पाकिस्तान: एक मिथक!

unnamed (12)अन्तर्राष्ट्रीय मन्च पर पाकिस्तान एक मान्यता प्राप्त राष्ट्र है, किन्तु व्यवहार में यह भू-भाग पूर्णतः अराजक क्षेत्र है। भीतर तथा बाहर दोनों ही मन्चों पर पाकिस्तान का बर्ताव एक राष्ट्र जैसा नहीं है। इन लोगों के लिये ना तो अन्तर्राष्ट्रीय कानूनों का कोई महत्व है, ना ही देश के भीतर के कानूनों का कोई अर्थ है। पाकिस्तान के भीतर नैतिक पतन की होड सी लगी है, परम्पराओं, प्रोटोकोल तथा कानूनों को तोड कर लाभ कमाने में लगी कौमों के बेईमान लीडरों का जमावड़ा है। सेना, राजनीति व्यापार-व्यवस्था और आई.एस.आई. में पंजाबियों का बोलबाला है। वे अमरीका, चीन व इस्लामिक देशों से बख्शीश बटोरने में माहिर होने के कारण पाकिस्तान की बाकी जातियों और सूबों में वर्चस्व हासिल कर चूके है।

इस भू-भाग में बलुचिस्तान, सिंध, पंजाब, बाल्टीस्तान, खैबर-पख्तून-खावा (केपीके), गिलगित, काबायली (फाटा) आदि क्षेत्र है। मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र होने के कारण अव्यवस्था और अराजकता फैली रहती है। इन प्रोविन्स में रहने वाले लोग एक दूसरे का शोषण और दमन करते रहते हैं। इस क्षेत्र में शिया, सुन्नी, देवबन्दी, अहमदी और अन्य इस्लामिक फिरके, मजहबी मतभेदों के कारण आपसी हिंसक संघर्षों में उलझे रहते है। पंजाबी और सिंधी मुस्लिम बलुचिस्तान के बलूच लोगों पर अत्याचार करते है। बलूच लोग जब-तब इन कौमों के द्वारा की जाने वाली लूटपाट से परेशान होकर आजादी की मांग करते रहते है।
यह लूटेरे अपने आपको पाकिस्तानी कहकर परिभाषित करते है। वास्तव में पाकिस्तान जैसी कोई चीज है ही नहीं! शब्द “पाकिस्तान” एक मिथक है। जैसे सान्ता क्लाॅज नहीं होकर भी होता है तथा होकर भी नहीं होता है। जैसे परियों की कहानी तो होती है, किन्तु परियाँ नहीं होती है। पाकिस्तान भी एक काल्पनिक चीज ही है, वह सच में नहीं होता है। कुछ लोगों ने नीजि हितों के लिये “पाकिस्तान” जैसा शब्द गढ़ लिया है। इस शब्द का प्रयोग करके पंजाबी और सिंधी लोग, मूल बलूच लोगों का सफाया कर रहे है। मानवाधिकारों का हनन कर रहे हैं और अपनी कौम के लोगों को अधिकाधिक बलुचिस्तान में बसा रहे है। इससे वहाँ कि डोमोग्राफी बदल रही है। तथाकथित पाकिस्तान में अलग-अलग कौमे निर्मम जातीय और क्षेत्रीय संघर्ष में उलझी है।
पाकिस्तान एक भ्रम है, मिथक है, मानसिक अवस्था है। एक मिथ्या आवरण बनाया गया है, जिसके आधार पर क्षेत्र के कुछ लोग दूसरे लोगों पर राज कर रहे है। पंजाबियों ने पाकिस्तान के नाम पर सारे क्षेत्र में उत्पात मचा रखा है। पाकिस्तान कुछ नहीं बल्कि निजी हित साधने के लिये पंजाबियों का मुखौटा है। जो जल्द ही टूट कर बिखरने वाला है।
सिंधी और पंजाबियों ने एक संघटित सशस्त्र गिरोह भी बना रखा है, जिसे वह पाकिस्तान की सेना भी कहते है। इसके अतिरिक्त पैसे देकर प्रशिक्षित अन्य छोटे गिरोह भी बना रखे है। लूट-पाट हत्या-हिंसा ही जिनका काम है। इस प्रकार खौफ और आतंक फैलाकर लोगों को नियन्त्रित करना ही उद्देश्य है। इसके अतिरिक्त यह हिंसक लड़ाके अफगानिस्तान के भी क्षेत्रों के भीतर तक घुसकर अराजकता-फैलाने में लगे रहते है। इस्लामिक शिक्षाओं और मान्यताओं के कारण यह क्षेत्र मध्ययुगीन मानसिकता से आगे नहीं बढ़ पाया है। इस कारण इस पूरे क्षेत्र का आधुनिक और औद्योगिक विकास नहीं हो पाया है। गरीबी और बेरोजगारी का बोलबाला है।
इस क्षेत्र की समस्याओं का वास्तविक समाधान “पाकिस्तान” जैसे मिथक को लोगों के दिमाग से निकालना है क्योंकि इस नाम का करके इस क्षेत्र में बहुत दमन-शोषण किया गया है।
मुख्य कौमें कश्मीरी, बाल्टी, सराईकिस, काबायली, हिन्दकोबान, बलूच, पख्तू, पठान, मुजाहिर आदि है। इनके अतिरिक्त अनेकों अन्य कौमें और जातियाँ भी है जिनका शासन, प्रशासन और इस्लाम के नाम पर पंजाबी और सिंधी शोषण करते है। वे इन भौगोलिक इकाईयों को भारत का भय दिखाकर नियन्त्रित किया जाता है। जबकि भारत बलूच लोगों का मित्र तथा समर्थक है। भारत के प्रधानमंत्री ने बलूच लोगों के प्रति सहानुभूति और समर्थन प्रदर्शित किया है।
बलूच लोग भले और सज्जन होते है, अतः दूसरी शातिर कौमों ने इनको क्षति पहुंचाकर अपना पेट पाला है। इस पूरे भू-भाग को अलग-अलग प्रोविन्स जैसे बलुचिस्तान, सिंध, पंजाब, बाल्टीस्तान, खैबर पख्तून खावा (केपीके), गिलगित, काबायली क्षेत्र (फाटा) के रूप में बांटकर देखा जाना चाहिये, इससे आपस में किये जाने वाले अन्याय में कमी आयेगी। शोषण के शिकार बलूच लोगों के हितों की रक्षा की जानी आवश्यक है।
सारी दुनिया में बलूच लोगों पर होने वाले अत्याचारों के कारण चिन्ता व्याप्त है। बलूच लोगों को इस दमन और शोषण से स्वतन्त्रता मिलनी चाहिये। बलुचिस्तान, एक स्वतन्त्र राष्ट्र बनना चाहिये। बलूच लोगों का अपना होम लैण्ड।
बलुचिस्तान सदैव ही स्वतन्त्र था। किन्तु जिन्ना ने 1946-1948 में धोखे से बलपूर्वक कब्जा कर लिया। पाकिस्तान बनने के आठ महीने बाद तक बलुचिस्तान एक स्वतन्त्र राष्ट्र था। विदेशी फौजों द्वारा किया गया यह कब्जा बन्दूक की नोंक पर आज भी चल रहा है।
हाल ही में सामुहिक कब्रों में एक हजार से अधिक बलूच शव मिले है, जिन पर सिंधी, पंजाबी सेना द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली बन्दूक की गोलियों के निशान है।
राजधानी क्वेटा में बुद्धिजीवियों के एक सम्मेलन पर हमला करवाया गया। जिसमें 70 प्रबुद्ध लोग मारे गये। सत्ता में बैठी शक्तियों द्वारा इस प्रकार की हिंसा रोज-मर्रा की घटना बन गयी है।
बाहरी शक्तियाँ जो की स्वयं को पाकिस्तान कहती है, बलुचिस्तान के प्राकृतिक संसाधनों का दोहन कर रही है। इस पूरे पाकिस्तान क्षेत्र के सबसे बड़े तेल संसाधन बलुचिस्तान में है। अतः ऊर्जा का सबसे बड़ा स्त्रोत है। बलुचिस्तान से निकलने वाले तेल और आमदनी पर स्थानीय निवासियों बलूच, पश्तों और पठान (समुदाय) का अधिकार नहीं है।
दूसरे को नियन्त्रित करके राज करने की अदम्य इच्छा, जिसकी जड़े मजहबी तालीम में है। इसीलिये बलूचों का उनके घर में सामुहिक जनसंहार (जेनोसाईड) कई पीढ़ियों से किया जा रहा है। जबकि प्रोपोगेण्डा किया जाता है कि बलूच, असभ्य, जंगली और अशिक्षित है। तथाकथित पाकिस्तानी आर्मी की बलूच रेजीमेन्ट में एक भी बलूच नहीं है। क्यों? क्योंकि बलूचो पर सिंधी, पंजाबी आर्मी भरोसा नहीं करती है।
बलुचिस्तान इस क्षेत्र का सबसे बड़ा प्रोविन्स है, जिसकी जनसंख्या सबसे कम और विरल है। जिसका आकार लगभग फ्रांस के बराबर है। 600 कि.मी. लम्बी समुद्र रेखा है। भौगोलिक स्थिति रणनैतिक रूप से महत्वपूर्ण है। यह कथित पाकिस्तान के दक्षिण-पश्चिम क्षेत्र में स्थित है तथा उसका लगभग 45 प्रतिशत भू-भाग है यानि लगभग आधा। कोयले के अकूत भण्डार है। लगभग 200 मीलियन टन से अधिक लौह भण्डार है। इसके अतिरिक्त अन्य बहंुत से खनिज भारी मात्रा में है, जिन्हें अभी तक खोजा नहीं गया है। इस प्रकार बलुचिस्तान प्राकृतिक खनिज सम्पदा का उपयोग कर अपनी अर्थव्यवस्था को स्वयं सहारा देने में सक्षम है। इस भू-भाग के पश्चिम में ईरान, उत्तर में अफगानिस्तान, दक्षिण में अरब सागर है। आने वाले समय में जब बलुचिस्तान एक स्वतन्त्र राष्ट्र बन जायेगा, तो पाकिस्तान के हाथ से लगभग आधा भू-भाग निकल जायेगा और तेल के अकूत स्त्रोत से भरपूर ईरान तक आवागमन के लिये भू-मार्ग नहीं मिलेगा।
ईरान और कथित पाकिस्तान के बीच प्राकृतिक गैस और तेल की सप्लाई के लिये प्रोजेक्ट खटाई में पड़ जायेगा क्योंकि यह पाईप-लाईन, बलुचिस्तान से होकर निकलेगी। यदि नया बलूच राष्ट्र सहयोग नहीं करेगा तो ईरान से समुद्र मार्ग से तेल व गैस बाकी क्षेत्रीय प्रोविन्स तक पहुंचेगी, जो कि सिंध, पंजाब, गिलगित, बाल्टीस्तान, के.पी.के. व काबायली क्षेत्रों को महंगी पड़ेगी और इन क्षेत्रों में राज करने वाले पंजाबी गिरोहो की कमर टूट जायेगी। क्योंकि बलुचिस्तान का ग्वादर बन्दरगाह भी हाथ से निकल जायेगा और बाकी प्रोविन्स लैण्ड लाॅक हो जायेंगे। इससे पाकिस्तान की सामरिक क्षमता की कमर टूट जायेगी।
बलूचों की आर्थिक, स्वास्थ्य, शिक्षा की स्थिति सारे पाकिस्तान में सबसे खराब है। चीन और इलाके के पंजाबी, एक कौम को विधिवत नष्ट कर रहे है। पंजाबी दमन और शोषण के कारण बलूच पिछड़े हुये है और अभावों का जीवन जीने के लिये मजबूर है।
दरअसल पंजाबी लूटेरे, चीन से मिलने वाले लाभों के लिये बलुचिस्तान चीन को किश्तों में बेच रहे है और विरोध करने वाले बलूचों को चीन के इशारे पर तथाकथित सेना “निपटा” रही है। इस प्रक्रिया में मूल बलूच निवासियों को नुकसान है।
इस प्रकार ग्वादर बन्दरगाह और क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों का दोहन चीन अपने हितों के लिये करेगा और लूट के माल में से पंजाबियों को हिस्सा मिलता रहेगा।
पंजाबी, बलुचिस्तान के संसाधनों को लुटाने वाले दलाल बन गये है पाकिस्तान अपना लगभग आधा भू-भाग चीन को शोषण के लिये सौपने को है। और अक्षम बलूच लोग दुनियाभर से अपने अस्तित्व की रक्षा के लिये मदद मांग रहे है।
बलुचिस्तान में से होकर चीन-पाकिस्तान इकनोमिक काॅरीडोर (सीपीईसी) निकाला जा रहा है। जिससे बलूच लोगों के हितों पर भारी आघात लगेगा। इस इकनोमिक काॅरिडोर पर चीन का 46 अरब डालर का निवेश होगा। इसमें बलूच क्षेत्रों की कई ऊर्जा व आधारभूत परियोजनाऐं शामिल है। गरीब और बेबस, बलूच अपनी बर्बादगी देख रहे है। वे नहीं चाहते चीन के निवेशक उनके सरजमीं से प्राकृतिक संसाधन ले जाये। चीन जिसका मानवाधिकार रिकाॅर्ड बहुत ही खराब है, क्षेत्र के लोगों का दमन कर कीमती तेल, यूरेनियम, तांबें और संसाधनों के दोहन को बैचेन है। पाकिस्तानी पंजाबियों को तो मुफ्त की पार्टी में जश्न मनाने को मिल रहा है और बलूच बर्बाद हो रहे है।
मनु त्रिपाठी,
जयपुर।

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