मजहबी तालीम की आड़ में मदरसों में दी जा रही आतंक की तालीम, कहीं मिल रहे हथियार तो कहीं पकड़े जा रहे आतंकी

मज़हबी तालीम के लिए स्थापित किए गए मदरसों में आज हर प्रकार का अपराध हो रहा है. फर्जी स्कालरशिप का घोटाला मदरसों में किया गया. पिछले दिनों एक मदरसे में ही छात्राओं के साथ बलात्कार की घटना को अंजाम दिया गया. दारूल उलूम अक्सर किसी ने किसी ऐसे कारण से चर्चा में रहता ही है।

 मदरसे में छापेमारी करती हुई पुलिस की टीम
राष्ट्र विरोधी गतिविधियों के लिए मदरसे अब एक शरण स्थली बन गए हैं . अभी हाल ही में पुलिस ने बिजनौर जनपद के मदरसे से हथियारों का जखीरा बरामद किया है. मदरसे को केंद्र बनाकर बकायदे वहां से हथियारों का व्यापार हो रहा था.
पुलिस के अनुसार, हथियार खरीदने वाले मरीज बनकर मदरसे में दाखिल होते थे. लोगों को बहुत दिन तक यही भ्रम बना रहा कि मदरसे में बीमार लोग अपने इलाज के लिए दवा लेने आते हैं. क्षेत्राधिकारी अफजलगढ़, कृपा शंकर कनौजिया की अगुआई में पुलिस टीम ने मदरसा ‘दारूल कुरआन हमदिया’ पर छापा मारा. पुलिस टीम ने इस दौरान 32 बोर की एक पिस्टल एवं 8 कारतूस , 315 बोर के तीन देशी तमंचे एवं 32 कारतूस, 32 बोर की एक रिवाल्वर एवं 16 कारतूस बरामद किए. इन अपराधियों के द्वारा एक स्विफ्ट डिजायर कार को हथियार की सप्लाई करने में इस्तेमाल किया जाता था. इस कार पर शिव सेना लिखवाया गया था. पुलिस ने मदरसा संचालक साजिद, हथियार सप्लाई करने वाले साबिर के साथ-साथ फईम अहमद , जफ़र इस्लाम, सिकंदर अली एवं अजीज़ुर्रहमान को गिरफ्तार किया है. पुलिस के अनुसार साबिर बिहार का रहने वाला है. साबिर ही बिहार से हथियार ले आता था. मदरसे की तरफ से डिमांड बता दी जाती थी.उसके बाद साबिर बिहार जा कर वहां से असलहे खरीद कर ले आता था.
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर के देवबंद में दारूल उलूम इस्लामिक शिक्षा का बड़ा केंद्र है. दूर-दूर से मज़हबी शिक्षा प्राप्त करने के लिए छात्र वहां पर पहुंचते हैं. दारूल उलूम में मज़हबी शिक्षा लेने के लिए छात्र अन्य इस्लामिक देशों से भी आते हैं. इसी वजह से देवबंद में अन्य मदरसे भी खुल गए हैं. मौजूदा समय में हालत यह है कि जैश – ए – मोहम्मद जैसे खतरनाक आतंकी संगठन के लिए देवबंद ‘साफ्ट टारगेट’ है. यहां के मदरसों में पढ़ रहे युवकों को आतंकी बनाना, उनके लिए ज्यादा आसान कार्य है. 
इस वर्ष देवबंद में मार्च महीने में गिरफ्तार किये गए दो आतंकवादी बिना दाखिला लिए मदरसे का छात्र बनकर छात्रावास में रह रहे थे. दोनों आतंकी वहां के नौजवानों को हिन्दुस्तान के खिलाफ भड़का कर उन्हें आतंकवादी बनाने के काम में लगे हुए थे.
मदरसे में रहने वाले एक छात्र ने पुलिस को सूचना दी जम्मू – कश्मीर के रहने वाले दो युवक बिना दाखिला के मदरसे में रह रहे है. दोनों युवकों की गतिविधियां भी संदिग्ध लग रही है. इस सूचना पर पुलिस सक्रिय हुई और आरोपियों को वहां से पकड़ा गया.
वर्ष 2018 के दिसंबर माह में राष्ट्रीय जांच एजेंसी , दिल्ली पुलिस एवं उत्तर प्रदेश की ए.टी.एस ने संयुक्त रूप से दिल्ली और उत्तर प्रदेश में 17 जगहों पर छापा मारा था और 10 आतंकियों को गिरफ्तार किया था. आतंकी, सीरियल बम धमाके कर पूरे देश में दहशत कायम करने की योजना बना रहे थे. जिन जगहों पर विस्फोट किए जाने की योजना थी उसमे राष्ट्रीय स्वयम सेवक संघ कार्यालय , भाजपा कार्यालय , दिल्ली पुलिस मुख्यालय एवं बड़े नेताओं का नाम प्रमुख रूप से शामिल था.
2 जनवरी 2019 को वसीम अहमद और एहसान कुरैशी को भी देवबंद से गिरफ्तार किया गया था. इन दोनों पर आरोप है कि बांग्लादेशी आतंकी युसूफ अली को देश से बाहर फरार कराने के लिए फर्जी पासपोर्ट बनवाया था. ये दोनों भी देवबंद में पनाह लिए हुए थे.
 
इंडियन मुजाहिदीन का आतंकी शेख एजाज़ भी सहारनपुर में रहता था. एजाज़ को पुलिस ने सहारनपुर के रेलवे स्टेशन से वर्ष 2015 में गिरफ्तार किया था. वर्ष 2017 में मुजफ्फरनगर जनपद और देवबंद इलाके में फैजान सक्रिय था. फैजान बांग्लादेश में आतंकी संगठन से जुड़ा था. पुलिस की कार्रवाई की भनक लगते ही वह फरार हो गया था.
अक्टूबर 2017 में कोलकाता पुलिस ने रज़ाउल रहमान को गिरफ्तार किया था. यह भी देवबंद में रह चुका था. वर्ष 2001 में अब तक का सबसे बड़ा आतंकी हमला किया गया था. आतंकियों ने लोकसभा पर हमला किया था. उस हमले में जिस कार का प्रयोग किया गया था. वह कार सहरानपुर की थी. लोकसभा पर हमले में आतंकी संगठन जैश – ए –मोहम्मद का हाथ था.
वर्ष 2018 के दिसंबर माह में, लखनऊ के मदरसे में बड़े पैमाने पर यौन शोषण का मामला प्रकाश में आया था. मदरसा संचालक की हरकतों से तंग आकर छात्राएं शाम के समय रसोई घर में नहीं जाती थीं. रसोई घर में ही संचालक छात्राओं के साथ गलत हरकतें करता था. जो छात्राएं मदरसा संचालक की हरकतों का विरोध करती थीं, उन के साथ वह मारपीट करता था. मदरसे की छात्राएं इस कदर पीड़ित थी कि एक दिन जब मदरसे के मालिक सैय्यद जिलानी मदरसे के संचालक से मिल कर निकल रहे थे तब छात्राओं ने शिकायती पत्र, पत्थर के टुकड़े में बांधकर उनके करीब फेंका. जब जिलानी ने उस शिकायती पत्र को पढ़ने के बाद पुलिस को सूचना दी। जिलानी की शिकायत के बाद पुलिस ने छापा मारा. सआदतगंज थाना अंतर्गत मदरसा -जामिया खादीजतुल कुबरा लिलबनात – पर छापे की कार्रवाई के बाद मदरसे में कुल 52 छात्राएं रिहा कराई गई थीं. पांच छात्राओं ने प्राथमिकी दर्ज कराई कि संचालक तैय्यब जिया कारी , उनके साथ मार-पीट एवं अभद्र व्यवहार करता था. इसके बाद संचालक को जेल भेज दिया गय . एक छात्रा लड़की इस कदर डरी हुई थी कि संचालक के जेल जाने के कुछ दिन बाद उसने बलात्कार का मुकदमा दर्ज कराया.

महराजगंज के मदरसे में हुआ था राष्ट्रगान का विरोध

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर महाराजगंज जनपद के मदरसे में राष्ट्रगान का विरोध किया गया था. इस प्रकरण के संज्ञान में आने पर प्रशासन ने मदरसे की मान्यता रद्द कर दी थी. स्वतंत्रता दिवस पर मौलानाओं ने राष्ट्रगान गाने से इंकार कर दिया था और सभी बच्चों को भी राष्ट्रगान गाने के लिए मना किया था. बता दें कि इस बार 13 अगस्त 2018 को मदरसा बोर्ड की तरफ से इस बात के स्पष्ट दिशा निर्देश जारी किये गए थे कि स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सभी मदरसों में राष्ट्रगान गाया जाएगा और तिरंगा झंडा फहराया जाएगा. लेकिन महराजगंज जनपद के मदरसा अरबिया अहले सुन्नत अनवारे तैयबा गर्ल्स कॉलेज बड़गो में स्वतंत्रता दिवस के मौके पर जब राष्ट्रगान गाने का समय आया तब मौलानाओं ने राष्ट्रगान गाने से इन्कार कर दिया. इस संबंध में एक वीडियो भी वायरल हुआ था।
उत्तर प्रदेश के शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी ने ऐसे मदरसों को बंद करने की मांग की है. उनका कहना है कि मजहबी तालीम उस समय दी जानी चाहिए जब बच्चे परिपक्व अवस्था में पहुंच चुके हों. संविधान में सभी को एक समान शिक्षा देने की व्यवस्था है. संविधान की इस व्यवस्था का पालन किया जाना चाहिए. मौलाना मदरसे में बच्चे को मज़हबी शिक्षा देते हैं और बच्चे के मन में यह बैठ जाता है कि मौलाना बनना ही दुनिया का सबसे अच्छा और पाक काम है. पवित्र काम है. अगर किसी बच्चे को मौलाना बनना है , तो इसका फैसला उस बच्चे के माता – पिता करेंगे ना कि मौलाना . मगर मदरसे की शिक्षा व्यवस्था ऐसा हो गई है कि उसमें पढ़कर निकलने वाले बच्चे अधिकतर मौलाना ही बनना चाहते हैं. बच्चों को आवश्यक रूप से मजहबी शिक्षा दिया जाना एक प्रकार का मानसिक शोषण है. हाईस्कूल तक की सामान्य शिक्षा के बाद यह तय होना चाहिए कि जब बच्चा समझदार हो जाए तब उसे तय करने देना चाहिए कि उसे मौलाना बनना है या उसे अन्य किसी क्षेत्र में जाना है। बचपन से ही केवल मजहबी तालीम देकर उसक ब्रेनवॉश करना गलत है.

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