Category: प्रेरक-प्रसंग

रज्जू भैया जी 0

जहाँ सरसंघचालक और कारचालक एक ही पट्टी पर बैठ कर भोजन करते है, वह है ‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ’

जयपुर (विसंके)। मुझे इस बात से बहुत आश्चर्य होता है ,कि जो लोग राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बारे में कुछ भी नहीं जानते वे बिना सोचे समझे कम्युनिष्टों व कांग्रेसियों के बहकावे में आकर...

संत तुकाराम जयंती पर प्रेरक प्रसंग ‘कद्दू’ 0

संत तुकाराम जयंती पर प्रेरक प्रसंग ‘कद्दू’

एक दल तीर्थ-यात्रा पर जा रहा था। यह दल हर वर्ष तीर्थयात्रा पर जाता था, लेकिन उसके सदस्यों के विकार खत्म नहीं होते थे। दल के सभी सदस्य संत कवि तुकाराम जी के पास...

एक आदर्श गाँव -मोहद 0

एक आदर्श गाँव -मोहद

यहाँ प्रवेश करते ही लगता है कि, हम किसी विशेष गांव में आ गए हैं ।घर-घर के दरवाजे पर ओम व स्वस्तिक की छाप, दीवारों पर जतन से उकेरे गए सुविचार, तो कहीं ब्रम्हांड...

देशद्रोही मुखबिरों का वध _ 8 फरवरी प्रेरक प्रसंग 0

देशद्रोही मुखबिरों का वध _ 8 फरवरी प्रेरक प्रसंग

देशद्रोही मुखबिरों का वध _ 8 फरवरी प्रेरक प्रसंग देश की स्वाधीनता के लिए जिसने भी त्याग और बलिदान दिया, वह धन्य है; पर जिस घर के सब सदस्य फांसी चढ़ गये, वह परिवार...

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कोटली के अमर बलिदानी – 27 नवम्बर/इतिहास-स्मृति

कोटली के अमर बलिदानी – 27 नवम्बर/इतिहास-स्मृति ‘हंस के लिया है पाकिस्तान, लड़ के लेंगे हिन्दुस्तान’ की पूर्ति के लिए नवनिर्मित पाकिस्तान ने 1947 में ही कश्मीर पर हमला कर दिया। देश रक्षा के...

श्री माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर उपाख्य श्री गुरुजी 0

श्री गुरुजी ने चित्तौड़गढ़ के गाइड को फटकारा

श्री गुरुजी ने चित्तौड़गढ़ के गाइड को फटकारा- “चुप रहो, बकवास बंद करो, जो राजपूत मूंछ के बाल के लिए प्राण न्यौछावर कर देते हैं, क्या वे अपनी रानी महारानी को दर्पण में दिखायेंगे...

अध्यात्म पुरुष बाबा बुड्ढा 0

मैं तो गुरुओं का दास हूं-अध्यात्म पुरुष बाबा बुड्ढा

अध्यात्म पुरुष बाबा बुड्ढा (1 सितम्बर/इतिहास-स्मृति) सिख इतिहास में बाबा बुड्ढा का विशेष महत्त्व है। वे पंथ के पहले गुरु नानकदेव जी से लेकर छठे गुरु हरगोविन्द जी तक के उत्थान के साक्षी बने।...

खेजड़ली गाँव में वृक्षों की रक्षा के लिए किए गए बलिदान की शौर्य गाथा 0

जब पेड़ों को काटा जाने लगा, तो लोगों के शरीर भी टुकड़े-टुकड़े होकर गिरने लगे

खेजडली ‘पर्यावरण संरक्षण के लिए 363 बलिदान’  ( स्मरण दिवस भाद्रपद शुक्ल दशमी तदनुसार 31 अगस्त ) राजस्थानी की प्रसिद्ध कहावत “सर साठे रूंख रहे तो भी सस्तो जाण” (अर्थात सिर कटवा कर वृक्षों...

कन्हाईलाल दत्त 0

चिता की भस्म से लोगों ने तिलक किया

देशद्रोही का वध (31 अगस्त/प्रेरक-प्रसंग) स्वाधीनता प्राप्ति के प्रयत्न में लगे क्रांतिकारियों को जहां एक ओर अंग्रेजों ने लड़ना पड़ता था, वहां कभी-कभी उन्हें देशद्रोही भारतीय, यहां तक कि अपने गद्दार साथियों को भी...