देश का दुर्भाग्य रहा कि वीर स्वतंत्रता सेनानियों को इतिहासकारों ने इतिहास में जगह नहीं दी – कुलभूषण जी

नई दिल्ली. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ दिल्ली के प्रांत संघचालक 15कुलभूषण आहूजा जी ने तात्या टोपे को एक महान रणनीतिकार बताते हुए कहा कि तात्या टोपे एक अमर स्वतंत्रता सेनानी थे. यह देश के इतिहास का दुर्भाग्य रहा कि तात्या टोपे जैसे अनेकों वीर स्वतंत्रता सेनानियों को इतिहास में इतिहासकारों द्वारा जगह नहीं दी गई. आवश्यकता है, ऐसे सेनानियों की वीर गाथाओं और पराक्रमों को देश और विश्व के सामने लाने की. देश के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में तात्या जी का जो अतुलनीय योगदान रहा है, उसे अंग्रेजी हुकूमत ने तो मिटाया ही और उसी के पथ पर देश की तत्कालीन सरकार ने अग्रसर होते हुए जारी रखा. पर, अब वक्त आ गया है कि तात्या जी और उनके समकक्ष भारत मां के वीर सपूतों की वीर गाथाओं को संकलन करने का, जिसे अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना द्वारा कड़ी मेहनत के साथ किया जा रहा है. अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना द्वारा उन विस्मृत योद्धाओं को स्मरणांजलि कार्यक्रम के माध्यम से याद कर उनके बहादुरी के इतिहास को समाज एवं देश के सामने लाने का यह कार्य सराहनीय और महत्वपूर्ण कदम है. कुलभूषण जी “एक विस्मृत योद्धा तात्या टोपे स्मरणांजलि” कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे.

अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना द्वारा आयोजित एक विस्मृत हिन्दू योद्धा तात्या टोपे स्मरणांजलि कार्यक्रम का आयोजन दीनदयाल शोध संस्थान नई दिल्ली में 15 दिसम्बर 2015 को किया गया. जिसकी अध्यक्षता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ दिल्ली प्रान्त के संघचालक कुलभूषण आहूजा जी ने की, कार्यक्रम के मुख्य अतिथि तात्या टोपे के वंशज और तात्या टोपे ऑपरेशन रेड लोट्स के लेखक पराग टोपे थे.

कार्यक्रम में तात्या टोपे के वंशज पराग टोपे ने एक प्रजेंटेशन के माध्यम से तात्या जी को याद करते हुए उनके द्वारा संचालित “ऑपरेशन रेड लोटस” और “चपाती” मुहिम का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि मैंने तात्या जी पर अपने पूरे परिवार के सहयोग से “तात्या टोपे ऑपरेशन रेड लोटस” नामक एक किताब भी लिखी है. जिसमें तात्या जी से जुड़ी उन सभी बातों का उल्लेख किया है, जिसे देश के इतिहासकारों ने भारत के स्वतंत्रता के इतिहास में गुमनाम छोड़ दिया है. एक ऐसा योद्धा जिसने अपने दिमागी मायाजाल से ब्रिटिश सरकार को नाकों चने चबवाए थे. पराग जी ने कहा कि देश के इतिहास पर आश्चर्य तब होता है, जब इस देश में उनका इतिहास महिमामंडित कर लिखा गया है, 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में जिनकी भूमिकाओं पर संदेह रहा है, जो उस समय अंग्रेजों की चाटुकारिता किया करते थे और देश के साथ गद्दारी. इससे भी बड़ी आश्चर्यजनक बात यह है कि 1857 को स्वतंत्रता संग्राम नहीं बोला जाता और न ही लिखा जाता है. इसे 1857 का गदर कहा जाता है. जिसमें कई लाखों लोगों ने भारत मां को आजाद करवाने के लिए अपने प्राणों को न्यौछावर कर दिया था. देश में पढ़ाए जाने वाले इतिहास में तात्या जी के बारे में बस कुछ चंद पंक्तियां ही मिलती हैं. जिससे प्रतीत होता है कि इस देश के इतिहास के साथ कैसा खिलवाड़ हुआ है ! जरूरत है तात्या और उनके जैसे देश के उन “अनटोल्ड हीरो” के इतिहास को तथ्यों के साथ समाज और देश के सामने लाने की, जिनके इतिहास को दबाया गया है.

अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के संगठन मंत्री बाल मुकुंद जी कहा कि 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में पूरे देश में लगभग 3.5 लाख लोग मारे गए थे. 1857 का इतिहास कहता है कि हमारे साथ आघात हुआ है. 1858 में 1857 का इतिहास भ्रामक तरीके से लिखवाया गया. जिन लोगों ने इसे लिखा वे इसाई थे और जो भारतीय शामिल थे, उसमें ब्रिटिश सरकार के चाटुकार थे. क्या तात्या टोपे को फांसी हुई थी ? यह आज भी भ्रम है ! क्योंकि जो अधिकतर इतिहासकारों ने तात्या के बारे में लिखा है. उसे पढ़ने के बाद यह भ्रम सामने आता है. ऐसा लिखने वालों में ब्रिटिश इतिहासकार ही सबसे आगे हैं. वीर सावरकर ने भी तात्या जी की फांसी के बारे में लिखा है कि प्राप्त प्रमाणों के आधार पर यह पाया जाता है कि तात्या अंग्रेजों के चुंगल में आये ही नहीं थे. वे देश के किसानों और आदिवासियों के सहयोग से छापामार युद्ध करते थे. तात्या जैसे ही किसी दूसरे व्यक्ति को फांसी हुई थी. इसलिए आवश्यकता है कि देश के नौजवान इतिहासकार देश के असली हीरो के इतिहास को देश के समक्ष लायें.

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1 Response

  1. Anil Kumar Mishra says:

    अच्छी जानकारी प्राप्त हुई है, धन्यवाद ज्ञापन

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