जहाँ सरसंघचालक और कारचालक एक ही पट्टी पर बैठ कर भोजन करते है, वह है ‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ’

जयपुर (विसंके)। मुझे इस बात से बहुत आश्चर्य होता है ,कि जो लोग राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बारे में कुछ भी नहीं जानते वे बिना सोचे समझे कम्युनिष्टों व कांग्रेसियों के बहकावे में आकर संघ जैसे देश के लिए निःस्वार्थ काम करने वाले संगठन पर आधारहीन आरोप लगाते हैं।

रज्जू भैया जी

रज्जू भैया जी

पहली बात संघ किसी भी उस आंदोलन में न तो भाग लेता और न ही सहयोग करता है जिसमें राष्ट्रहित निहित न हो ।देश पर आई किसी भी आपदा में सबसे पहले संघ के स्वयंसेवक निःस्वार्थ सेवा को पहुंचते हैं।संघ में कभी भी जाति पर चर्चा नहीं होती वहां हर हिन्दू भाई भाई है,कोई छोटा बड़ा नहीं। ,,

मुझे एक घटना याद आती है जब संघ के तृतीय सरसंघचालक प.पू. बालासाहब देवरस ने अपने स्वास्थ्य कारणों से सरसंघचालक पद का त्याग कर प.पू. रज्जू भैया को यह दायित्व दिया था। तो उस समय के कम्युनिष्ट पत्रकार बिल्टिज साप्ताहिक के संम्पादक रूसी करंजिया प.पू. रज्जू भैया से मिलने नागपुर गये। उन्होंने कहा कि मैं ये जानने के लिए आया हूँ कि जिस संगठन के मुखिया प्रोफेसर राजेन्द्र सिंह हैं वो संकीर्ण सोच का कैसे हो सकता है? रज्जू भैया ने चाय जलपान के बाद कहा कि 12 बज गए हैं भोजन की घंटी बज गई चलो पहले भोजन कर लेते हैं ,जैसे ही भोजन कक्ष में पहुंचे रज्जू भैया ने उपस्थित सभी लोगों का परिचय कराया अपने बगल में बैठे व्यक्ति का परिचय अपने कारचालक के रूप में कराया और जब भोजन के बाद रज्जू भैया ने रूसी करंजिया से पूंछा कि, हां बताइए आप क्या जानना चाहते हैं ,तब रूसी करंजिया ने कहा कि जहां सरसंघचालक और कार चालक एक फट्टी पर बैठकर भोजन करते हों उस संगठन के बारे में मुझे अब कुछ नहीं पूंछना है।मेरी सारी भ्रांतियां दूर हो गईं।और उसके बाद रूसी करंजिया संघ के समर्थक बन गए।

अतः जो संघ को जानते नहीं वे राजनीतिज्ञों की बातों में आकर बिना कुछ जाने संघ का विरोध करते हैं। जब कि संघ जैसा दुनिया में कोई दूसरा सेवा भावी संगठन नहीं है।

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