मातृत्व जब विशाल होता है तो वसुधैव कुटुम्बम की धारणा साकार होती है

लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन जी ने बताया कि उन्होंने देश के एक बड़े नेता को पत्र लिखकर उनके बयान का जवाब दिया था कि, “राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में महिलाओं के जाने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि महिलाओं के लिए राष्ट्र सेविका समिति है”. सुमित्रा महाजन जी ने कहा कि स्वयं बचपन से राष्ट्र सेविका समिति की सेविका रही हैं और लेकिन इस बयान से उन्हें दुःख पहुंचा. पर, सार्वजनिक रूप से बयान नहीं दे सकती थीं क्योंकि लोकसभा अध्यक्ष होने की मर्यादा आड़े आती थी. इसलिए अपने विचार और पद की गरिमा में सामंजस्य बैठाने के लिए उन्होंने एक पत्र लिखकर बयान देने वाले नेता तक पहुँचाया, साथ ही समिति के परिचय की एक पुस्तिका भी उन्हें भिजवाई.

सुमित्रा महाजन जी दिल्ली में आयोजित (06 जुलाई को ) राष्ट्र सेविका समिति की संस्थापक स्वर्गीय श्रीमती लक्ष्मी बाई केलकर जी के जयंती समारोह में स्त्री जीवन के विभिन्न आयामों में सामंजस्य विषय पर संबोधित कर रही थीं. उन्होंने कहा कि हर स्त्री में अनेक शक्तियां होती हैं, वह बहुत कुछ कर सकती है. उन्हें अपने व्यक्तिगत जीवन, पारिवारिक जीवन, सामाजिक जीवन और राष्ट्र जीवन में सामंजस्य बैठाना है. कहा कि समिति की सेविका होने के कारण वे लोकसभा अध्यक्ष के पद का दायित्व बहुत अच्छे से निभा पा रही हैं क्योंकि समिति ने उन्हें मातृत्व को विशाल करना सिखाया है. उन्होंने कहा कि अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठकर वे सबके बारे में सोचती हैं, क्योंकि हर पार्टी का अपना एक विचार है, अपनी एक लाइन है और अपनी पार्टी से उन्हें जो निर्देश मिलता है उस पर चलना उनकी मजबूरी है. लेकिन जब मातृत्व विशाल हो जाता है तो वे सबकी मजबूरी समझता है और यह भी सामंजस्य है. सुमित्रा महाजन जी ने सभागार में उपस्थित सभी महिलाओं से अनुरोध किया कि वे लक्ष्मी बाई केलकर से प्रेरणा लेते हुए अपने परिवार समाज और राष्ट्र में सामंजस्य बैठाएं और यथाशक्ति योगदान दें.

राष्ट्र सेविका समिति की अखिल भारतीय बौद्धिक प्रमुख डॉ. शरद रेनू जी ने कहा कि कोई भी व्यक्ति तभी आनंद की अनुभूति कर सकता है, जब परिवार और समाज में आनंद हो. भारत में एक व्यक्ति विशेष नहीं होता, पूरा समूह और समाज विशेष होता है, समाज के और देश के मूल चिंतन के आधार पर ही व्यक्तित्व का निर्माण होता है. भारतीय समाज में राष्ट्र का केंद्र बिंदु परिवार है और परिवार का केंद्र बिंदु स्त्री है, स्त्री ही परिवार, समाज और राष्ट्र को चलाती है. उसका मातृत्व जब विशाल होता है तो वसुधैव कुटुम्बम की धारणा साकार होती है.

स्वर्गीय लक्ष्मी बाई केलकर के जयंती समारोह में पंजाब केसरी की चेयर पर्सन किरण चोपड़ा जी और हरियाणा की बीपीएसएम यूनिवर्सिटी की वाईस चांसलर सुषमा यादव जी का उनकी उपलब्धियों के लिए अभिनन्दन किया गया.

राष्ट्र सेविका समिति की संस्थापक और आद्य प्रमुख संचालिका लक्ष्मीबाई केलकर जी को प्यार और असीम श्रद्धा से वंदनीया मौसी जी के उपनाम से जानते हैं. उनका जन्म 06 जुलाई, 1905 में नागपुर में हुआ. बचपन से ही आम बच्चों से भिन्न थीं और उन्होंने महिलाओं के भीतर छिपी शक्तियों को उस समय पहचाना, जब नारी सशक्तिकरण की धारणा से कोई परिचित भी नहीं था. 25 अक्तूबर 1936 को उन्होंने महिलाओं के ऐसे संगठन की नींव रखी जो व्यक्ति निर्माण के साथ समाज और राष्ट्र के निर्माण में भी योगदान दे.

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