हम्पी में व्यासतीर्थ के 500 वर्ष पुराने व्रंदावन को उपद्रवियों ने किया नष्ट

ऐतिहासिक स्मारकों की सुरक्षा में एएसआई विफल

जयपुर (विसंकें). हम्पी में श्री व्यासतीर्थ के 500 वर्ष पुराने व्रंदावन को उपद्रवियों ने पूरी तरह से नष्ट कर दिया. हम्पी में महान संत श्री व्यासतीर्थ का 500 साल पुराना व्यासिता का व्रंदावन उपद्रवियों द्वारा 17 जुलाई, 2019 को पूरी तरह से नष्ट कर दिया गया.

यह घटना उस समय सामने आई जब आगंतुकों ने व्रंदावन के खंडहरों को देखा. फव्वारा, स्तंभ, व्रंदावन के शीर्ष, सभी नष्ट हो गए हैं. व्रंदावन हम्पी के पास अनेंगुदी के नव व्रंदावनों (9 व्रंदावन) का हिस्सा है. नव व्रंदावन श्री व्यासतीर्थ सहित हिन्दू संतों की जीव समाधि है.

स्थानीय पुलिस घटना की जांच कर रही है. एएसआई, जिसके दायरे में स्मारक आता है, पर इसकी सुरक्षा की ओर ध्यान नहीं देने के आरोप लग रहे हैं. पुलिस को सदेह है कि यह काम खजाने या पुरानी वस्तुओंके लुटेरों का है. जबकि आस-पास के निवासियों का कहना है कि यह आक्रमणकारी उपद्रवियों का काम है जो इसके समृद्ध इतिहास को नष्ट करना चाहते थे. तुंगभद्रा नदी के तट पर स्थित अनेंगुदी का नव व्रंदावन, हम्पी का हिस्सा हैं और देश-विदेश से पर्यटक विजयनगर के राजाओं का मार्गदर्शन करने वाले गुरुओं के चमत्कार देखने के लिए यहां आते हैं.

एएसआई अतीत में भी कई हम्पी संरचनाओं को सुरक्षित करने में विफल रहा है. इस साल की शुरुआत में, विजया विट्ठल मंदिर परिसर में उपद्रवियों द्वारा खंभे गिराए गए थे. हम्पी के लिए इस तरह की बर्बरता कोई नई बात नहीं है, लेकिन एएसआई ऐसे महत्वपूर्ण स्थलों और स्मारकों की सुरक्षा में बार-बार विफल रही है. यह वास्तव में दुःखद है कि श्री व्यासतीर्थ का व्रंदावन जो 1565 ईस्वी में हम्पी की बर्बर इस्लामिक लूट से बच गया था, 2019 में एक धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक देश में नष्ट हो गया है.

श्री व्यास तीर्थ – विजयनगर के राजा कृष्ण देवराय के राजगुरु रहे हैं

श्री व्यासतीर्थ वेदांत के द्वैत क्रम से संबंधित एक महान विद्वान और कवि थे. विजयनगर साम्राज्य के संरक्षक के रूप में, व्यासतीर्थ स्वर्ण युग में सबसे आगे था, जिसने समाज के लिए श्री व्यासतीर्थ का योगदान, हरिदास साहित्य में द्वंद्वात्मक विचारों के विकासात्मक रूप में देखा, पुरंदर दास और कनक दास जैसे महान कवि उनके शिष्य हैं और वह कृष्ण देवराय के राजगुरु थे. कृष्णदेव राय की मृत्यु के बाद, व्यासतीर्थ ने अच्युता देव राय को सलाह देना जारी रखा. श्री व्यासतीर्थ को उपमहाद्वीप में द्वैत स्कूल के विस्तार में उनकी भूमिका और हरिदास आंदोलन को उनका समर्थन और उनके दार्शनिक और द्वंद्वात्मक विचार के लिए, जयतीर्थ और माधव के साथ-साथ, दार्शनिक विचार के अग्रणी दार्शनिकों में से एक माना जाता है.

इससे दुःखी स्थानीय लोगों ने स्वयं पुनर्निर्माण का संकल्प लिया और व्यासराज व्रंदावन का पुनर्निर्माण शुक्रवार 19 जुलाई को पूरा भी कर दिया.

पुनर्निर्माण पूरा होने के पश्चात प्रसन्नता व्यक्त करते लोग —

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