विभाजनकारी शक्तियां देश व समाज को तोड़ने के लिये प्रयासरत – अनिरुद्ध देशपांडे जी

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय संपर्क प्रमुख अनिरुद्ध देशपांडे जी ने कहा कि विभाजनकारी शक्तियां हिन्दू समाज को बांटने और देश को तोड़ने का कार्य कर रही हैं. जाति-बिरादरी और ऊंच-नीच का भाव दिखाकर समाज के लोगों को लड़ाने की पुरजोर कोशिश में जुटी हुई हैं, लेकिन संघ उनके इस कुत्सित प्रयास को पूरा नहीं होने देगा. समाज को जागृत कर ऐसी देशद्रोही मानसिकता वाले लोगों को पराजित करना ही संघ का लक्ष्य है. अनिरुद्ध जी शुक्रवार 08 जून को सरस्वती शिशु मंदिर वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय सुभाष नगर में 20 दिवसीय संघ शिक्षा वर्ग द्वितीय वर्ष (सामान्य) और प्रथम वर्ष (विशेष) के समारोप कार्यक्रम में स्वयंसेवकों और आगंतुकों को संबोधित कर रहे थे.

उन्होंने कहा कि पश्चिमी शिक्षण शैली के अंधानुकरण के चलते समाज में अनेक विषमताएं दिखने लगी हैं. भारतीय जीवन शैली, मातृ देवो भव, पितृ देवो भव, गुरु देवो भव की भावनाएं कमजोर हो रही हैं. परिवार व्यवस्था, जो हमारे संस्कार और समृद्धि का माध्यम थी, वह टूटती दिखने लगी है. ऐसे में संघ के स्वयंसेवक का दायित्व बढ़ गया है. वह देश की पहचान यानी संस्कार और परंपराओं को सुरक्षित रखने के लिए अनवरत कार्य कर रहे हैं. यह सिलसिला बीते 93 वर्ष से शाखा के माध्यम से चल रहा है. वजह यह है कि ऊंच-नीच की खाई पाटकर सामाजिक समरसता का संदेश देते हुए देश की परंपरा और मर्यादा बनाए रखना संघ का प्रमुख उद्देश्य है. समरसता हिन्दू समाज का स्वाभाविक गुण है. आज राष्ट्र, राष्ट्रवाद, राष्ट्रीयता को कटघरे में खड़ा किया जा रहा है. राष्ट्रवादी और अराष्ट्रवादियों में वैचारिक संघर्ष चल रहा है. समाज को तोड़ने के लिये देश में अलग-अलग षड्यंत्र किये जा रहे हैं, हमें इनसे जागरूक रहना है.

कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि पधारे पैडलेगंज गुरुद्वारा के हेड ग्रंथी सरदार गुरमीत सिंह जी ने संघ के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि उनका अनुशासन और लक्ष्य अनुकरणीय है. इससे पहले द्वितीय वर्ष सामान्य के वर्ग कार्यवाह बांकेलाल यादव जी ने संघ शिक्षा वर्ग की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि शिविर में हिस्सा लेने वाले स्वयंसेवकों के खानपान में प्रतिदिन 7000 हजार रोटियां लगती थीं, जो समाज में विभिन्न घरों से बनकर आती थीं. सुबह की रोटी की जिम्मेदारी ग्रामीण इलाकों के घरों पर थी तो शाम की रोटी शहर के घरों में तैयार की जाती थी. ऐसा धन की वजह से नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता बनाने के दृष्टिकोण से किया जाता है.

कार्यक्रम की शुरुआत मंच पर मौजूद पदाधिकारियों के स्वागत प्रणाम से हुई. स्वयंसेवकों ने घोष, नियुद्ध, दंड युद्ध, योगासन, व्यायाम दंड योग, विजय वाहिनी, सूर्य नमस्कार आदि का सामूहिक प्रदर्शन किया.
आभार ज्ञापन सह वर्ग कार्यवाह प्रथम वर्ष विशेष सुरेश शुक्ल जी ने किया. संचालन बिकुल दहाल जी ने किया. संघ शिक्षा वर्ग द्वितिय वर्ष (सामान्य) में कुल 287 स्वयंसेवकों, संघ शिक्षा वर्ग प्रथम वर्ष (विशेष) में कुल 235 प्रबुद्ध शिक्षार्थियों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया.

इस अवसर पर संघ शिक्षा वर्ग के सर्वाधिकारी आत्मा सिंह जी, प्रान्त संघचालक डॉ. पृथ्वीराज सिंह जी, क्षेत्र प्रचारक अनिल जी, क्षेत्र कार्यवाह रामकुमार जी, वर्गपालक मिथिलेश नारायण जी, सहित सैकड़ों की संख्या में समाज के सम्मानित बंधु उपस्थित रहे.

 

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