आलोचना हो रही है। ये अजीब और एकदम नया फैसला देने वाले न्यायिक मैजिस्ट्रेट मनीष सिंह ने आरोपी रिचा भारती को जमानत दे दी और कहा कि वह कुरान की एक कॉपी अंजुमन इस्लामिया कमिटी और 4 अन्य कापियां विभिन्न स्कूलों और कॉलेजों को दान करें। रिचा के वकील रामप्रवेश सिंह ने कहा, ‘अदालत ने सशर्त जमानत दी है। इसके तहत रिचा को प्रशासन की मौजूदगी में अंजुमन इस्लामिया को कुरान की एक प्रति सौंपनी होगी और उसकी रशीद लेनी होगी।’

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