चीन को सबक सिखाने के लिए चीनी सामानों का करें बहिष्कार—डॉ.भगवतीप्रकाश

विसंकेजयपुरunnamed-4
भरतपुर, 9 अक्टूबर। चीन आए दिन भारत के खिलाफ कुचक्र रच रहा है। भारत की उड़ी में पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों के खिलाफ सैन्य कार्यवाही के विरोध में पाकिस्तान के प्रति चीन ने अपनी मित्रता का प्रदर्शन किया। ऐसे में चीन को सबक सीखाना आवश्यक है। हम संकल्प लें कि चाहे हमें किसी भी वस्तु के उपभोग से वंचित रहना पड़े तो भी कोई चीनी उत्पाद नहीं खरीदेंगे। समाज में भी अभियान चला कर सभी देशवासियों से आग्रह करें कि वे भी कोई चीनी सामान नहीं खरीदें। यह बात रा.स्वयंसेवक संघ राजस्थान क्षेत्र के मा.संघचालक डॉ.भगवती प्रकाश जी ने कही। वे रविवार को भरतपुर में संवाददाताओं को संबोधित करते हुए बोल रहे थे।
श्री भगवतीप्रकाश जी ने कहा कि आजकल चीन कई वस्तुओं का उत्पादन भारत में ही कर रहा है। इसलिए उन पर ‘मेड इन इण्डिया’ भी लिखा होता है। लेनोवा, ओपो, हुवाई, क्जिोमी, एमआई 4, एल्काटेल, अमोई, बीबीके, कूलपेड, कबोट, जी 5, जियोनी, हेयर, हिसेन्स, कोन्का, मोटा, जेडटीई, लिईको, मैजु, वनप्लस, क्हु 360 आदि चीनी ब्राण्डों की पहचान चीनी सामानों व मोबाइल फोनों के ब्राण्डों के रूप में हुई है। इसलिए इन ब्राण्डों एवं अन्य भी चीनी उत्पादों का बहिष्कार करना चाहिए।
उनका यह भी कहना था—
—1962 में चीन ने भारत पर आक्रमण कर 38000 वर्ग किलोमीटर भूमि पर जबरदस्ती कब्जा कर लिया। इसके बाद 1963 में हमारे शत्रु पाकिस्तान ने पाक अधिकृत कश्मीर की 5183 वर्ग किलोमीटर भूमि चीन की और दे दी।
—पाक अधिकृत जम्मू कश्मीर का 68 हजार वर्ग किमी. वाले भू-भाग में आज चीन अनेक सैन्य निर्माण कर रहा है। वहाँ से वह अपने राजमार्ग निकाल रहा है। भारत के कठोर विरोध के उपरान्त पर भी चीन वहाँ अपनी उपस्थिति बढ़ाता ही जा रहा है।
—भारत के आर्थिक हितों को हानि पहुंचाने के लिए चीन ने अफ्रिका में मेड इन इण्डिया ब्राण्ड की वस्तुएं विशेष कर दवाईयाँ भी प्रवेश कराने का दुस्साहस किया था। इसका स्पष्ट उद्देश्य अफ्रिका में भारतीय वस्तुओं को बदनाम करना था।
—पाँच वर्ष पूर्व चीन ने भारत के सूती वस्त्र उद्योग को चैपट करने के लिए देश में उत्पन्न अधिकांश कपास अत्यन्त ऊँचे दाम पर खरीद लिया था। जब देश में कपास का मूल्य 4000/- रूपये क्विटल था तब उसने 7000/- रूपये प्रति क्विंटल खरीद कर भारतीय वस्त्र उद्योग को चैपट करने का प्रयत्न किया था।
—आज देश में अनेक उद्योग चीन से बढ़ रहे आयातों के कारण बन्द हो चुके है और बड़ी संख्या में और भी उद्योग बन्द होने को है। इनमें विद्युत साज सामान, बल्ब उद्योग, टायर उद्योग, मोबाईल फोन, स्मार्टफोन उद्योग, इलेक्ट्रोनिक साजसामान के उद्योग, पेन आदि स्टेशनरी सामानों के उद्योग, खिलौना उद्योग, औषधी उत्पादन उद्योग आदि है।
—चीन आज अरूणाचल प्रदेश सहित देश की 90,000 वर्ग किलोमीटर भूमि पर अपना दावा जता कर सीमा चैकियाँ आगे बढ़ाते हुए घुसपैठ करके हमारे निर्माण कार्यों में बाधा डाल रहा है।
—चीन द्वारा जम्मू-कश्मीर को अपने नक्शों में भारत का अंग नहीं दिखाया जाता है। अरूणाचल प्रदेश को चीन का अंग दिखाकर वहाँ के नागरिकों को बिना पासपोर्ट वीजा के चीन आने का आमन्त्रण दिया जाता है।
—पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा अरूणाचल को ‘‘हमारा सूरज का प्रदेश’’ कहने पर चीन द्वारा हमारी महिला राजदूत को रात्रि 2 बजे उठाकर कड़ा विरोध व्यक्त करते हुए चेतावनी दी थी और मनमोहन सिंह के अरूणाचल के हमारे तवांग जिले में प्रवेश के विरूद्ध चेतावनी दे दी थी। और तब वे वहाँ नहीं गये।
—चीन ने आणविक आपूर्ति समूह ;छनबसमंत ैनचचसपमत ळतवनचद्ध में भारत के प्रवेश पर आपत्ति करते हुए यह शर्त लगा दी है कि पाकिस्तान जैसे आतंकवादी देश को जबतक इस समूह में प्रवेश नहीं मिलेगा तब तक वह भारत को भी इसमें प्रवेश नहीं लेने देगा।
—चीन ने हमें आहत करने हेतु लश्कर-ए-तोयबा के आतंकवादी व जैश-ए-मोहम्मद के संस्थापक मसूद अजहर को अन्तर्राष्ट्रीय आतंकवादी घोषित करने के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ में प्रस्तुत भारत के प्रस्ताव का 3 बार विरोध किया।
—भारत की उड़ी में पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों के विरूद्ध सैन्य कार्यवाही के विरोध में पाकिस्तान के प्रति अपनी मित्रता का प्रदर्शन करते हुये चीन ने जेंगबो नामक ब्रह्मपुत्र की सहायक नदी का पानी अवरूद्ध कर भारत को परोक्ष में यह चेतावनी दी है कि भारत द्वारा पाकिस्तान के विरूद्ध आतंकवाद विरोधी कार्यवाही करने पर या सिन्धु नदी के जल से वंचित करने पर वह ब्रह्मपुत्र नदी के जल से भारत को वंचित कर देगा। चीन तिब्बत में ब्रह्मपुत्र नदी की उपरोक्त सहायक नदी का पानी रोकने के लिये ही वहाँ एक हाईड्रोप्रोजेक्ट लगा रहा है। भारत क लिए यह भारी चिंता की बात है क्योंकि चीन के इस कदम से भारत समेत कई देशों में ब्रह्मपुत्र के पानी के बहाव पर असर पड़ सकता है। इससे भारत की 10 करोड़ से अधिक जनसंख्या को जल संकट का सामना करना पड़ सकता है।
—चीन ने यह काम ऐसे वक्त में किया है जब उड़ी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान से सिन्धुजल समझौते के तहत होने वाली बैठक रद्द कर दी थी। साथ ही इस समझौते की समीक्षा करने का भी फैसला किया था। भारत ने यह निर्णय पाक पर आतंकवाद को बढ़ावा देने के विरूद्ध दबाव बनाने के लिए किया था। ऐसे में चीन का यह कदम पाकिस्तान के साथ मिलकर उल्टा भारत पर दबाव बढ़ाने की धमकी के रूप में उपयोग कर रहा है। तिब्बत में यारलुंग जेंगबो नाम से जानी जाने वाली ब्रम्हपुत्र की एक सहायक नदी पर चीन ने इस प्रोजेक्ट पर करीब 750 मिलियन यूएस डाॅलर का निवेश किया है। यह प्रोजेक्ट तिब्बत के जाइगस में है। यह जगह सिक्किम के नजदीक पड़ता है। जाइगस से ही ब्रह्मपुत्र नदी अरूणाचल प्रदेश में बहते हुए दाखिल होती है।
—चीन अपने इस अत्यन्त महंगें प्रोजेक्ट को 2019 में पूरा कर लेना चाहता है। यह पानी रोकने से भारत और बांग्लादेश जैसे देशों में ब्रह्मपुत्र के बहाव पर व्यापक असर पड़ेगा पिछले वर्ष भी चीन ने तिब्बत में ब्रह्मपुत्र में डेढ़ बिलियन की लागत वाला सबसे बड़ा हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट शुरू किया था। इस पर भी भारत ने चिंता जताई थी। लेकिन, चीन ने इसकी अनदेखी कर दी है। चीन की 12वीं पंचवर्षीय योजना से इस बात के संकेत मिलते हैं कि तिब्बत के स्वायत क्षेत्र में चीन तीन और हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट केवल भारत का जल हड़पने के लिये लाने वाला है। इससे सम्पूर्ण पूर्वोत्तर में गम्भीर जल संकट पैदा होगा और चीन इन बांधों का पानी कभी भी छोड़कर पूर्वाेत्तर में जल संकट खड़ा कर सकेगा।
—चीन वर्ष में 300-450 बार भारतीय सीमा में घुसपैठ करता है।
—चीन ने भारतीय सीमा पर परमाणु मिसाइलें तैनात कर दी है जिनके मारक क्षेत्र में सम्पूर्ण भारत आता है।
—भारत की चारों ओर से घेराबन्दी की दृष्टि से चीन ने पाकिस्तान (ग्वादर बंदरगाह), नेपाल, म्यांमार, बांग्लादेश (चटगांव बंदरगाह) एवं श्रीलंका में सैन्य गतिविधियों का विस्तार करता रहा है।
—हमारे देश के अतिसंवेदनशील स्थानों पर विविध परियोजनाओं में निर्माण के ठेके अत्यन्त कम दरों पर भरकर देश के अन्दर चीन अपनी उपस्थिति एवं गतिविधियाँ बढ़ा रहा है।
—चीन ने दैनिक उपयोग की लगभग प्रत्येक घटिया वस्तु को भारत के बाजारों में सस्ते मूल्य में पहुंचा कर स्थानीय उद्योगों को बन्द कराने की स्थिति में पहुंचा दिया है। (चीन से भारत को आयात लगभग 4.5 लाख करोड़ रूपये वार्षिक तो घोषित है और बिना बिल का या अल्प मूल्य के बिल से आ रहे सामान को जोड़ देवें तो यह राशि 7 लाख करोड़ रूपये वार्षिक तक पहुँच सकती है। क्या हमें चीन जैसे हमारे साथ शत्रुतापूर्ण कार्यवाही करने वाले देश का इतना माल खरीद कर उसका 6-7 लाख करोड़ का आर्थिक सशक्तिकरण करना चाहिये? यदि इस पर न्यूनतम 10 प्रतिशत भी कर (टेक्स) की राशि चीन की सरकार को जाती है तो हम भारत में रहते हुये अपने शत्रु देश की सरकार को 60-70 हजार करोड़ रूपये की कर अर्थात टेक्स की आय में योगदान दे रहे हैं इसलिये हमें तत्काल ही चीनी वस्तुओं का क्रय करना बन्द करना चाहिये। आज हमारे लिये राजस्व संकट के चलते थल सेना के बारम्बार आग्रह के बाद भी भारत-तिब्बत सीमा के लिये पर्वतीय आक्रामक सेना को शस्त्र सज्जित करने में कठिनाई आ रही है। यदि यह चीनी माल खरीदना बन्द कर देवें तो यह 60-70 हजार करोड़ रूपये चीनी सरकार के हाथ पड़ने से रूक सकेगा। दूसरी ओर यही माल हम भारतीय खरीदेंगे तो देश की सरकार को इस माल का 16 प्रतिशत की दर से 1 लाख करोड़ से अधिक का कर राजस्व मिलेगा। हमारे लिये पर्वतीय आक्रामक सेना के लिये कुल ही 60,000 करोड़ रूपये मात्र की और आवश्यकता है।
—चीन का रक्षा बजट 200 अरब डालर है जबकि भारत का रक्षा बजट मात्र 40 अरब डालर है। इसे हम भारतीय माल खरीद कर अपना कर राजस्व बढ़ा कर ही बढ़ा सकेंगे।
—14 अप्रेल, 2013 की रात्रि में बिना किन्ही टेंकों या तोपखाने के 40 चीनी सैनिकों ने हमारी सीमा में 19 किमी. तक घुसपैठ कर दौलत बेग ओल्डी में तम्बु गाड़ दिये। भारत सरकार उन्हें बाहर धकेलने के स्थान पर उनसे ब्लेकमेल होती चली गयी और उन्हें बाहर जाने को मनाने के लिये हमारे द्वारा अपनी ही सीमा में अपनी सेना को सीमा में 38 किमी. पीछे लेना पड़ा और हमारी सीमा में अपनी रक्षा संरचनाएँ यथा सेना के बंकर आदि अपने ही हाथों से तोड़ने पड़े थे।

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