षड्यंत्र – भारत विखंडन का

षड्यंत्र – भारत विखंडन का 
षड्यंत्र - भारत विखंडन का

षड्यंत्र – भारत विखंडन का

श्री राजीव मल्होत्रा व श्री अरविन्दन नीलकंदन द्वारा लिखित एवं Amaryclis द्वारा प्रकाशित पुस्तक “Breaking India” के सार के रूप में श्री मोरेश्वर जोशी द्वारा लिखित यह छोटी सी पुस्तक दिल दहला देने वाले षड्यंत्रों को उजागर कर रही है। पुस्तक का मुख्य विषय भारत को भीतर व बाहर से तोड़ने वाले षड्यंत्रों को उजागर करना है। पुस्तक में यह बताया गया है कि किस प्रकार विश्व के तीन विरोधी विचारधारा वाले आतंकी संगठन इस्लामिक जिहाद, माओवाद एवं ईसाई मिशनरीज इस देश में एक साथ मिलकर भारत को तोड़ने के सपने देख रहे हैं। यह सच्चाई वाकई दिल दहला देने वाली है। पुस्तक इस सच्चाई को भी उजागर करती है कि किस प्रकार स्वतंत्रता से पहले एवं बाद में इन तीनों आतंकी संगठनों ने योजनाबद्ध तरीके से भारत के पूरे भीतरी तंत्र पर अपना कब्जा जमा लिया है। चाहे वह शिक्षा के माध्यम से देश के विश्वविद्यालयों में छात्रों को अलगाववाद की शिक्षा देना हो, चाहे मीडिया में घुसपैठ कर सच्चाई को छुपाने अथवा तोड मरोड़ कर मनचाही खबरों को चलाने की कोशिश हो, अथवा राजनीतिक दलों के साथ मिलकर या स्वयं अपने दल बना कर देश की कानून व्यवस्था को कमजोर करने का षड्यंत्र हो। यहां तक की देश की बाह्य एवं आंतरिक सुरक्षा तक में घुसपैठ की कोशिश की जा रही है। यह पुस्तक ईसाई मिशनरियों, अलगाववाद की वामपंथ विचारधारा, इस्लामिक आतंकवाद एवं देश के अलग-अलग राजनीतिक दलों द्वारा इनके तुष्टिकरण के षड्यंत्रों को उजागर करती प्रतीत होती है। पुस्तक में बहुत बारीकी से इन मुद्दों पर प्रकाश डाला है। मुख्यत: पुस्तक में देखने वाली बात यह भी है कि इसमें संविधान निर्माता बाबा साहेब अंबेडकर द्वारा संविधान सभा के अपने भाषण में इस पर चिंता व्यक्त करते बताया गया है जो सच आज तक हमसे छुपाया गया।

एक कमी यह रह गई कि तथ्यों का थोड़ा अभाव रहा इस पुस्तक में। शायद मूल पुस्तक “Breaking India” में पहले ही इस पर विस्तार से चर्चा होने के कारण एवं केवल सार प्रस्तुत करने के अपने मंतव्य के कारण लेखक ने इस ओर अधिक ध्यान न दिया हो। परंतु फिर भी कई स्थानों पर तथ्यों का अभाव महसूस हुआ।
बहरहाल, सार के रूप में प्रस्तुत यह पुस्तक केवल पचास पन्नों में भयंकर षड्यंत्रों का पर्दाफाश करने वाली है। जो लोग”Breaking India” जैसी बड़ी पुस्तक पूरी पढ़ने में असमर्थ हैं उन्हें यह छोटी सी पुस्तिका अवश्य पढ़नी चाहिए। पुस्तक का मूल्य भी केवल बीस रुपए रखा गया है। ऐसे में यह प्रत्येक पाठक के लिए सुलभ है।

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