संघ समता युक्त-शोषण मुक्त समाज एवं अहंकार व स्वार्थ मुक्त व्यवस्था बनाने में लगा है – डॉ. मोहन भागवत

जयपुर (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि संघ संस्थापक डॉ. हेडगेवार जी जन्मजात देशभक्त थे. उनको लगा कि हमारे समाज का परिवर्तन या देश को स्वतन्त्रता सिर्फ सरकारों या नारों के माध्यम से नहीं मिलेगी तथा स्वतन्त्रता का लाभ तभी मिलेगा, जब हमारा समाज एकजुट होगा. इस उद्देश्य को लेकर उन्होंने सन् 1925 में संघ की स्थापना की और शाखा के माध्यम से व्यक्ति निर्माण व समाज सेवा के कार्यों द्वारा समाज को एकजुट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. तब से लेकर अब तक संघ के स्वयंसेवक डॉ. हेडगेवार जी के बताए हुए मार्ग पर चलते हुए, 1,30,000 से अधिक सेवा कार्य पूरे भारतवर्ष में चला रहे हैं. सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी उत्तराखंड प्रवास के दौरान देहरादून में प्रदेश के लोक संस्कृति एवं साहित्य से जुड़े पुरोधाओं के साथ बातचीत कर रहे थे.

उन्होंने कहा कि 40 देशों में विभिन्न संस्थाओं के माध्यम से हमारे स्वयंसेवक कार्य कर रहे हैं. साहित्य के क्षेत्र में अखिल भारतीय साहित्य परिषद महत्वपूर्ण कार्य कर रही है. और यह आवश्यक भी है, क्योंकि उत्कृष्ट साहित्य मानव निर्माण के लिए महत्वपूर्ण होता है, उसे उन्नत बनाता है. साहित्य राष्ट्र को आगे बढ़ाने की धुरी होना चाहिए.

वर्तमान परिस्थितियों में भारतीय परिवारों में संस्कारों की चर्चा करते हुए, कहा कि संघ के स्वयंसेवक कुटुम्ब प्रबोधन के माध्यम से परिवारों में प्रबोधन का अच्छा कार्य कर रहे हैं. किन्तु आज आवश्यकता इस बात की है कि लोग भी संयुक्त परिवार व्यवस्था की ओर आगे बढ़ें. क्योंकि सबसे प्रबल और प्रभावी संस्कार परिवार के नाना-नानी अथवा दादा-दादी ही दे सकते हैं. प्रत्येक परिवार, कुटुम्ब को चाहिए कि वे सप्ताह में एक दिन अपने पूर्वजों की और राष्ट्र के महापुरुषों की चर्चा करें. हम प्रयास ये करें कि अपने घर की चौखट के अंदर अपनी मातृभाषा में बात करें.

गांव को मजबूत बनाने की दृष्टि से उन्होंने कुछ समृद्ध गाँवों के उदाहरण देते हुए कहा कि हम लोग भी अपने अपने गांव में सप्ताह में एक बार एकत्रित होकर गांव की चौपाल में बैठें और वहां हम विचार करें कि हमारे जल, जंगल और जमीन, जो हमारा वास्तविक धन हैं, हम इनको समृद्ध बनाने के लिए एवं इसकी सुरक्षा करने के लिए मिलकर काम करें, श्रमदान करें. अपने गांव में पानी के लिए कुएं, छोटे बांध, जितने हम स्वयं अपनी हैसियत से मिलकर बना सकते हैं, वह बनाएं और अपना कार्य खुद करके अपने गांव को खुशहाल बनाएं. ऐसा करके भारत में बहुत से गांव समृद्ध हो चुके हैं. गांव समृद्ध होगा, तभी हमारा राष्ट्र भी वास्तव में समृद्ध हो पाएगा.

उन्होंने कहा कि हमारे समाज को भी राष्ट्र को ही सर्वोच्च मानकर व्यक्तिगत चरित्र और व्यक्तिगत आकांक्षाओं से ऊपर उठकर राष्ट्र के उत्थान के लिए राष्ट्रीय चरित्र को महत्व देकर सामूहिक रूप से आगे बढ़ना होगा. सरसंघचालक जी ने कहा कि संघ समता युक्त – शोषण मुक्त हिन्दू समाज तथा अहंकार एवं स्वार्थ मुक्त व्यवस्था बनाने के कार्य में लगा है.

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