स्वयंसेवक कार्यकारी मंडल की बैठक में पारित प्रस्तावों को समाज के बीच लेकर जाएंगे 

शाखाओं में प्रस्तावों पर होगी चर्चा

जयपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक में बेंगलुरु में सम्पन्न हुई। बैठक में श्रीराम मंदिर, नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) और जम्मू- कश्मीर पर प्रस्ताव पारित किए गए। देशभर में शाखाओं पर स्वयंसेवक प्रस्तावों पर चर्चा करेंगे और समाज के प्रबुद्धजनों तक भी पहुंचाएंगे।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र संघचालक डॉ. रमेश अग्रवाल ने बताया कि बैठक में देशभर में चलने वाले संघ के विभिन्न कार्यों को लेकर चर्चा हुई। सरकार्यवाह भैय्याजी जोशी ने प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। कार्यकारी मंडल ने देश की वर्तमान परिस्थितियों को लेकर तीन प्रस्ताव भी पारित किए हैं। इन प्रस्तावों पर शाखाओं में स्वयंसेवक चर्चा करेंगे। प्रस्तावों की पुस्तिका तैयार कर समाज के प्रबुद्धजनों से सम्पर्क कर वितरित की जाएगी। उन्होंने बताया कि तीनों प्रस्तावों को सोशल मीडिया समेत प्रचार के विभिन्न माध्यमों से जन- जन तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।

डॉ. अग्रवाल ने बताया कि कार्यकारी मंडल ने श्रीराम जन्मस्थान पर मंदिर निर्माण राष्ट्रीय स्वाभिमान का प्रतीक विषयक प्रस्ताव में बताया है कि सर्वोच्च न्यायालय के सर्वसम्मत निर्णय से सम्पूर्ण राष्ट्र की आकांक्षाओं के अनुरूप श्रीराम जन्मस्थान, अयोध्या, पर भव्य मंदिर के निर्माण की सब बाधाएं दूर हो गई हैं। सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय न्यायिक इतिहास के महानतम निर्णयों में से एक है।

वहीं दूसरे प्रस्ताव में कार्यकारी मंडल ने भारतीय संविधान को जम्मू कश्मीर राज्य में पूर्ण रूप से लागू करने एवं राज्य के पुनर्गठन के निर्णय का स्वागत किया है। राष्ट्रपति के संवैधानिक आदेशों से भारतीय संविधान को जम्मू कश्मीर राज्य में पूर्ण रूप से लागू करने और संसद के दोनों सदनों के अनुमोदन के बाद अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी करने का निर्णय सराहनीय है। जम्मू-कश्मीर तथा लद्दाख को केंद्रशासित प्रदेशों में पुनर्गठन के ऐतिहासिक निर्णय के लिए केंद्र सरकार एवं राष्ट्रहित में समर्थन देकर अपनी परिपक्वता का परिचय दिया है।

उन्होंने बताया कि तृतीय प्रस्ताव नागरिकता संशोधन अधिनियम को लेकर है। उन्होंने कहा कि यह कानून इस्लामिक देशों पाकिस्तान, बांग्लादेश एवं अफगानिस्तान में पांथिक आधार पर उत्पीडि़त होकर भारत आए हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी व ईसाइयों को भारत की नागरिकता देने जटिल प्रक्रिया को सरल बनाने वाला है। परंतु, जिहादी-वामपंथी गठजोड़, कुछ विदेशी शक्तियों तथा सांप्रदायिक राजनीति करनेवाले स्वार्थी राजनैतिक दलों के समर्थन से, समाज के एक वर्ग में काल्पनिक भय एवं भ्रम का वातावरण उत्पन्न करके देश में हिंसा तथा अराजकता फैलाने का कुत्सित प्रयास कर रहा है। कार्यकारी मंडल ने समाज के सभी वर्गों से आव्हान किया है कि विषय को तथ्यों के प्रकाश में समझें एवं समाज में सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाए रखने और राष्ट्रविरोधी षड्यंत्रों को विफल करने में सक्रिय भूमिका निभाएं।

उल्लेखनीय है कि 15 से 17 मार्च तक बैंगलुरू में प्रस्तावित संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा कोरोना वायरस के संबंध में सरकार की एडवाजरी के चलते स्थगित कर दी गई थी। ऐसे में 14 मार्च को अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक सम्पन्न हुई। संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में समाज जीवन और राष्ट्र को चिंतन को लेकर चर्चा और प्रस्ताव पारित करने की परम्परा रही है।

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