हमें पढाया गया पराजय का इतिहास—श्री देशपाण्डे

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टोंक, 14 जून। विश्व हिन्दू परिषद के अखिल भारतीय सह—संगठन मंत्री श्री विनायक राव देशपाण्डे ने कहा कि हिन्दू साम्राज्य,संस्कृति और इतिहास के संबंध में अंग्रेजों ने षडयंत्रपूर्वक हीनता की ग्रंथि पैदा करने का प्रयास किया। भारत के गौरवशाली और पराक्रमी इतिहास के स्थान पर हमें पराजय का इतिहास पढाया गया। वे मंगलवार को निवाई स्थित सरस्वती विद्या मंदिर के चल रहे बजरंग दल के सप्त दिवसीय शौर्य प्रशिक्षण वर्ग के शिक्षार्थियों को संबोधित करते हुए बोल रहे थे।
श्री देशपाण्डे ने कहा कि अंग्रेजों ने मैक्समूलर को लाखों रूपये देकर भारत का भ्रामक इतिहास लिखवाया। अंग्रेजों द्वारा लिखे इतिहास में पोरस को पराजीत बताया गया है जबकि सत्य और ही है। पोरस की सेना के आघातों के कारण झेलम के युद्ध के 21 दिन बाद सिकंदर की मृत्यु हुई थी। ऐसे अनेक सत्य घटनाओं को अंग्रेजों द्वारा निर्मित इतिहास में जगह नहीं दी गई।
पराक्रम का इतिहास
श्री देशपाण्डे ने कहा कि हमारा इतिहास पराजय का नहीं बल्कि सतत संघर्ष का रहा है। भारतीय राजाओं ने विश्व विजेता का स्वप्न संजोने वाले विदेशी आक्रांताओं को धूल चटाई। जिन मुसलमानों ने पचास साल में आधा यूरोप और चालीस सालों में आधा अफ्रीका जीत लिया उन मुसलमानों को दिल्ली जीतने में पांच सौ साल लग गये।
नैतिकता पर युद्ध
श्री देशपाण्डे ने कहा कि हिन्दुओं को पढाया जाता है कि हम इसलिए हारे कि हम संगठित नहीं थे। आपस में लडते—झगडते थे जबकि सच्चाई यह है इस्लाम का पूरा इतिहास ही शिया और सुन्नियों के आपसी झगडों से भरा पडा है। हमने कभी भी उनके झगडों का लाभ नहीं उठाया। हमने युद्ध में नैतिक मापदण्डों को पालन किया जबकि मुस्लिम आक्रां​ताओं ने सभी युद्ध अनैतिकता से जीते।

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