परिवार सशक्त होगा तो नारी सशक्त होगी – मृदुला सिन्हा

Mridula-Sinha-jiजयपुर (विसंकें). सेवा भारती दिल्ली प्रान्त के तत्वाधान में नेहरू संग्रहालय और पुस्तकालय के सभागार तीन मूर्ति भवन में महिला सशक्तिकरण विषय पर सम्मलेन आयोजित किया गया. मुख्य अतिथि गोवा की राज्यपाल मृदुला सिन्हा जी ने कहा कि महिला का सशक्तिकरण किसी योजना से नहीं होगा, बल्कि उसके परिवार से होगा. नारी तब सशक्त होगी, जब उसका परिवार सशक्त होगा. इसलिए परिवार सशक्तिकरण होना चाहिए. परिवार के पुरुष अपने घर की महिलाओं को हर तरह से संबल प्रदान करेंगे तो महिलाएं सभी क्षेत्रों में आगे बढ़ सकती हैं और आज ऐसा हो भी रहा है. भारत की महिलाएं समाज जीवन के हर क्षेत्र में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही हैं. चौका-बर्तन से लेकर सीमा की रक्षा में भी महिलाएं अहम भूमिका निभा रही हैं.

उन्होंने कहा कि समाज में आर्थिक विषमता के कारण वर्गों तथा परिवारों के बीच बना फासला सेवा भारती के कार्यक्रमों द्वारा कम हो रहा है. समाज को एक डोर में बाँध कर बच्चों को संस्कारित करने का काम सेवा भारती कर रही है. उन्होंने प्रधानमंत्री स्वच्छता अभियान से जुड़ने के लिए सेवा भारती की कार्यकर्ताओं को शपथ दिलवाई.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ दिल्ली के प्रान्त प्रचारक हरीश जी ने कहा कि देश का विकास सामाजिक समरसता स्थापित करके ही किया जा सकता है. समाज का कोई वर्ग भौतिक दृष्टि से भले ही उन्नति कर ले, किन्तु सामाजिक रूप से कमजोर रहता है तो समाज आगे नहीं बढ़ सकता, इसलिए समरसता जरूरी है. दुनिया के सबसे प्राचीन ग्रन्थ वेदों में जातिगत भेदभाव का कोई उल्लेख नहीं है. कालान्तर में बाहरी आक्रमणों के कारण कुछ दोष भारतीय समाज में आ गए, समाज कमजोर हो गया. अपनी रक्षा के लिए मजबूरी में जाति-प्रथा जैसी कुछ व्यवस्थाएं शुरू हो गईं. उदाहरणार्थ आक्रमणों से बचने के लिए रात्रि विवाह आरम्भ हो गए. अपनी माताओं बहनों को बाहरी आक्रान्ताओं से बचाने के लिए हमें भी पर्दा प्रथा शुरू करनी पड़ी. अपने समाज को विधर्मियों से बचाने के लिए अस्पृश्यता जैसे कड़े नियम बन गए. आज पूरे देश में 6 हजार जातियां हैं और उन 6 हजार जातियों में से 5 हजार जातियों का उद्भव पिछले 1200 वर्ष पुराना ही है, इससे पहले नहीं थीं यह जातियां.

उन्होंने कहा कि समरसता के लिए धैर्य की जरूरत है, क्योंकि सैकड़ों साल तक समाज के जिस अंग के साथ अत्याचार हुआ है उसके साथ सौ – डेढ़ सौ साल हमें धैर्यपूर्वक प्रयास करने होंगे, तब समरसता आएगी. संघ में कोई विषमता या भेद-भाव नहीं मानते, आपस में सब सहभोज करते हैं. आपस में जातियों का पता भी नहीं होता तब पता चलता है, जब विवाह निमंत्रण पत्र आता है. लेकिन पता चलने के बाद भी व्यवहार में कोई अंतर नहीं आता. इससे भी आगे बढ़कर हमें अपने विवाह आदि पारिवारिक कार्यक्रमों में अपनी गली मोहल्ले में काम करने वाले, सड़क पर जो सफाई करते हैं उन्हें भी हमें बुलाकर सम्मान देने की आवश्यकता है. सम्मलेन के अंत में सेवा भारती दिल्ली प्रान्त अध्यक्ष तरुण गुप्ता ने आए हुए सभी अतिथियों का धन्यवाद किया.

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