भारतीय काल गणना वैज्ञानिक आधार पर खरी उतरती है- दुर्गादास

DSC_0211जयपुर, 22 मार्च । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र प्रचारक दुर्गादास ने कहा कि भारतीय काल गणना दुनियां की सबसे प्राचीनतम है और वैज्ञानिक आधार पर खरी उतरती है। इसकी शुरूआत सृष्टि के आरंभ से ही होती है। वे रविवार को विश्व संवाद केन्द्र की ओर से नववर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित पत्रकार स्नेह मिलन कार्यक्रम में बोल रहे थे।

उन्होंने कहा कि जब देश आजाद हुआ तो देश का कैलेंडर कौन सा हो इसका निर्धारण करने के लिए प्रसिद्ध वैज्ञानिक डॉ. मेघनाद साहा के नेतृत्व में एक समिति बनी थी। इस समिति ने कई कैलेंडरों का अध्ययन करने पर पाया कि भारतीय कालगणना के आधार पर निर्धारित कैलेंडर ही वैज्ञानिक और खगोलीय गणना पर खरे उतरते हैं। समिति के प्रतिवेदन पर शक संवत को संविधान ने अंगीकार किया। उन्होंने कहा कि भारतीय काल गणना पर आधारित सभी कैलेंडर की शुरूआत चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से ही होती है।

उन्होंने कहा कि भारतीय काल गणना के निर्धारण चन्द्रमा और पृथ्वी की गति में सामंजस्य बिठाकर किया जाता है। इसके अनुसार अमावस्या के दिन ही अंधेरी रात होती है और पूर्णिमा के दिन ही चन्द्रमा पूर्ण होता है। चन्द्रमा की कला में किस दिन कितनी वृद्धि होगी इसका उल्लेख भी स्पष्टता से किया जाता है। जबकि दुनियां के दूसरे कैलेंडर में इस प्रकार की जानकारी नहीं मिलती है।

उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी पाश्चात्य चकाचौंध में भारत वर्ष की श्रेष्ठ पंरपराओं को भूलकर बाहरी बातों को अपनाती जा रही है। अमेरिका और यूरोप के मापदंड को अपनाने के कारण युवाओं में भारतीय जीवन मूल्यों प्रति हीन भावनाएं आ रही है इसे रोकना होगा। उन्होंने कहा कि दुनियां की समास्याओं के समाधान का रास्ता भारतीय आध्यात्म मे ही है।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि केन्द्रीय सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने कहा कि आज सहिष्णुता कम होती जा रही है ऐसे में संवाद का महत्व बढ़ जाता है, संवाद में ही विवाद का अंत है। उन्होंने विश्व में बढ़ रही कट्टरता और आंतकवाद पर निशाना साधते हुए कहा कि आज लोगों पर विचार धाराएं थोपी जा रही है।

DSC_0219कार्यक्रम में अखिल भारतीय सह सेवा प्रमुख गुणवंतसिंह कोठारी, पाथेय कण के प्रधान  संपादक कन्हैयालाल चतुर्वेदी, भारतीय किसान संघ के प्रदेश महामंत्री बद्रीनारायण चौधरी समेत बड़ी संख्या में पत्रकार मौजूद थे।

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