हम सर्वोत्तम पुरूषार्थ प्रस्तुत करने का प्रयास कर रहे हैं

व्यक्ति, परिवार (कुटुम्ब), समाज मिलकर एक विशाल इकाई बनती है, ‘वसुधैव कुटुम्बकम’. दीनदयाल शोध संस्थान वसुधैव कुटुम्बकम की भावना से ही अपने प्रकल्पों के माध्यम से सतत प्रयत्नशील है. संस्थान की प्रबन्ध समिति एवं साधारण सभा की दो द्विवसीय (29-30 जुलाई 2018) वार्षिक बैठक योजनानुसार इस बार चित्रकूट में आयोजित है. बैठक के प्रथम दिन प्रातः 10.00 बजे से प्रबन्ध समिति के सदस्यों की बैठक संस्थान के आरोग्यधाम स्थित सभागार में देवार्चन, दीप प्रज्जवलन एवं दोनों महापुरूषों क्रमशः पं. दीनदयाल उपाध्याय एवं राष्ट्रऋषि नानाजी के चित्रों पर पुष्पार्चन के साथ हुई. जिसमें संस्थान के विविध प्रकल्पों के कार्यों के बारे में चर्चा हुई.

प्रबन्ध समिति एवं साधारण सभा की बैठक के प्रथम दिन के द्वितीय सत्र के बाद साधारण सभा के सदस्यों की उपस्थिति में दो द्विवसीय बैठक के सभी सत्र संस्थान के उद्यमिता विद्यापीठ स्थित लोहिया सभागार में सम्पन्न हुए. साधारण सभा की बैठक का शुभारम्भ अपरान्ह 3.00 बजे से हुआ. जिसमें देवार्चन के बाद संस्थान के प्रबन्ध समिति एवं साधारण सभा की विगत वर्ष इन्दौर में सम्पन्न हुई बैठक के बिन्दुओं का वाचन संस्थान के महाप्रबन्धक अमिताभ वशिष्ट जी ने किया. प्रबन्ध समिति एवं साधारण सभा के सभी सम्मानित सदस्यों ने ‘ऊँ’ के उच्चारण से उक्त बिन्दुओं के सम्बन्ध में अपनी सहमति व्यक्त की.

संस्थान के अध्यक्ष वीरेन्द्रजीत सिंह जी ने कहा कि राष्ट्रऋषि नाना जी ने अपने अभिन्न सखा पं. दीनदयाल उपाध्याय जी के विचारों को उन्हीं के नाम से दीनदयाल शोध संस्थान स्थापित कर साकार किया. आज भौतिक रूप से राष्ट्रऋषि नाना जी हम सबके बीच नहीं हैं, लेकिन ऋषि की अदृश्य शक्ति ही है जो हम सर्वोत्तम पुरूषार्थ प्रस्तुत करने का प्रयास कर रहे हैं. बनाडी स्वावलंबन केन्द्र में जाकर आपने ग्रामीण वासियों से प्रत्यक्ष चर्चा कर उनकी समस्याओं को समझा तथा समाजशिल्पी दम्पति के माध्यम से संचालित संस्थान की विभिन्न योजनाओं की प्रगति के बारे में भी जानकारी प्राप्त की. वास्तव में राष्ट्र ऋषि नानाजी की कल्पना कितनी ऊंची थी, जो उन्होंने समाज के सबसे निचले स्तर पर जीवन यापन कर रहे भारतवासियों के विकास के बारे में व्यवहारिक कार्य समाजशिल्पी दम्पति योजना के द्वारा प्रारम्भ किया.

तृतीय सत्र में संस्थान के विविध प्रकल्पों की प्रस्तुतियां हुईं. – सर्वप्रथम यू.के. में दीनदयाल शोध संस्थान के वर्षभर के कार्यो का विवरण, महाराष्ट्र के नागपुर के बाल जगत प्रकल्प का विवरण, महाराष्ट्र के ही बीड प्रकल्प का विवरण, गोण्डा उ.प्र. का विवरण, दिल्ली प्रकल्प का विवरण, चित्रकूट प्रकल्प का विवरण प्रस्तुत किया गया. साथ ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह सुरेश भय्या जी जोशी ने दीनदयाल शोध संस्थान की नवनिर्मित बेवसाइच का लोकार्पण किया.

अटारी के निदेशक डॉ. अनुपम मिश्रा जी ने कहा कि मैं इस संस्थान से 1993 से जुड़ा हुआ हूं, यहां प्रकृति देखकर हार्दिक प्रसन्नता होती है. नानाजी जैसे चिन्तनशील व्यक्ति के काम को मैंने प्रत्यक्ष सतना जिले के पटनी गांव में देखा, जहां पीने के पानी का अभाव था. वहां शोध संस्थान के जल प्रबन्धन के व्यवहारिक प्रयासों से लोग संग्रहित जल से खेतों में सिंचाई करके उत्तम खेती कर रहे हैं.

सरकार्यवाह भय्या जी जोशी ने उ.प्र. के स्वावलंबन केन्द्र रानीपुर खाकी (मुकवन पुरवा) एवं गनीवॉ केन्द्रों में जाकर देखने के पश्चात प्रत्यक्ष अनुभव को बैठक के प्रथम दिन के अन्तिम सत्र में सबके समक्ष रखा. उन्होंने कहा कि समाज जीवन का इतिहास हजार वर्षों का है. समय-समय पर इस समाज में पं. दीनदयाल उपाध्याय जी व राष्ट्र ऋषि नाना जी जैसे महापुरूष आकर समाज को एक नई दिशा प्रदान करते रहे हैं. हम सबको भी समाज के बीच में काम करते हुए जो कुछ भी सीखने को मिलता है, उसका संकलन करते जाना चाहिये. इसी प्रकार जब हम समाज में प्रत्यक्षरूप से कार्य करते हैं तो हमें विविध प्रकार की प्रतिभाओं से भी सामना करना पड़ता है. प्रतिभावान होने के लिए स्कूली शिक्षा आवश्यक नहीं, अतः हम सबको ऐसे प्रतिभाशील व्यक्तियों से भी अपने काम के लिए कुछ अर्जन करना चाहिये तथा प्रयोगशील व्यक्तियों के साथ-साथ अच्छी परम्पराओं को भी सूचीबद्ध करना चाहिये जो सामाजिक पुर्नरचना में काम देगी.

दो द्विवसीय बैठक में देश एवं विदेशों में संस्थान की गतिविधियों को संस्थान के प्रकल्पों के माध्यम से संचालित कर रहे कार्यकर्ता भाग ले रहे हैं. कार्यक्रम का संचालन दीनदयाल शोध संस्थान के प्रधान सचिव अतुल जैन जी ने किया एवं कार्यक्रम की रूप रेखा संगठन सचिव अभय महाजन जी ने रखी. कल्याण मंत्र – सर्वे भवनु सुखिनः ……………….के साथ प्रथम दिन की बैठक सम्पन्न हुई.

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